"खाली प्लॉटों की होगी सफाई" की खुली पोल...

"खाली प्लॉटों की होगी सफाई" की खुली पोल...

"खाली प्लॉटों की होगी सफाई" की खुली पोल...
स्वच्छ भारत अभियान को पलीता लगा रहे खाली प्लॉट मालिक ?

कहते हैं तस्वीरें भी बोलती है, आज हम आपको दिखा रहे हैं लखनऊ शहर के पॉश इलाके इंदिरा नगर के कुछ दृश्य जिसमे खाली प्लॉट की सफाई तो दूर की बात है, सार्वजनिक पार्क ही कूड़ा घर या जंगल में परिवर्तित हो चुके हैं, जी हाँ यह दृश्य इंदिरा नगर के शिवाजीपुरम, शिवालिक एन्क्लेव एवं मायावती कॉलोनी के हैं I

जहाँ एक ओर शिवाजीपुरम, इंदिरा नगर का शिवाजी पार्क ही जंगल बन चुका है वहीँ यहाँ के खाली प्लॉट भी कूड़ा घर या जंगल का रूप ले चुके हैं, कई जगह इन प्लॉटों की दीवार ही ढह गयी है और उसके मलबे से नाली भी पटी पड़ी हैं, यही स्तिथि मायावती कॉलोनी के खाली प्लॉट एवं मायावती कॉलोनी सब्जी मंडी मार्ग के किनारे बसी राम विहार कॉलोनी के खाली प्लॉटों की भी है, वहीँ दूसरी ओर आज भी इन खाली प्लॉटों पर पड़े कूड़े के पास आवारा पशुओं का जमावड़ा भी रहता है I नालो के ऊपर टूटे स्लैब आज भी हादसों को दावत दे रहे हैं, लेकिन शिकायतों के बाद भी सुनवाई नहीं होती, कई जगह तो छोटे बच्चों की सुरक्षा के कारण स्वयं मकान मालिकों ने अपना धन लगा कर इन नालों के ऊपर स्लैब ढलवाये हैं I नालो की सफाई के दावें भी बस कागजों तक ही सीमित हैं, जहाँ नाला खुला दिखा वहां सफाई की और जहाँ स्लैब दिखा छोड़ दिया, तो क्या नाले में जल निकासी संभव है ?    

अब मेरा एक सवाल इंदिरा नगर शिवालिक एन्क्लेव के कुछ प्लॉटों में हमेशा ही जलभराव बना रहता है, जिसमे मवेशी भी बैठे रहते हैं, इस जलभराव के कारण यहाँ मच्छर, दुर्गन्ध एवं बीमारियों का वास रहता है, स्थानीय निवासियों द्वारा इन प्लॉटों की कई बार शिकायत भी नगर निगम में की गयी, लेकिन जहाँ खाली प्लॉटों में कूड़ा है वहां तो कुछ जगह सफाई हुई थी लेकिन जलभराव वाले सभी प्लॉटों की शिकायत बिना कोई कार्यवाही किये निस्तारित कर दी गयी थी I

अब एक मुख्य बिन्दु कितने खाली प्लॉट मालिक दे रहे गृह कर, और जब खाली प्लॉट मालिक ना ही गृह कर दे रहे और ना ही उनके पते नगर निगम में पंजीकृत हैं तो कैसे नगर निगम वसूलेगा इन कूड़ा बने खाली प्लॉट मालिकों से पेनल्टी, और कैसे बनेगा हमारा प्यारा लखनऊ स्मार्ट सिटी और कैसे सफल होगा प्रधान मंत्री एवं मुख्य मंत्री जी का स्वच्छ भारत अभियान का सपना ?

विजय गुप्ता की एक रिपोर्ट I

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