प्रदूषण से प्रभावित होने लगीं ब्रज की परंपराएं

प्रदूषण से प्रभावित होने लगीं ब्रज की परंपराएं

-कुण्ड और नदियों में आचमन और स्नान से कतराने लगे श्रद्धालु


-मान्यताओं की बेडियों में जकडे श्रद्धालु हो रहे बीमार


-लगातार हो रहे हादसों के बाद आचमन और स्नान से कतरा रहे हंै श्रद्धालु
 

मथुरा

प्रदूषण के प्रभाव से अब ब्रज की परंपराएं भी प्रभावित होने लगी हैं। कान्हा की नगरी में जल प्रदूषण का स्तर भी इससे पता चलात है।

मान्यताओं के बेडियों में बंधे श्रद्धालु इस के दुष्प्रभाव के शिकार हो रहे हैं। जल प्रदूषण का दुष्प्रभाव इस कदर है कि अब लोग मान्यताओं, परंपराओं और तमाम धार्मिक दृष्टातों को दरकिरान कर ब्रज के नदी और कुण्डों में आचमन से मुहं मोड रहे हैं।

राधाकुंड व श्याम कुंड के प्रदूषित जल की रिपोर्ट उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण को दे चुका है।

इसमें इस जल को आचमन योग्य नहीं माना है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक इन दोनों कुंडों में प्रदूषण की मात्रा अत्याधिक है। घुलित ऑक्सीजन यहां मानक से बहुत कम पाई गई है। प्रदूषण के रूप में बीओडी 10 मिली ग्राम प्रतिलीटर तक है। इसे आचमन योग्य नहीं माना जा सकता है। गिरिराज परिक्रमा मार्ग स्थित राधाकुंड श्याम कुंड में प्रदूषण का मुख्य कारण यहां आसपास की आबादी है। घर और आश्रम से निकलने वाले सीवर और नालों का पानी सीधे श्यामकुंड और राधाकुंड में गिरते हैं।

10 हजार श्रद्धालु कर रहे थे कार्तिक माह में नियम सेवा
मणिपुर और पश्चिमी बंगाल के करीब 10 हजार श्रद्धालु कार्तिक माह में नियम सेवा के लिए आते हैं। वह यहीं रहकर रोजाना राधाकुंड में स्नान और आचमन करते हैं। 25 अक्टूबर से राधाकुंड के जल के सेवन से श्रद्धालु बीमार हो रहे थे। यह श्रद्धालु उल्टी, दस्त और पेट दर्द के शिकार थे। राधाकुंड के चिकित्सक डॉक्टर भगवत गोस्वामी ने बताया कि पिछले करीब चार पांच दिन से रोजाना सात-आठ डायरिया पीड़ित श्रद्धालु आ रहे थे। आज इनकी संख्या में एकाएक बढ़ोतरी हो गई है। एसडीएम राहुल यादव ने बताया कि नायब तहसीलदार सतीश चंद बघेल और सामुदायिक स्वास्थ केंद्र प्रभारी रूपेश सिंह राधाकुंड पहुंच गए हैं। जो लोग बीमार है, उनको उपचार कराया जा रहा है। उन्होंने बताया कि 25 अक्टूबर से अब तक करीब सात दर्जन श्रद्धालु बीमार हुए हैं। इससे पहले राधारानी ब्रजयात्रा में बडी संख्या में श्रद्धालु बीमार हुए थे। इन दोनों घटनाओं से प्रशासन ने कोई सबक नहीं लिया है।

श्रद्धालुओं से छुपाई जा रही प्रदूषण की हकीकत
यहां के पण्डा, पुजारी, पुरोहित और धर्म के ठेकेदार अब भी श्रद्धालुओं को इस बात के लिए विवश कर रहे हैं कि वह आचमन करें, स्नान करें और परंपरागत पूजा अर्चना को ही निभाते रहें। जबकि कुण्डों, पवित्र तालाबों और नदियों का पानी इस योग्य नहीं रह गया है जिसमें आचमन और स्नान किया जा सके। इसके बाद भी अपने लाभ के लिए श्रद्धालुओं से सच्चाई छुपाई जा रही है और उनके जीवन को खतरे मे ंडाला जा रहा है।  कार्तिक माह में नियम सेवा के लिए मणिपुर और पश्चिम बंगाल के श्रद्धालु राधाकुंड के जल के आचमन लेने से डायरिया के शिकार हो गए। हालांकि पिछले पांच दिन से करीब सात-आठ श्रद्धालु रोजाना बीमारी की चपेट में आ रहे थे। मंगलवार को रोगियो की संख्या में बढ़ोतरी हुई और कुल रोगियों की संख्या करीब सात दर्जन तक पहुंच गई।

 

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