कागजों पर हो रहा पोषाहार वितरण, पंजीरी फांक रही भैस

कागजों पर हो रहा पोषाहार वितरण, पंजीरी फांक रही भैस


विभागीय अधिकारियों के मिली भगत से कार्यकत्रियों का फलफूल रहा धंधा

 

हैदरगढ़ बाराबंकी।

सरकार भले ही प्रदेश की जनता के हित मे नये नये कानून बनाकर अधिकारियों की खाऊ कमाऊ नीति व भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने की बात कर रही हो लेकिन वेखौफ भ्रष्टाचारियों पर ऐसे कानून कोई मायने नही रखता,

हालात जस के तस बरकरार है योगी सरकार के सख्त निर्देशो के बावजूद भी बाल विकास परियोजना सुधरने का नाम नही ले रहा आंगनवाड़ियो की खस्ताहाल व्यवस्था अब बेलगाम हो गयी है हालात यह है कि ब्लाक के अधिकांश केन्द्र नियमित संचालित ही नही हो रहे

इन केन्द्रों का संचालन सिर्फ कागजों पर दिखा कर सामग्री का बंदर कर लिया जाता है। कार्यकत्री और अधिकारियो की मिली भगत से गर्भवती महिलाएं व नन्हे मुन्हे बच्चे सरकार द्वार भेजी जा रही पोषाहार व अन्य सामाग्री पाने से कोसो दूर है।

यदि इसका उदाहरण देखना है तो ब्लाक हैदरगढ़ के भभूतिगढ़ी मजरे मंगौव्वा मे देख सकते है। आंगनवाड़ी का यह हाल मात्र उदाहरण है यह हाल यही का नही बल्कि ब्लाक के अधिकतर गांवो में भी इसकी जड़े फैली हुयी है और धंधा फलफूल रहा है।

जानकारी के अनुसार ब्लाक के मंगौव्वा गांव के दर्जनो ग्रामीणो ने आरोप लगाते हुये बताया कि हमारे गांव में आंगनबाड़ी केन्द्र कभी नही खुलता और कार्यकत्री कब आयी और कब चली गई किसी को कुछ नही पता।

हद तो तब हो जाती है जब एक मासूम बच्चे ने दबी जुबां से बताया कि सरकारी पोषाहार हमारे यहां की भैसे खाती है और अच्छा दूध देती है। बच्चे की बातो से साफ जाहिर होता है कि कार्यकत्री किस तरह से पोषाहार की कालाबाजारी कर मासूमो के हक पर डाका डाल रही है एक ग्रामीण दबी जुबां से बताया की इसकी शिकायत करे तो करे

कहां क्योंकि साहब भी इस ओर ध्यान नही देते इतने बड़े घोटाले के बावजूद कोई अधिकारी जांच करने आज तक इस सेण्टर पर नही आया। गांव के जगतपाल, मैकू, बुधई, भानू प्रसाद, रामपाल, राजेष, महेश, रामकुमार, सीतापति, सजीवन, भरोसे सहित दर्जनो ग्रामीणों ने सरकार से नियमित आंगनवाडी केन्द्र खुलवाने की मांग किया है।

जब इसकी जानकारी सीडीपीओ डा0 हसन जैदी से किया गया तो उनका कहना था कि उक्त प्रकरण मेरे संज्ञान मे नही है यदि मामला सही पाया जाता है तो जांचकर कार्यवाही की जायेगी।     
 

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