पाकिस्तान में महामारी की तरह फ़ैल रहा है एड्स.. परिवार व रिश्तेदारी में ही शारीरिक संबंध बनाने के चलते मुश्किल हो रहा रोकना

पाकिस्तान में महामारी की तरह फ़ैल रहा है एड्स.. परिवार व रिश्तेदारी में ही शारीरिक संबंध बनाने के चलते मुश्किल हो रहा रोकना

आर्थिक मोर्चे पर पहले तबाह हो चुके इमरान खान के आतंकी मुल्क पाकिस्तान के लिए एक नई मुसीबत पैदा हो गई है.

आतंकवाद पर अपने दोहरे रवैये के कारण जहाँ आतंकी मुल्क पाकिस्तान पूरी दुनिया में अलग थलग पड़ चुका है तो वहीं कर्ज में डूबे पाकिस्तान में बेतहाशा बढ़ती हुई महंगाई कारण जनता में हाहाकार मचा हुआ है.

इन सभी समस्याओं से जूझता पाकिस्तान एक और बड़ी मुसीबत में फंस गया है तथा ये मुसीबत पाकिस्तान के लिए दुनिया में शर्मिंदगी का सबब बन रही है. खबर के मुताबिक़, पाकिस्तान में HIV पॉजिटिव मरीजों की तादात में लगातार बढ़ोतरी हो रही है. परिवार व रिश्तेदारी में ही शारीरिक संबंध बनाने के चलते इसको रोकना मुश्किल हो रहा है. पाकिस्तान स्वास्थ्य एजेंसियां एचआईवी पॉजिटिव मरीजों की बढ़ती संख्या से परेशान हैं.

मीडिया सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक़, पाकिस्तान में एचआईवी एड्स पीड़ितों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है. सिंध प्रांत में एचआईवी पॉजिटिव मरीजों की संख्या बेकाबू सी हो गई है. पाकिस्तान के स्वास्थ एजेंसियों के आंकड़ों के मुताबिक सिंध प्रांत के लरकाना और रातोदेरो शहरों में 700 एचआईवी पॉजिटिव मरीज पाए गए हैं, जिसमें 576 बच्चे ही हैं. पाकिस्तान में एचआईवी एड्स पीड़ितों की संख्या बढ़ता देख WHO, UNICEF और UNAIDS जैसे स्वास्थ्य एजेंसियां हैरान है.

इन वैश्विक संस्थाओं ने हालात पर काबू पाने के लिए अपने प्रतिनिधियों को पाकिस्तान भेजा है. ये एजेंसियां इस रोग के मूल वजह पता लगानें में जुट गई है. विश्व स्वास्थ्य संगठन के 12 एक्सपर्ट की एक टीम कराची पहुंच चुकी है. डब्ल्यूएचओ के अधिकारियों के मुताबिक पाकिस्तान के सिर्फ एक इलाके में 700 से ज्यादा एड्स रोगियों के आंकड़ें से वो परेशान है. ये आंकड़ा दुनिया भर के एचआईवी एक्सपर्ट के लिए बेहद चिंता का विषय है.

WHO की चेतावनी
विश्व स्वास्थ संगठन यानी WHO ने हाल ही में जारी की गई रिपोर्ट में 5 साल से कम उम्र के बच्चों का स्क्रीन टाइम निर्धारित कर दिया है. अब तक लोगों का सिर्फ ये मानना था कि स्क्रीन के सामने ज्यादा समय बिताने से आंखें खराब होती हैं लेकन, डब्ल्यूएचओ की इस रिपोर्ट के मुताबिक, इसके परिणाम ज्यादा खतरनाक हैं. 5 साल से कम उम्र के बच्चों का निर्धारित समय से ज्यादा स्क्रीन टाइम उनके शारिरिक और मानसिक विकास पर सीधा असर डालता है. इस रिपोर्ट के जरिए WHO ने माता-पिता या अभिभावक को बच्चों को मोबाइल फोन, टीवी स्क्रीन, लैपटॉप और अन्य इलैक्ट्रोनिक उपकरणों से दूर रखने की हिदायत दी है.

WHO की गाइडलाइन-
1 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए :एक साल से कम उम्र के बच्चों के लिए जीरो स्क्रीन टाइम निर्धारित किया गया है. यानी उन्हें बिलकुल भी स्क्रीन के सामने नहीं रखना है. इसके अलावा उन्हें दिन में आधा घण्टे पेट के बल लिटाना चाहिए. फर्श पर तरह-तरह के खेल खिलाना भी बच्चे के शारिरिक विकास के लिए बेहतर है. 

1 से 2 साल के बच्चों के लिए : इस उम्र के बच्चों के लिए दिनभर में स्क्रीन टाइम 1 घण्टे से ज्यादा नहीं होना चाहिए. इसके साथ ही 3 घण्टे फिजिकल एक्टिविटी करने की सलाह दी गई है. इस उम्र में बच्चों को कहानी सुनाना उनके मानसिक विकास के लिए फाएदेमंद साबित होगा

3 से 4 साल तक के बच्चों के लिए :3 से 4 साल की उम्र के बच्चों के लिए भी दिनभर में ज्यादा से ज्यादा समय 1 घण्टा निर्घारित किया गया है. लेकिन इनको 2 से 3 साल के बच्चों के मुकाबले ज्यादा फिजिकल एक्टिविटीस करने की सलाह दी गई है.

डॉक्टर भी सही मानते हैं WHO की गाइडलाइंस


मैक्स अस्पताल के मेन्टल हेल्थ एंड बिहेविरल सांइस डिपार्टमेंट के डायरेक्टर डॉ समीर मल्होत्रा बताते हैं कि बच्चों के मानसिक और शारिरिक विकास के लिए बातचीत बहुत जरुरी है.

5 साल से कम उम्र के बच्चों कॉगनिटिव स्किल विकसित नहीं हो पाती है. इसका मतलब ये है कि बच्चे सही और गलत में फर्क नहीं कर सकते. वे जो देखते हैं वही सीखते हैं. कई बार देखा गया है कि बच्चे कार्टून की तरह ही बोलने की कोशिश करते हैं. कई पेरेंट्स ये शिकायत लेकर भी आते हैं कि बच्चे बहुत ज्यादा एग्रेसिव हो रहे हैं.

अकसर पेरेंट्स बच्चों को खाना खिलाने के लिए भी टीवी के सामने बैठा देते हैं या फिर फोन में कुछ न कुछ लगा कर दे देते हैं. ये बहुत ही गलत प्रेक्टिस है. ऐसे में बच्चों का ध्यान बट जाता है और वे भूख से ज्यादा खाना खा लेते हैं. इस उम्र में बच्चों की इमेजिनेशन तेज होती है. इसलिए पहले लोग बच्चों को कहानियां सुनाया करते थे. लेकिन अब पेरेंट्स कहानियां सुनाने की बजाय बच्चों को फोन पकड़ा देते हैं.

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