सोशल मीडिया और पोर्टल न्यूज़ के नाम पर कई राज्यों और जिलों में हुआ धोखाधड़ी

सोशल मीडिया और पोर्टल न्यूज़ के नाम पर कई राज्यों और जिलों में हुआ धोखाधड़ी

हरियाणा- करनाल

सोशल मीडिया और पोर्टल न्यूज़ के नाम पर कई राज्यों और जिलों में हुआ धोखाधड़ी

सोशल मीडिया और पोर्टल न्यूज़ के नाम पर समाज में हो रहा है करोड़ों रुपए की उगाही. पत्रकारिता के पैमाने को किया जा रहा है बदनाम, समाज का चौथा स्तंभ अपराधियों, जालसाज और धोखेबाजो के चक्कर में टूटता बिखरता नजर आ रहा है. अलग-अलग प्रदेशों और जिलों में पत्रकार बनने और '' आवश्यकता है '' जैसे पोस्टों को फेसबुक और व्हाट्सएप ग्रुप में वायरल कर युवाओं को गुमराह कर किया जा रहा है भारी मात्रा में उगाही. 

यह हम नहीं कह रहे हैं बल्कि कई पोस्ट फेसबुक पर वायरल होने पर इसकी सच्चाई जानने की कोशिश की गई तो बहुत सनसनीखेज खुलासे हुए. जिसमें ग्रामीण और शहरी सभी क्षेत्रों में सबसे पहले नवयुवकों की बात निकलकर आई, जो रोजगार और कई तो पत्रकार बनने की ख्वाहिश लिए इन उगाही करने वाले सोशल मीडिया के जालसाजी के चक्कर में फंसे और अपने अपने घरों से एक एक युवक कई हजार तक इनके खाते में ट्रांसफर कर, शिकार हुए और माइक आईडी लेटर का इंतजार आज भी कर रहे हैं.

कई सोशल  और पोर्टल मीडिया के नाम पर दलाली करने वाले दलाल तो पहले कोई अलग कंपनी बनाकर उगाही किए, बाद में अच्छी खासी दलाली और धोखाधड़ी करने के बाद दूसरी कंपनी बनाकर समाज में पुनः धोखाधड़ी में लिप्त हो गए. सूत्रों से प्राप्त जानकारी को आगे रखे तो पता चलता है कि अपराधियों के अपराध को छुपाने का सबसे आसान तरीका है.

जिसकी वजह से पुलिस भी कार्रवाई करने से पहले 10 बार सोचती है अधिकारियों के जानकारी में सब कुछ होने पर भी कार्रवाई के नाम पर नील बट्टा सन्नाटा ही मिलेगा. वहीं सूत्र यह भी कहते हैं कि 90 के दशक में अपराध छुपाने का एकमात्र तरीका राजनीति रह गया था जो स्थान परिवर्तन कर वह जगह मीडिया और सोशल मीडिया ने ले लिया है.


एक तरफ युवा 12वीं और स्नातक कर घर से जब रोजगार की तलाश में बाहर निकलते हैं या सोशल साइटों को चेक करते हैं तो वहां "आवश्यकता है" करके कई पोस्ट उनका मानो पहले से इंतजार कर रही होती है और ऐसे में युवाओं का इन दलालों के चुपड़ी चुपड़ी बातों में आना भी लाजमी है. जिसके एवज में वह घर के लाखो हजारों बड़े आसानी से उनके जिम्मे कर देते हैं बाद में जब हकीकत सामने निकल कर आती है तो युवाओं के मानो पैरों तले जमीन ही खिसक जाता है.

वायरल पोस्ट आईबीए न्यूज़ उर्फ नवतेज टी

इसी कड़ी में एक वायरल पोस्ट जो सोशल मीडिया पर तुल पकड़े हुए हैं जिसमें जिक्र आईबीए न्यूज़ और नवतेज टीवी के नाम पर है जो काफी फेसबुक और व्हाट्सएप पर पोस्टें शेयर हो रही हैं. जिसमें हेडिंग पर लिखा है'' शेयर करें धोखेबाज मीडिया.. सावधान सावधान " जिसमें जिक्र है

आईबीए न्यूज़ के नाम पर संपूर्ण भारत में लोगों का रोहित तिवारी और अनुराग पांडे पैसा खा चुके हैं जब पड़ताल हुई तो इसका नेटवर्क उत्तर प्रदेश में भी चल रहा था. इससे पहले स्वतंत्र प्रभात मीडिया ने आपराधिक इतिहास वाले दबंगों का जिक्र किया था अपनी खबरों के माध्यम से, जिसमें शायद वह शख्स अमित त्रिवेदी उर्फ विष्णु दत्त इसी पोर्टल मीडिया का हिस्सा है

जो यूपी में इसका नेटवर्क फैलाने के लिए काम कर रहा है. जिसका शायद वैशाली नगर जयपुर में कहीं ऑफिस बनाकर लोगों से धोखाधड़ी और उगाही की जा रही है. फिर उसी वायरल पोस्ट में यह भी लिखा है फ्रॉड करने वाले आईबीए न्यूज़ के लोग नवतेज टीवी खोल रखे हैं जिनके एजेंट पूरे भारत में सक्रिय हैं. हिदायत के तौर पर इस पोस्ट में यह भी लिखा है इनके बंदो की बातों में ना आए अपना पैसा और समय ना गवाएं ना जाने कितने मासूम लोगों की जिंदगी मीडिया के नाम पर यह लोग खराब कर चुके हैं.

कई ने तो यह भी लिखा है इनसे अपने पैसे वापस मांगने पर ऑफिस के दरवाजों पर बाउंसरो को लगा रखे हैं. इतना ही नहीं कई लोगों के बैंकों के जमा करवाई रकम की पर्चियां भी संलग्न की गई है कुछ स्क्रीनशॉट मैसेज लगे हैं जिस में भी बहुत कुछ लिखा हुआ है जो यह साबित करने के लिए काफी भी है कि इस कंपनी ने फ्रॉड बड़े लेवल पर किया होगा.

 वायरल खबर की पुष्टि नहीं करता स्वतंत्र प्रभात मीडिया

इस वायरल खबर की पुष्टि स्वतंत्र प्रभात मीडिया नहीं करता है लेकिन समाज में जागरूकता को ध्यान में रखते हुए खबर प्रकाशित करना जिम्मेदारी थी जिसकी वजह से इस खबर को प्रकाशित किया जा रहा है.

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