रपटा के अभाव में ग्रामीण बरसात में हो जाते हैं गांव में कैद

रपटा के अभाव में ग्रामीण बरसात में हो जाते हैं गांव में कैद

मौदहा विकास क्षेत्र का छिमौली गांव आजादी के बाद विकास की वाट जोह रहा है मगर आला अधिकारियों के साथ ही किसी भी जनप्रतिनिधि ने इस क्षेत्र के विकास के लिए कोई ध्यान नहीं दिया है। गांव के बगल से गुजरने वाली चंद्रावल नदी पार जाने के लिए रपटा व रोड का निर्माण न होने से बरसात के मौसम में गांव के लोग कैद होकर रह जाते हैं। नदी के पार की खेतों की रखवाली न हो पाने से मवेशी फसलें तबाह कर देते हैं। इस दौरान ग्रामीणों के बीमार होने पर इलाज की समस्या पैदा हो जाती है। तमाम चुनावों के बाद यहां की समस्या मुद्दा नहीं बन सकी है।

लोकसभा व विधानसभा चुनाव होने पर विभिन्न पार्टियों के नेता गांव वोट के लिए तो पहुंचते हैं। यहां की समस्या से रूबरू कराने पर चुनाव जीतने के बाद समस्या समाधान का आश्वासन देकर गायब हो जाते हैं। जिसके चलते उनकी समस्याओं का आज तक स्थाई रूप से कोई हल नहीं निकल सका है। ग्रामीणों ने बताया कि बरसात के मौसम में जब चंद्रावल नदी का जलस्तर बढ़ जाता है तो वह लोग जान जोखिम में डालकर रस्सी के सहारे नदी पार करने को मजबूर हो जाते हैं। इस गांव के आसपास से बने संपर्क मार्ग पूरी तरह से उखड़ चुके हैं मगर इन मार्गों की मरम्मत को लेकर कोई प्रयास नहीं किए जा रहे हैं। जिसके चलते वाहन तो दूर उन लोगों का पैदल चलना दुश्वार हो गया है। स्कूल भी नदी पार होने से बरसात के मौसम में बच्चों की पढ़ाई तक बंद हो जाती है। ग्रामीणों ने कहा कि जनप्रतिनिधियों की अनदेखी के चलते पिछले वर्ष स्कूल जा रहे बच्चों से भरी नाव पलट जाने के बाद उन लोगों को जान जोखिम में डालकर बच्चों को बचाना पड़ा था। इसके बाद सभी लोगों ने अपने बच्चों को स्कूल भेजना बंद कर दिया था।

 

 

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