राष्ट्रीय अखण्डता व एकता के रूप में मनाई गयी सरदार पटले की जयंती

 राष्ट्रीय अखण्डता व एकता के रूप में मनाई गयी सरदार पटले की जयंती

राष्ट्रीय अखण्डता व एकता के रूप में मनाई गयी सरदार पटले की जयंती

रन फॉर यूनिटी (दौड़) को डीएम ने दिखाई हरी झण्डी 

डीएम अधिकारियों व कर्मरियों की दिलाई शपथ
 

अन्तिम कुमार जैन 

 


ललितपुर

 

शासन के निर्देशानुसार लौहपुरुष सरदार बल्लभ भाई पटेल के जन्मदिवस 31 अक्टूबर को राष्ट्रीय अखण्डता दिवस के रुप में मनाया जाता है। इसके अंतर्गत लौहपुरुष सरदार बल्लभ भाई पटेल के संदेश के साथ उनके चित्र की एक प्रति जनपद के सभी पुलिस थानों, पुलिस लाईनों और समस्त पुलिस कार्यालयों में आमजन एवं पुलिस कार्मिकों को प्रेरणा हेतु वितरित की गई। इसके साथ ही जिलाधिकारी मानवेन्द्र सिंह की अध्यक्षता में आज कलैक्ट्रेट सभागार में लौहपुरूष सरदार बल्लभ भाई पटेल के जन्मोत्सव पर राष्ट्रीय अखण्डता दिवस का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम के तहत जिलाधिकारी द्वारा रन फॉर यूनिटी (दौड़) को हरी झण्डी दिखाकर रवाना किया गया। रन फॉर यूनिटी दौड़ में जनपद के विभिन्न विद्यालयों के छात्र-छात्राओं, पुलिस बल के जवान, खिलाड़ी, अधिकारी एवं जनपदवासियों द्वारा जनसहयोग किया गया। कार्यक्रम के तहत जिलाधिकारी एवं अन्य उपस्थित कर्मचारियों द्वारा  कलैक्ट्रेट सभागार में शपथ ली गई। जिलाधिकारी मानवेन्द्र सिंह ने अपने सम्बोधन में लौहपुरूष सरदार बल्लभ भाई पटेल के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि स्वतंत्रता के समय भारत में 562 देसी रियासतें थीं,

इनका क्षेत्रफल भारत का 40 प्रतिशत था। लौहपुरुष सरदार बल्लभ भाई पटेल ने आजादी के ठीक पूर्व (संक्रमण काल में) ही वीपी मेनन के साथ मिलकर कई देसी राज्यों को भारत में मिलाने के लिए कार्य प्रारंभ कर दिया था। सरदार पटेल और मेनन ने देसी राजाओं को बहुत समझाया कि उन्हें स्वायत्तता देना सम्भव नहीं होगा। इसके परिणामस्वरुप तीन को छोडक़र शेष सभी रजवाड़ों ने स्वेच्छा से भारत में विलय का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया। केवल जम्मू एवं कश्मीर, जूनागढ़ तथा हैदराबाद स्टेट के राजाओं ने विलय के प्रस्ताव को नहीं स्वीकारा। जूनागढ़ सौराष्ट्र के पास एक छोटी रियासत थी जो चारों ओर से भारतीय भूमि से घिरी हुई थी। यह रियासत पाकिस्तान के समीप नहीं थी, वहां के नबाब ने 15 अगस्त 1947 को पाकिस्तान में विलय की घोषणा कर दी। राज्य की सर्वाधिक जनता हिन्दु थी और भारत विलय चाहती थी। नबाब के विरुद्ध बहुत विरोध हुआ तो भारतीय सेना जूनागढ़ में प्रवेश कर गई। नबाब भागकर पाकिस्तान चला गया और 9 नवम्बर 1947 को जूनागढ़ भी भारत में चला गया।

फरवरी 1948 में वहां जनमत संग्रह कराया गया, जो भारत में विलय के पक्ष में रहा। हैदराबाद भारत की सबसे बड़ी रियासत थी, जो चारो ओर से भारतीय भूमि से घिरी थी, वहां के निजाम ने पाकिस्तान के प्रोत्साहन से स्वंतत्र राज्य का दावा किया और अपनी सेना बढ़ाने लगा। वह ढेर सारे हथियार आयात करता रहा। सरदार पटेल इस बात से चिन्तित हो उठे। अन्तत: भारतीय सेना 13 सितम्बर 1948 को हैदराबाद में प्रवेश कर गई।

तीन दिनों के पश्चात निजाम ने आत्मसमर्पण कर दिया और नवम्बर 1947 में भारत में विलय का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया। सरदार पटेल भारत के स्वतंत्रता सेनानी थे, भारत की आजादी के बाद वे प्रथम गृहमंत्री और उप प्रधानमंत्री बने। बारदौली सत्याग्रह की सफलता पर वहां की महिलाओं द्वारा बल्लभ भाई पटेल को ‘सरदार’ की उपाधि प्रदान की गयी। आजादी के बाद विभिन्न रियासतों में बिखरे भारत के भू-राजनैतिक एकीकरण में केन्द्रीय भूमिका निभाने के लिए पटेल को भारत का बिस्मार्क और लौहपुरूष भी कहा जाता है। उन्होने कहा कि स्वतंत्र भारत में अखण्डता स्थापित करने में सरदार बल्लभ भाई पटेल की महत्वपूर्ण भूमिका है, उन्होने ही सम्पूर्ण भारत को एक करके एक अखण्ड राष्ट्र का निर्माण किया है।  

 


सीडीओं ने दिलाई एकता व अखंता की शपथ


ललितपुर। विकास भवन प्रांगण में मुख्य विकास अधिकारी  की अध्यक्षता में सरदार बल्लभभाई पटेल के जन्म दिवस पर शपथ ग्रहण समारोह सम्पन कराया गया, जिसमें जनपद स्तरीय अधिकारियों/कर्मचारियों तथा युवक एवं महिला मंगल दलों एवं पी.आर.डी. जवान शपथ ग्रहण समारोह में सम्मिलित हुये। जिसमें राष्ट्र की एकता, अखडता और सुरक्षा को बनाए रखने के लिए स्वयं को समर्पित करूगा और अपने देशवासियों के बीच यह संदेश फैलाने का भी भरसक प्रयत्न करूंगा।

मैं यह शपथ अपने देश की एकता की भावना से ले रहा हॅू जिसे सरदार बल्लभभाई पटेल की दूरदर्शिता एवं कार्यो द्वारा संभव बनाया जा सके। मैं अपने देश की आंतरिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अपना योगदान करने का भी सत्यनिष्ठा से संकल्प करता हूॅ। सभी अधिकारियो/कर्मचारियों एवं पी0आर0डी0 जवानों एवं युवक एवं महिला मंगल दलों के सदस्यों ने उक्त शपथ को अपने मुख से दोहराते हुये शपथ ग्रहण की। कार्यक्रम में जिला विकास अधिकारी, ललितपुर द्वारा समस्त अधिकारियो/ कर्मचारियों का आभार व्यक्त किया गया। जिसमें युवा कल्याण एवं प्रादेशिक विकास दल विभाग, ललितपुर के अधिकारी/कर्मचारी उपस्थित रहे।

 

 


नेमवि में मनाई सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयंती 


ललितपुर। नेहरू महाविद्यालय के संस्कृत सभागार में राष्ट्र के गौरव सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयंती पर एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी का शुभारम्भ प्राचार्य डा. अवधेश अग्रवाल ने महापुरूषों के चित्र पर माल्यार्पण कर किया। 


कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्राचार्य डॉ. अवधेश कुमार अग्रवाल ने कहा कि लौह पुरूष सरदार वल्लभ भाई पटेल ने स्वतंत्रता के बाद देश की 562 रियासतों को भारत में विलय कर देश को एकता के सूत्र में बांधने का कार्य किया। यह उन्हीं के कौशल का परिणाम है कि आज देश एक संगठित शक्ति के रूप में विश्व में अपनी क्षमता एवं शक्ति का प्रमाण दे रहा है।  संस्कृत विभागाध्यक्ष डॉ. ओमप्रकाश शास्त्री ने कहा कि सरदार वल्लभ भाई पटेल त्याग, दृढ़ता, संकल्पशक्ति एवं विद्वता की मिशाल थे जिन्होंने देश की राजनैतिक तथा भौगोलिक परिस्थितियों को साकार किया। सरदार पटेल एक कुशल राजनैतिक व ईमानदारी की प्रतिमूर्ति एवं प्रशासनिक प्रतिभा से दक्ष पुरूष थे।

इतिहास विभागाध्यक्ष डॉ. पंकज शर्मा ने कहा कि सरदार वल्लभ भाई पटेल ने एक छोटे से परिवार में जन्म लेकर अपनी प्रखर मेघा शक्ति से न सिर्फ राजनैतिक शिखरों का स्पर्श किया बल्कि राष्ट्र की एकता व अखण्डता को बनाये रखने में अक्षुण भूमिका निभाई। अंत में प्राचार्य डॉ. अवधेश अग्रवाल द्वारा सभी प्राध्यापकों, शिक्षणेत्तर कर्मचारियों एवं छात्र/छात्राओं को देश को उन्नति के पथ पर अग्रसर करने हेतु राष्ट्रीय एकता बनाये रखने की शपथ दिलाई गई। 
 

 

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