नगरवासियों पर पालिका ने लगाया मुगलकाल की तरह जजिया जैसा कर

नगरवासियों पर पालिका ने लगाया मुगलकाल की तरह जजिया जैसा कर

नगरवासियों पर पालिका ने लगाया मुगलकाल की तरह जजिया जैसा कर


 प्रत्येक मूल निवासी को देना होगा टैक्स


 घरों के कचरों का भी लिया जायेगा रुपया


गीला सूखा कचरा अलग न करने पर देना होगा अतिरिक्त रुपया

 


ललितपुर

रवि शंकर सेन / अंतिम कुमा जैन

नगर पालिका परिषद ने नगर वासियों को मुगलशासन काल याद दिला दी है। जिस प्रकार मुगल शासन में काल में भारत के मूल निवासियों से कर वसूला जाता था, जिसे जजिया कर कहा जाता था, इसी प्रकार नगर पालिका ने प्रत्येक भवन स्वामी के लिए गृहकर के अलावा कचरा कर निर्धारण कर दिया है।

मजेदार बात तो यह है कि जब शासन के आदेश पर यह प्रस्ताव वोर्ड बैठक में रखा गया तो किसी भी पार्षद ने अपनी आपत्ती दर्ज नहीं करायी, यही कारण है कि सर्वसम्मति से स्वकर की भांति इस कर को लागू करने के लिए पालिका गजट का प्रकाशन कराने जा रही है। पालिका अपने अन्दर फैले भ्रष्टाचार को रोकने के बजाय आम जनता से वसूली की तैयारी कर रही है। 


नगर पालिका ने हाल ही में विगत वेार्ड बैठक का हवाला देते हुये, समाचार पत्रों में एक विज्ञापन प्रकाशित कराया जिसमें सीधे तौर पर आम जनता से वसूली का फरमान जारी किया गया था। पालिका के इस फरमान के बाद किसी भी स्वयं सेवी संगठन ने इसका विरोध नहीं किया। जबकि आम जनता की लड़ाई लडऩे व समाज उत्थान का दमगा लगाये जनपद में दर्जनों की संख्या में नेता मौजूद हैं, लेकिन उन्होंने पालिका इस मनमानी का कोई विरोध नहीं किया है।

पालिका द्वारा प्रत्येक आवासीय भवन से 40 रुपये प्रति माह की वसूली, व्यवसायिक भवन से 250 रुपये, व्यवसायिक कॉम्पलैक्स व होटल से 1000 रुपये, व्यवसायिक फैक्टरी व अद्र्धसरकारी संस्थान से 500 रुपये, व्यवसायिक भवन चिकित्सा क्लीनिक/प्राइवेट नर्सिंग होम से 500 रुपये, विवाह घर व समारोह पर शमन शुल्क 2000 रुपये, प्रतिबन्धित श्रेणी के निस्तारण होने पर 1000 रुपये से 25 हजार तक इसके अलावा सार्वजनिक स्थलों पर किसी संस्था द्वारा कचरा फैलाने पर ढाई लाख रुपये, सडक़ों पर कचरा फैलाने वालों से 1000 रुपये की वसूली निर्धारित किया गया है। सार्वजनिक स्थलों पर शौच करने वालों का 500 रुपये, सार्वजनिक स्थलों पर पेशाब करने पर 100 रुपये,

मलवा सार्वजनिक स्थानों पर रखने पर पचास हजार रुपये, सार्वजनिक स्थलों पर गन्दगी फैलाने पर पाँच हजार रुपये, जल स्रोतों में गन्दगी फैलाने पर पाँच हजार रुपये, थोक कचरा उत्पादकों पर पांच हजार रुपये, चाय नाश्ता गुटखा, पान दुकानदारों द्वारा डस्टबिन न रखने पर पाँच हजार रुपये, घरों से गीला सूखा कचरा अलग-अलग न देने पर पाँच हजार रुपये, किसी व्यक्ति द्वारा गैर अनुज्ञप्ति वाले स्थान पर आयोजन करने पर 5000 रुपये का चालान निर्धारित किया गया है। व्यावसायिक कॉम्पलैक्स पर कचरा कर निर्धारण से आम आदमी से भी सीधा आम आदमी पर प्रभाव पड़ेगा,

चूँकि वर्तमान में नगर में संचालित होने वाले भोजनालयों व होटलों द्वारा वर्तमान स्वच्छता टैक्स के रूप में श्ेाष नहीं लिया जाता है। अब इस कानून के बाद लोगों पर सीधा प्रभाव पड़ेगा। लेकिन इस कड़े कानून के बाद भी नगर के सामाजसेवी व पार्षद चुप्पी साधे हुये हैं। 

 

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