पूछा जो नशे से तू कहां तक जाएगा....,

पूछा जो नशे से तू कहां तक जाएगा....,

चिट्टा...........

पूछा जो नशे से तू कहां तक जाएगा....,
बोला रगों में उतरकर ज़बां तक जाएगा।।

दहकेगी हर मां की कोख किसी कोने में,
धुआं शब ए रोज़ यहां आसमां तक जाएगा ।।

ज़मीं कांप रही है इस नए माहुर से यकीनन,
ये सरहदों से गुजरकर हर मकां तक जाएगा ।।

एहतियात बरते नहीं जो अभी भी हमने,
ये शहर ओ शहर हर इंसा तक जाएगा ।।

आबरू कैसे बचेगी यहां बेटियों की ए सतीश,
न जाने नस्ल दर नस्ल किस करवां तक जाएगा।।

- सतीश शर्मा
 

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