धोखा धड़ी कर कूट रचित ढंग से हड़पी बाइक

धोखा धड़ी कर कूट रचित ढंग से हड़पी बाइक

धोखा धड़ी कर कूट रचित ढंग से हड़पी बाइक

 

रणवीर सिंह - क्राइम संवाददाता

राजधानी, लखनऊ:-

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में जहां एक तरफ एसएसपी कलानिधि नैथानी पुलिस और जनता के बीच आपकी तालमेल बनाए रखने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं।

वहीं दूसरी तरफ पुलिस प्रशासन अपनी जिम्मेदारियों से बचती हुई नजर आ रही है। पीड़ित व्यक्ति थाने पर यदि शिकायत लेकर जाता है। तो उसे गुमराह किया जाता है। इधर से उधर दौड़ाया जाता है। और मामले का शिकायती पत्र तो ले लिया जाता है। लेकिन मुकदमा पंजीकृत नहीं किया जाता है। इस तरह के गैर जिम्मेदाराना रवैए से कहीं ना कहीं पुलिस प्रशासन पर भी सवाल खड़े होते हैं।

क्या था पूरा मामला...

आपको बता दें बीते 2007 में अलीगंज सेक्टर -M निवासी पीड़ित ने लाल कलर की एक सीबीजेड एक्सट्रीम मोटरसाइकिल फैजाबाद रोड स्थित सन  मोटर्स से खरीदी थी जिसका रजिस्ट्रेशन नहीं हो पाया था  

बाइक लखनऊ में ही घर पर बिना रजिस्ट्रेशन के काफी दिन खड़ी थी वर्ष 2015 में  उन्होंने फिर से बाइक का रजिस्ट्रेशन कराने का प्रयास किया लेकिन किसी कारणवश रजिस्ट्रेशन नहीं हो पाया उसी दौरान उनकी मुलाकात मोबीन खान  मुलायम नगर निकट मछली मंडी से हुई

तभी उसने रजिस्ट्रेशन कराने के लिए बाइक तथा उसके  पेपर ले लिए थे। कई बार पीड़ित की बात मोबीन अंसारी से कई नंबरों से बातचीत हुई लेकिन उसने रजिस्ट्रेशन कराकर बाइक वापस नहीं किया लगातार वह गुमराह करता रहा। काफी दिन बीतने के बाद वह सऊदी भाग गया कई बार उससे संपर्क करने का पीड़ित ने प्रयास किया

तब जाकर सोशल मीडिया पर मोबीन से संपर्क हो पाया। संपर्क होने पर जब पीड़ित में अपनी मोटरसाइकिल मांगा तो मोबीन ने कहा कि तुम्हारे पास क्या सबूत है कि मोटर साइकिल हमारे पास है। जब पीड़ित को उसके ऊपर संदेह हुआ तो पीड़ित इसकी सूचना देने इंदिरा नगर थाने पहुंचा जहां पर पुलिसकर्मियों द्वारा गाजीपुर थाने का मामला बताकर वापस भेज दिया गया।

जब पीड़ित गाजीपुर थाने पहुंचा तो गाजीपुर पुलिस ने चिनहट थाने का मामला बताकर चिनहट थाने भेज दिया उसके बाद जब पीड़ित चिनहट कोतवाली पहुंचा तो कमता चौकी इंचार्ज ने प्रार्थना पत्र तो ले लिया लेकिन मुकदमा पंजीकृत नहीं किया।

वहीं पीड़ित ने बताया कि इस मामले में दो बार ऑनलाइन शिकायत भी किया लेकिन अभी तक जिसका कोई रिस्पांस नहीं आया बल्कि रिजेक्ट हो गया पीड़ित ने बताया कि गाड़ी मांगने पर मोबीन द्वारा तरह तरह-तरह की धमकियां दी जा रहीं और फोन करवाया जा रहा है।

हालांकि मोबीन के घर वालों ने आश्वासन दिया है कि 3 दिन में बाइक पीड़ित को मिल जाएगी। हमें चौकी के चक्कर काटने के बाद पीड़ित थक हारकर अपने घर लौट आया।


   आपको बताते चलें कि पीड़ित एक मीडियाकर्मी है। लेकिन पीड़ित ने कहीं भी पुलिस को मीडियाकर्मी नहीं बताया। 

अब सवाल यह उठता है कि जब मीडिया कर्मी के साथ पुलिस ने ऐसा बर्ताव किया तो आम जनता के साथ पुलिस थानों में कैसा व्यवहार किया जाता होगा।

Support to Swatantra Prabhat Media

T & C Privacy

Comments