करण का यह सब्जेक्ट बहुत पुराना है अभिषेक और मैं उस वक्त उनके एसिसटेंड डायरेक्टर थे

करण का यह सब्जेक्ट बहुत पुराना है अभिषेक और मैं उस वक्त उनके एसिसटेंड डायरेक्टर थे
  • कलंक आपको कैसे मिली?
  • करण का यह सब्जेक्ट बहुत पुराना है। अभिषेक और मैं उस वक्त उनके एसिसटेंड डायरेक्टर थे। तब अभिषेक ने मुझे बताया था कि करण ने उन्हें इसकी (कलंक की) स्टोरी सुनाई है। उस वक्त कोई नहीं सोच सकता था कि एक दिन वही (अभिषेक) यह फिल्म डायरेक्ट करेंगे और मैं इसमें एक्टिंग करूंगा।
  • इस फिल्म में आपका कैरेक्टर बदलापुर से ज्यादा स्ट्रॉन्ग नजर आ रहा है?  
  •  इसमें मेरा जफर का कैरेक्टर हार्ड हिटिंग, इंटेंसिव और सीरियस है। मेरा मानना है कि लोग बुरे नहीं होते बल्कि उनके साथ होने वाले हादसे बुरे होते हैं। इसमें परवरिश काफी अहमियत रखती है। यह फिल्म 1940 के आस-पास की है। उस समय माहौल भी ऐसा चल रहा था और लोग ऐसी स्थितियों से जूझ रहे थे। उस तरह के माहौल में लोग भी हार्ड हो गए थे। जब तक हादसे न हो तो पता ही नहीं चलता कि किस पर क्या बीत रही है। इंसान की बैक स्टोरी पता नहीं चल पाती। जफर भी मिसअंडरस्टुड कैरेक्टर है।
  •  इसमें कलंक के मायने क्या हैं?  
  •  ‘‘कलंक’ की कहानी कलंक और प्यार पर है। कभी-कभी सच्चा प्यार भी ‘‘कलंक’ बन जाता है और कभी-कभी ‘‘कलंक’ के चलते प्यार अधूरा रह जाता है। यही बात फिल्म में समझाने की कोशिश गई है। दरअसल, हमारा समाज सच्चे प्यार को भी कलंक मान लेता है। दो लोग चाहे अलग-अलग धर्मों के हों, वे जब आपस में प्यार करते हैं, तो उसकी फीलिंग वही समझ सकते हैं लेकिन दूसरों की नजर में वह कलंक हो जाता है।
  •  क्या यह भी बंटवारे पर आधारित फिल्म है?  
  •  बंटवारा बैकड्रॉप में है। हम हिंदू-मुस्लिम के बीच ज्यादा नहीं उलझे। हमने इसे मुद्दा नहीं बनाया क्योंकि दर्शक ऐसे सब्जेक्ट से बोर हो चुके हैं।
  • कैरेक्टर के लिए क्या रिसर्च भी करनी पड़ी?  
  •  सेट पर मौलवी रहते थे, जो मुझे बताया करते थे। हालांकि इससे पहले भी मैं मुस्लिम कैरेक्टर कर चुका हूं। मैंने कहा था कि इस कैरेक्टर के लिए मुझे वीडियो मत दिखाओ, फिजिकली दिखाओ। अगर मीनिंग और ब्यूटी समझते हो तो किरदार निभाने में मजा आता है। इस फिल्म में मैने सुरमा लगाकर और पठानी सूट पहनकर जब सेट पर एंट्री ली, तो वहां मौजूद 500 डांसर्स मुझे देखकर चिल्लाने लगे। यह अलग तरह का रिस्पॉन्स था। पहला शॉट नमाज का ही था और मुझे ब्लैसिंग मिल गई थी।
  • यह फिल्म भारतीय संस्कृति पर कितना प्रकाश डालेगी?  
  •  मैं तो कहता हूं कि हमारा देश ही यूनीक है। मैं विभिन्न देशों में घूमा हूं लेकिन भारत जैसा सेक्यूलर देश मुझे कोई नहीं मिला। यहां हर मजहब के लोग रहते हैं। उन्हें जीने की आजादी है। हमारी संस्कृति ने सभी धर्मों को स्वीकार किया है। मैं सुई धागा के लिए ऐसी जगह शूटिंग की थी, जहां मस्जिद और जैन मंदिर साथ-साथ थे। वहां कोई प्रॉब्लम नहीं थी।

  • फिल्म कोई संदेश देती है?  
  •  हम भारतीय संस्कृति के दायरे से बाहर नहीं गये। फिल्म में सभी धर्मों को सम्मान दिया है। किसी की भावनाओं को चोट नहीं पहुंचाई। मैं तो कहता हूं कि बिल्कुल सही समय पर यह फिल्म आ रही है।
  • किसकी बायोपिक करना चाहेंगे?
  • मैं बायोपिक नहीं करना चाहता क्योंकि अब भेड़चाल हो गई है। हां अगर करना भी पड़े तो अपने पापा की करूंगा। जिन्होंने अपनी जिंदगी में काफी उतार-चढ़ाव देखे हैं। उन्होंने लगभग सभी सितारों के साथ काम किया है। उनकी जिंदगी रंग बिरंगी रही है।
  • डायरेक्टर अभिषेक बर्मन के बारे में क्या कहेंगे?
  • वह टैलेंटेड और जिद्दी डायरेक्टर है। इस फिल्म के लिए उसने जिंदगी लगा दी। उसे परवाह नहीं थी कि शॉट देते समय मेरा हाथ या पांव भी टूट जाए। उसे तो मुझसे अच्छा काम निकालना था और उसमें सफल रहा।
  •  संजय दत्त के साथ काम करते हुए कैसा लगा?    
  • वह फनी और सॉफ्ट एक्टर हैं। मेरे हर शॉट को बेस्ट बताते थे लेकिन अभिषेक को वह शॉट पसंद नहीं आता था। इसलिए टेक पर टेक होते रहते थे।
  •  माधुरी दीक्षित के साथ भी काम किया?  
  •  माधुरी जी के साथ मेरे टक्कर वाले सीन हैं। वह सेट पर आती तो हिलती नहीं थी। जिस पैशन के साथ वह काम करती हैं, इसलिए वह ग्रेट हैं।
  • खबर है कि स्त्री के सीक्वल में आपने राजकुमार राव को रिप्लेस किया है?    
  • मुझे आज-कल सब लोग यही पूछ रहे हैं, लेकिन बता दूं कि मैं स्त्री-2 में काम नहीं कर रहा हूं।
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