कवि सम्मेलन में सुरेंद्र शर्मा ने बिखेरा हास्य का जलवा

कवि सम्मेलन में सुरेंद्र शर्मा ने बिखेरा हास्य का जलवा

नरेश गुप्ता/ आनंद तिवारी की रिपोर्ट

कवि सम्मेलन में सुरेंद्र शर्मा ने बिखेरा हास्य का जलवा

नैमिषारण्य

नैमिषारण्य  स्थित वेदव्यास धाम  में  चल रहे  88000  श्रीमद् भागवत पारायण  महायज्ञ  के  तथा सत्र  के अंतिम दिन  कवि सम्मेलन  का आयोजन किया गया  । इस कवि सम्मेलन में  हास्य कवि पद्मश्री  सुरेंद्र शर्मा,  गजेंद्र प्रियांशु,  सीता सागर  और अनिल बौझड़  जैसे प्रसिद्ध कवि शामिल हुए । कार्यक्रम का प्रारंभ  व्यासपीठ आदेश अनिल कुमार शास्त्री के द्वारा  किया गया । इस अवसर पर व्यासप्रतिनिधि रंजीत शास्त्री, रामकिशोर दीक्षित, कपिल शास्त्री, धर्मेंद्र श्रीवास्तव एवं मुख्य यजमान राजेन्द्र गुप्ता ने आमंत्रित कवियों का धन्यवाद ज्ञापित किया ।

उन्होंने  सभी कवियों को  अंग वस्त्र ओढ़ाकर सम्मानित किया । सबसे पहले  सीता सागर ने   सरस्वती वंदना को अपने शब्दों में  वाणी से  गाकर कार्यक्रम का शुभारंभ किया  फिर इसके बाद  अनिल बौझड़  अवधी भाषा में अपनी प्रसिद्ध कविता मुह नचवा  से लोगों को खूब गुदगुदाया  इसके बाद  गीतकार  गजेंद्र प्रियांशु ने  सिया तेरा अभिशापित है राम सुनाकर लोगों को  कविता की ओर खींचा  इसके अलावा उन्होंने अपने प्रसिद्ध छंदों को भी गाया जैसे अपनी पर आ गए तो आंख ना मिला सकोगे ।

अंत में  हास्य कवि  पद्मश्री  सुरेंद्र शर्मा ने  कविता पाठ शुरू किया  और  छोटी-छोटी  फुल चूड़ियों से  समा बांध दिया ।  हास्य कवि सुरेंद्र शर्मा ने बताया कि एक बार मैंने बाबा रामदेव से पूछा, ‘बाबा, अगर योग से रोग दूर होता है तो तू दवाई क्यों बना रहा है?’ इस पर काफी देर तक पूरा हाल ठहाकों से गूंजता रहा। इसके बाद उन्होंने कहा कि एक बार मैंने अन्ना हजारे जी से पूछा, ‘भ्रष्टाचार के खिलाफ नारे और झंडे तो अक्सर उठाते हैं, लेकिन जब मुंबई में बाहरी लोग मारे जा रहे थे तो झंडा क्यों नहीं उठाया? अगर महाराष्ट्र में मराठी, गुजरात में गुजराती ही रहेंगे तो भारतीय कहां रहेंगे

Comments