मानव तस्करी में लिप्त मित्र राष्ट्रों की टूरिस्ट बसें,लगा सकती हैं सुरक्षा में सेंध

मानव तस्करी में लिप्त मित्र राष्ट्रों की टूरिस्ट बसें,लगा सकती हैं सुरक्षा में सेंध

टूरिस्ट बसों की आड़ में इंडो-नेपाल सीमा पर बैठे मानव तस्कर 

सोनौली/महराजगंज -

काठमांडू वाया दिल्ली या फिर पोखरा वाया दिल्ली के बीच देशी विदेशी सैलानियों हेतू पर्यटन के नजरिए से संचालित टूरिस्ट बसों की आड़ में इंडो-नेपाल सीमा पर बैठे मानव तस्कर अपने कारोबार में चार-चांद लगाते नज़र आने लगें हैं।

प्राप्त समाचार के अनुसार मित्र राष्ट्रों के दूतावासों से परमिट प्राप्त टूरिस्ट बसों की संख्या महज मुट्ठी भर है। जबकि वर्तमान में वैद्य- अवैद्य कुल मिलाकर लगभग दो- दर्जन टूरिस्ट बसों का संचालन इंडो-नेपाल सीमा से मित्र राष्ट्रों के बीच अबाध गति से हो रहा है।

विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक यह पर्यटन बसें टूरिस्ट कम जबकि व्यावसायिक कहीं अधिक हो चुकी हैं।जिनकी आड़ में सरहद से आर-पार अच्छे-बुरे सभी तरह के खेल शुरू हो चुके हैं। पर्यटन बसों के संचालन के नियमों के मुताबिक एक मुल्क से दूसरे देश को जाने वाले यात्रियों के जत्थे की वापसी भी उसी बस में सुनिश्चित कराई जानी होती है।

जबकि वास्तविकता यह है कि सीमा के सुरक्षा एजेंसियों को इतनी फुर्सत नहीं जो इन यात्रियों के पड़ताल की जहमत उठा सकें।कोरम पूर्ति के नाम पर सीमा पर तैनात एस.एस.बी.महज सामानों की जांच कर अपने दायित्वों की इतिश्री कर लेती है,तो वहीं दूसरी तरफ आव्रजन चेक पोस्ट कार्यालय डेरा जमाए बैठे स्थानीय दलाल ऐसे बसों को हरी झंडी दिखाते नजर आते हैं।

विगत वर्षों के आंकड़ों से तुलना करें तो पूर्व में सरहद पर बहला-फुसलाकर खाड़ी देशों तक पहुंचाएं जाने वाली युवतियों की संख्या में गिरावट काफी तेजी से दर्ज की गई है। जानकारों की मानें तो ऐसा नहीं है कि युवतियों में जागरूकता बढ़ी है। बल्कि सीमा से संचालित मानव तस्करों के नेटवर्क ने अपना कारोबारी ट्रेंड ही बदल दिया है।

समय-समय पर इन बसों से तस्करी के जानवरों की खाल,मादक द्रव्यों की बरामदगी, विदेशी सैलानियों के अवैद्य रूप से सीमा के आर-पार घुसपैठ में होते रहने वाले धरपकड़, प्रतिबंधित वस्तुओं की तस्करी जैसे मामलों से आये दिन सुर्खियों में रहने वालीं यह टूरिस्ट बसें कभी भी सुरक्षा में सेंध लगा बड़ी घटना को अंजाम दे सकती हैं। जिस पर समय रहते मित्र राष्ट्रों के  सुरक्षा निकायों को लगाम लगाये जाने की आवश्यकता है।

Comments