जन्माष्टमी को लेकर नगर में सजने लगे लड्डू गोपाल के मन्दिर 

जन्माष्टमी को लेकर नगर में सजने लगे लड्डू गोपाल के मन्दिर 

उरई (जालौन) 

सावन के बाद से ही भारत में हिन्दू त्यौहारों का आगमन हो जाता है जिसकी शुरुवात भाई बहनों के पवित्र त्यौहार रक्षाबन्धन हो जाती है जिसके बाद त्यौहारों के इस दौर में हमारे कृष्ण कन्हैया का विशेष त्यौहार कृष्ण जन्माष्टमी आ जाती है

जिसमे पूरा भारत कृष्ण भक्ति में सराबोर हो जाता है और बस यही राग जाता है कि नंद के घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की। कान्हा के जन्मदिन पर लोगो ने धूमधाम से मनाई जन्माष्टमी और मंदिरो में भी अच्छी खासी रौनक देखने को मिलीं। राधाकृष्ण, बल्दाऊ मंदिर से लेकर अन्य मंदिरो में कई दिनो से की जा रहीं थी तैयारियाँ। जिनमें भिन्न भिन्न तरह की झांकियां सजाई गई। वहीं पुलिस द्वारा सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी रखीं गई। दो दिन की जन्माष्टमी पडऩे से कई लोग आज और कल अलग-अलग तरीको से इस पर्व को मना रहें है।

अष्टमी और रोहणी नक्षत्र को लेकर कई ज्योतिषाचार्य एवं विद्वानो के अलग-अलग कथन है। वहीं मथुरा और वृंदावन में भी अलग-अलग दिन जन्माष्टमी मनाई जा रहीं है। यह हिंदुओ का एक बड़ा पर्व माना जाता है और जिसमें लोग सुबह से हीं व्रत रखकर भगवान श्रीकृष्ण के जन्मदिन की तैयारियों में लगे रहते है। खासतौर से आज खीरा और नीबू का विशेष महत्व होता है और प्रसाद के लिए चंदामृत, धनिया व पंजीरी का विशेष महत्व माना गया है। भव्य झांकिया सजाई जाती है और भजन गाए जाते है। लगभग पूरी रात इस त्योहार का सभी कृष्णभक्त आनंद लेते है।

वेद-पुराणों, शास्त्रों के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण द्वापर युग में जन्में थे। पौराणिक कथाओं अनुसार द्वापर युग में मथुरा में कंस नाम का राजा था जिसकी चचेरी बहन देवकी थी। वह उसे बेहद स्नेह करता था। लेकिन जब उसकी बहन का विवाह हुआ और उसे भविष्यवाणी के जरिए इस बात की जानकारी मिली कि उसका वध देवकी के आंठवे पुत्र के द्वारा होगा। तो यह सुनकर कंस क्रोधित हो गया और उसने अपनी बहन को मारने के लिए तलवार उठा ली। देवकी को बचाने के लिए उनके पति वासुदेव ने कंस को अपनी सभी आठ संतानों को सौपने का वचन दे दिया। वासुदेव द्वारा आश्वाशन मिलने पर कंस ने दोनों को कारगार में डाल दिया।

और एक के बाद एक उनकी सारी संतानों का वध करता गया। जब भगवान कृष्ण का जन्म हुआ तो कंस के सारे मंसूबों पर पानी फिर गया। भगवान कृष्ण के जन्म के समय एक से एक चमत्कार हुए। कारगार के दरवाजे खुद ब खुद खुल गए। जिससे वासुदेव अपने पुत्र कृष्ण को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने में सक्षम हो पाए। और कृष्ण की जगह एक दिव्य कन्या को लाकर कंस को सौंप दिया। जब कंस ने मायारूपी कन्या का अंत करना चाहा तो वह आसमान में पहुंचकर बोली कि रे मुर्ख तेरा काल वंदावन पहुंच चुका है जो जल्द ही तेरा अंत करेगा।

यह सुनकर कंस तिलमिलाया और उसने कृष्ण को मारने के लिए कई राक्षस भेजे। लेकिन वे सबके सब असफल रहे। भगवान कृष्ण का जन्म आधी रात को हुआ था। जिस कारण लोग जन्माष्टमी के दिन पूजा रात 12 बजे करते हैं। लोगों को कृष्ण के जन्म के समय का बेसब्री से इंतजार रहता है। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के दिन लोग व्रत और पूजापाठ करते हैं। माना जाता है कि इस दिन श्रीकृष्ण की पूजा करने से संतान प्राप्ति, दीर्घायु और सुख-समृद्धि की भी प्राप्ति होती है। 

 

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