राष्ट्रीय सुरक्षा, विकास व नेतृत्व सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा अमित शाह

 राष्ट्रीय सुरक्षा, विकास व नेतृत्व सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा अमित शाह
कांग्रेस गरीबी बनाकर रखना चाहती है ताकि उसकी राजनीति चलती रहे। आज फिर से वादा कर रहे हैं तो कौन मानेगा।उनका कार्यकाल भ्रष्टाचार के लिए जाना जाता है। यह किसी को बताने की जरूरत नहीं। दो दौर के मतदान में लगभग पौने दो सौ यानी लगभग एक तिहाई लोकसभा सीटों का भविष्य ईवीएम में कैद हो गया है।

 

बाकी सीटों के लिए विभिन्न दलों की मशक्कत और तेज हो गई है। ऐसे में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह शाम करीब पांच बजे अहमदाबाद पहुंचते हैं और सीधे कार्यकर्ताओं के साथ मीटिंग के लिए रवाना हो जाते हैं। वह गांधीनगर से खुद भाजपा के उम्मीदवार भी है। लिहाजा अपनी सीट के साथ साथ पूरे गुजरात का फीडबैक लेते हैं। 

 

रणनीति समझाते हैं और जिम्मेदारी तय करते हैं कि पिछली बार की तरह ही इस बार भी उन्हें राज्य की सभी 26 सीटें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की झोली में डालनी है। बैठकों के दौर और मिलने वालों की कतार से जब फुरसत मिलती है तो रात के 12 बज चुके हैं और उन्हें उसी वक्त कर्नाटक के हुबली के लिए प्रस्थान करना है क्योंकि दूसरे दिन सुबह से ही कर्नाटक में चार रैलियां हैं। साढ़े बारह बजे रात वह अहमदाबाद एयरपोर्ट पर इंतजार कर रहे हवाई जहाज में प्रवेश करते हैं और बैठते ही कुछ जरूरी फाइल व रिपोर्ट पर नजर डालते हैं।

 

फिर शुरू होती है ष्दैनिक जागरणष्के वरिष्ठ कार्यकारी संपादक प्रशांत मिश्र और राष्ट्रीय ब्यूरो प्रमुख आशुतोष झा से उनकी बात। अपने बेलाग और स्पष्ट तेवर के साथ वह कहते हैं. राष्ट्रवाद शुरू से हमारा एजेंडा रहा है और राष्ट्रीय सुरक्षाए विकास व नेतृत्व सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा। विपक्ष के पास खुद को बचाने की अपील के अलावा कोई मुद्दा नहीं है। जनता जो मुद्दे तलाशती हैए जैसा नेतृत्व चाहती है वह हमारे पास है।

 

. विगत पांच वर्षों में देश की राजनीति में बहुत अंतर आया है। एक समय था जब एक दल के नेता दूसरे का हाथ थामते थे तो वह एक दूसरे का वोट ट्रांसफर करा लेते थे। आज वोटर किसी नेता के कहने पर वोट नहीं देता है। आज मतदाता अपने मुद्दे तय करता है और उसके आधार पर वोट डालता है। ऐसे में अगर ड्राइंग रूम में दो नेताओं का मिलन होता है तो चुनाव पर उसका असर नहीं दिखता है। यह चुनाव भी मुद्दा आधारित है। जहां मतदाता यह देख रहा है कि उसका भला कहां हैए यह नहीं देखता है कि फलां नेता व दल का भला किसमें हैं। यह किसे नहीं पता कि जिन दलों का तथाकथित मिलन हुआ है वह किसकी भलाई के लिए हो रहा है। जो खुद अपने अस्तित्व के लिए लड़ रहा है वह जनता का क्या भला करेगा।

 

इसीलिए मैं कहता हूं कि अगर आप उत्तर प्रदेश की भी बात कर रहे हैं तो वहां गठबंधन के पास ऐसा कुछ नहीं है जो जनता को आकर्षित करे। उनके पास मुद्दा है खुद को बचाने का। इसमें ऐसी कोई केमिस्ट्री नहीं है जिसमें जनता की बात हो।
Support to Swatantra Prabhat Media

T & C Privacy

Comments