मोहनलालगंज लोकसभा क्षेत्र से मुद्दे हुए गायब, सांसद कौशल किशोर पर जनता नहीं दिखा पा रही है विश्वास

मोहनलालगंज लोकसभा क्षेत्र से मुद्दे हुए गायब, सांसद कौशल किशोर पर जनता नहीं दिखा पा रही है विश्वास

सांसद निधि का  लगभग 70% हुआ खर्च तो विकास हुआ कहां

लखनऊ:

भाजपा मुद्दों को छुपा कर चुनावी मैदान में तो वहीं सपा बसपा गठबंधन प्रत्याशी के सामने जैसे कोई मुद्दा ही नहीं. 2014 से 2019 तक मोहनलालगंज संसदीय सीट से कौशल किशोर भाजपा से निर्वाचित होकर संसद पहुंचे थे. अब भाजपा डंका पीटते आ रही है कि सबसे ज्यादा सांसद कोष को खर्च कर विकास का कार्य, उनके सांसद ने मोहनलालगंज में पूरा किया है.

जबकि जमीनी हकीकत तो कुछ और ही है मोहनलालगंज लोकसभा सीट वर्ष 1962 में वजूद में आई तब से लेकर आज तक 14 बार लोकसभा चुनाव में यहां की जनता भाग ले चुकी है. वर्तमान सांसद और भाजपा प्रत्याशी कौशल किशोर 250000000 सांसद निधि में 17.42 करोड़ खर्च कर चुके हैं जो कि लगभग 70% सांसद निधि खर्च का अनुमान है.

मोहनलालगंज लोकसभा क्षेत्र में 5 विधानसभा सीटें जिनमें सिधौली, मलिहाबाद, बख्शी का तालाब, सरोजनीनगर, मोहनलालगंज लगभग 30 लाख आबादी के साथ आते हैं. अलग अलग विधानसभा क्षेत्रों के विकास का मुआयना करें तो जमीनी हकीकत और खुलकर सामने आ जाती है. शिक्षा रोजगार रोटी कपड़ा मकान जैसे मूलभूत आवश्यकता तो सैकड़ों कोसों दूर नजर आएंगे. कांग्रेस के शासन काल में जो विकास की गति मोहनलालगंज ने अपने में समेटे शायद वह भाजपा सरकार में विकास की रफ्तार धीमी हो गई. लखनऊ उन्नाव से सटे मोहनलालगंज लोकसभा क्षेत्र राजधानी से नजदीक होने पर जो विकास की गति मांग रही थी उस पर सांसद कौशल किशोर विफल नजर आ रहे हैं.

स्थानीय जनता पूर्णता फल पट्टी क्षेत्र में होने की वजह से आम के बागों पर निर्भर है. वहां भी ठेकेदारी प्रथा ने किसानों की कमर तोड़ रखी है अनाजों और गन्ना की बात भी करें तो सही दाम ना मिलने से लोग बौखलाए हुए हैं. औद्योगिक विकास बिल्कुल ना के बराबर है स्थानीय जनता जीएसटी नोटबंदी को लेकर बीजेपी की खिलाफत पर पहले ही उतर आई है.

सड़कों और सौंदर्यीकरण माया और अखिलेश की देन यहां की जनता मान रही है. पानी की असुविधा, नहरों में समय पर पानी ना मिलने से खेती में आने वाली दिक्कत, कृषि तकनीक में 30 साल पुराना तकनीक आज भी किसानों के द्वारा उपयोग में लाया जा रहा है. बच्चों की शिक्षा और महंगाई ने यहां की जनता को पहले ही त्रस्त कर रखा है. आम जनजीवन छोटे-मोटे पान गुमटी और दुकान खोल चाय नाश्ता बेचकर गुजारा चला रही. 

वहीं सांसद निधि का 70% खर्चा आखिर किस पर हुआ रेल लाइन मोहनलालगंज से सिधौली के लिए जनता जब आवाज उठाने लगी तो उस पर जरूर कार्य रेलवे प्रशासन के द्वारा हुआ. लेकिन यह भी सोचने वाली बात है यहां 90% आबादी कृषि कार्य पर निर्भर है जिस पर सांसद महोदय का बिल्कुल भी ध्यान नहीं रहा. इन 5 वर्षों में यहां की आम जनता शिक्षा  रोटी कपड़ा मकान बिजली पानी युवाओं के लिए कोई रोजगार ना होने की वजह से पलायन करना कल कारखाने की कमी, व्यवसायिक और घरेलू स्तर पर 2 से 4% लोग ही बेहतर जिंदगी गुजर बसर कर सकते हैं. फल पट्टी क्षेत्रों में लगातार पेड़ों का कटान और आवास के नाम पर प्लाटों का आवासीयकरण धड़ल्ले से होता जाना  भी  यहां की तरक्की को रोकने में अहम रोल अदा कर रहा है बाकियों के लिए आज भी वही दिक्कत सामने नजर आ रही है जो 20 साल पहले थी. 

पहले की सरकारों में पीने की पानी की जो व्यवस्था की गई उन्हीं की देखरेख सही नहीं हो पाई और वह सभी नलकूप धीरे-धीरे काम करने बंद कर चुके हैं. सभी हैंडपंपों की खस्ताहाल इन क्षेत्रों में देखे जा सकते हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि उद्घाटन के नाम पर निजी विद्यालयों और कार्यक्रमों में सांसद महोदय को जरूर देखा जा सकता है लेकिन सांसद निधि के खर्चों को जमीनी स्तर पर आकलन कर पाना बड़ा ही मुश्किल है. जिसकी वजह से विकास कार्य ना के बराबर है.

मतलब साफ है मुद्दों को दरकिनार कर बीजेपी सांसद चुनावी मैदान में दोबारा कूद पड़े हैं लेकिन देखना यह होगा कि मोहनलालगंज की जनता क्या इस बार फिर सांसद कौशल किशोर पर अपना विश्वास दिखा पाती है या मोहनलालगंज इस बार दूसरे प्रत्याशियों को सत्ता सौंपने में विश्वास रखती है. 

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