दूर चला जाता हूं  मां-पापा से टाइगर श्रॉफ

दूर चला जाता हूं  मां-पापा से टाइगर श्रॉफ

बॉलीवुड में अपने बेहतरीन एक्शन और एक्टिंग से सुर्खियां बटोरने वाले टाइगर श्रॉफ कई फिल्मों में अपने अलग-अलग किरदारों के दशर्कों के दिल को जीत चुके हैं। उनकी अपकमिंग फिल्म ‘‘स्टूडेंट ऑफ द ईयर 2’ आने वाली है, जिसके प्रमोशन में टाइगर व्यस्त हैं। उनसे हुई श्याम शर्मा की मुलाकात- 

स्पोर्ट्स में मेरी शुरू से ही दिलचस्पी रही है। इस फिल्म में कबड्डी खेलने का मौका मिला। कबड्डी जैसे स्पोर्ट्स के लिए मैंने ऑथेंटिक बॉडी लैंग्वेज की भी खूब तैयारी की स्टूडेंट ऑफ द ईयर 2 आपके लिए कितनी चैलेंजिंग है?इससे पहले मैं बागी जैसी एक्शन फिल्में में आ चुका हूं, जिसके लिए मुझे फिजिकली मेहनत करनी पड़ी थी लेकिन अब किरदार बिल्कुल डिफरेंट था। मुझे स्टूडेंट के किरदार में खुद को एडजस्ट करना था, जो मेरे लिए बड़ा चैलेंजिंग था। मैंने कभी कॉलेज की लाइफ नहीं देखी है क्यूंकि स्कूल के बाद मुझे ‘‘हीरोपंती’ मिली। ‘‘हीरोपंती’ ही मेरा कॉलेज था।एक्शन हीरो के बाद स्टूडेंट बनने के लिए ट्रांसफॉर्मेशन किया?स्टूडेंट के रोल के लिए करण, डायरेक्टर पुनीत मल्होत्रा और कॉस्ट्यूम डिजाइनर मनीष मल्होत्रा ने मेरे लुक पर काफी मेहनत की। उन्होंने मुझे आजकल के लड़कों का अंदाज दिया। बॉडी लैंग्वेज पर भी काम हुआ।

डाइट पर काफी ध्यान देना पड़ा। मुझे माचो मैन जैसा नहीं, बल्कि स्टूडेंट दिखना था इसलिए मुझे अपने मसल्स लूज करने पड़े। एक तरह से मैंने खुद को डायरेक्टर के हवाले कर दिया था।इस फिल्म की स्टूडेंट ऑफ द इयर वन के साथ तुलना तो की ही जाएगी?बिल्कुल की जाएगी और इस स्थिति के लिए हम तैयार हैं। चूंकि यह हिट फिल्म की फ्रेंचाइज है। तीन स्टार्स इसमें लॉन्च हो रहे हैं इसलिए लोग इसकी तुलना करेंगे ही। मैं धर्मा में आउट साइडर हूं इसलिए नर्वस मैं भी हूं। मुझपर कामयाबी को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी है लेकिन इसके लिए मैं तैयार हूं। फिल्म के लिए सबसे पहले किसने अप्रोच किया था?जब मैं बागी कर रहा था, करण सर ने मुझे अपने ऑफिस बुलाया। पहली मीटिंग में तो उन्होंने मुझसे पूछा कि मुझे किस तरह की फिल्में पसंद हैं। मैंने उन्हें बता दिया। दूसरी बार फिर मिला। इस बार उन्होंने मुझसे कहा कि क्या तुम स्टूडेंट ऑफ द इयर 2 करना चाहोगे। मैं हैरान होने के साथ-साथ खुश भी था, मैंने उनसे पूछा कि सर क्या वाकई आप मुझे लेना चाहते हैं क्योंकि यह वरु ण, सिद्धार्थ और आलिया की फिल्म है।

उन्होंने कहा कि बिलकुल। वरु ण, आलिया, सिद्धार्थ फिल्म कर चुके हैं और वे ग्रेजुएट भी हो चुके हैं। तनाव के क्षणों को किस तरह झेलते हैं?जब भी मैं टेंशन में होता हूं तो माता-पिता से दूर चला जाता हूं। कहीं छुट्टियां बिताने के लिए निकल जाता हूं ताकि पैरेंट्स को मेरे तनाव की जानकारी न हो। दरअसल, मम्मी-पापा मुझे लेकर बहुत ही संवेदनशील है। मैं नहीं चाहता कि मेरी किसी भी बात का उन्हें अंदाजा लगे और इससे वह भी दुखी हो जाएं।डायरेक्टर पुनीत मल्होत्रा के साथ कैसा एक्सीरियंस रहा?शॉट्स के दौरान पुनीत ज्यादा टेक्स लेते थे क्यूंकि वे खुद से कभी सैटिस्फाई नहीं होते थे। मैं हमेशा और बेहतर करने की सोचता था। हालांकि मैं उन्हें परेशान भी बहुत करता था और कहता कि प्लीज मुझे तुम एक और टेक देने दो।क्या स्टूडेंट के तौर पर इस फिल्म में भी एक्शन किया है?एक्शन इस फिल्म में भी है लेकिन वह अलग तरह का है।

जिस तरह से कॉलेज के स्टूडेंट्स के बीच एक्शन होता है। इसमें एक्शन का एक ही प्रकार है। जिसे करने में मुझे बहुत मजा आया। हालांकि मेरे लिए यह आराम वाली फिल्म थी। वरना अब तक बागी जैसी फिल्मों में ऐक्शन इतना ज्यादा हैवी होता है कि चोटिल होने के साथ-साथ आप एग्जॉस्ट भी होते जाते हो। फिल्म में कबड्डी जैसा स्पोर्ट्स भी है तो क्या कबड्डी की ट्रेनिंग ली? स्पोर्ट्स में मेरी शुरू से ही दिलचस्पी रही है। इस फिल्म में कबड्डी खेलने का मौका मिला। कबड्डी जैसे स्पोर्ट्स के लिए मैंने ऑथेंटिक बॉडी लैंग्वेज की भी खूब तैयारी की। देखने में कबड्डी बहुत आसान लगती है, मगर उसमें बहुत स्टेमिना लगता है। वह मेरे लिए फिजिकल और टैक्निकल दोनों नजरिए से बहुत ही चुनौतीपूर्ण रहा।

एक्शन सीन्स से क्या मॉम-डैड को डर नहीं लगता? जब भी मैं स्टंट या ऐक्शन सीन्स करता हूं, मॉम-डैड घबरा जाते हैं। वे अक्सर मुझे हिदायत देते हैं कि जरूरी न हो, तो करने की जरूरत नहीं है। आजकल टेक्नॉलाजी इतनी एडवांस हो चुकी है कि आप कुछ भी दिखा सकते हो लेकिन मेरी कोशिश यही होती है कि मेरे एक्शन सीन्स विश्वसनीय लगें। मैं एक्शन दृश्यों को करते हुए उसके डर या हादसे के बारे में जितना कम सोचूं, उतना मेरे लिए अच्छा है। जब आप इस तरफ सोचने लगते हैं, तो उससे आपके मन में डर पैदा होता है और उस डर के कारण आप अपनी एनर्जी को होल्ड बैक कर लेते हो। एक्टर बनने के बाद पापा से रिश्तों में क्या बदलाव आया?पापा और मैं जब भी मिलते हैं, फिल्मों की बातें नहीं करते। हम लाइफ और हेल्थ की बातें ज्यादा करते हैं। वह लाइफ को लेकर बहुत लेक्चर देते रहते हैं और मुझे भी उनकी बात सुननी पड़ती है।

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