सिंचाई विभाग की लापरवाही किसानों  के उड़े होश

सिंचाई विभाग की लापरवाही किसानों  के उड़े होश

• बीच बीच में छोड़कर माइनर की कर दी गई सफाई

(स्वतंत्र प्रभात)

परतावल/महराजगंज: शासन के निर्देश पर इलाके की नहरों की सफाई की जा रही है।लेकिन ठेकेदारों की मनमानी से बीच बीच मे छोड़कर सफाई हो रही है।इससे टेल तक पानी पहुँचने में दिक्कत होगी।लखिमा माइनर को सिचाई विभाग के द्वारा  सिल्ट की सफाई का काम करीब  पखवाड़े से चल रहा था।

परन्तु अब बन्द हो गया है।और जहाँ सफाई कि गई है।वहाँ ठीक से सिल्ट हटाई नही गई ।बीच मे सिल्ट  छोड़ने जाने से नहर में पानी आने पर वही दिक्कत होगी।टेल तक पानी नही पूछेगा  जिसके वजह से किसानों की गेहूं की फसल में पानी नहीं चल पाएगा किसान एक तरफ पराली की समस्या से जूझ रहा था

किसी तरीके से  खेती का बुवाई किया वहीं दूसरी तरफ आधी अधूरी नहरों की सफाई से किसानो का चिंता बढ़ गई  और किसानों में आक्रोश व्याप्त है। उल्लेखनीय है कि सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग उत्तर प्रदेश सिंचाई खण्ड गोरखपुर- जनपद महराजगंज ब्लाक- परतावल लखिमा माइनर की कुल लंबाई 6.270 कि०मी० माइनर की सफाई होना सुनिश्चित था।

परन्तु विभाग और ठेकेदार के लापरवाही से नहरों की सफाई पूरी नही हुई। इस सम्बंध में सिचाई विभाग के स०अ० उग्रसेन तिवारी ने  स्वतंत्र प्रभात प्रतिनिधि अरविंद यादव से बताया कि माइनर की सफाई निर्धारित लक्ष्य 10 दिसंबर तक होना सुनिश्चित था लेकिन ठेकेदार की लापरवाही के कारण अब तक चार माइनर की सफाई आधी अधूरी रह गई है।

जिससे मैं आज ही नोटिस जारी करूंगा उन्होंने यह भी कहा कि लखिमा माइनर सफाई के लिए 1.37लाख विभाग के द्वारा बजट दिया गया है। जिसका सिंचाई विभाग के द्वारा बोर्ड लखिमा माइनर पर लगवा दिया गया है। स्मरण रहे कि एक तरफ नहरों के पानी छूटने का समय करीब आ गया है और किसानों की फसल पानी चलाने के लिए तैयार हो गई है किसान पानी को लेकर चिंतित हैं वही ठेकेदार की लापरवाही के वजह से लखिमा,सोहसा,बैलों,

सोहवल माइनर की सफाई पूर्ण नही हुई। बताते चलें कि विभागीय अधिकारियों ने अधूरी माइनर कि सफाई  ठेकेदार की लापरवाही बताया परन्तु लापरवाही किसानों के लिए मुसीबत  बन गया किसान अपनी फसल को लेकर प्रकृति पर निर्भर होकर उम्मीद का आस लगाया है।क्योंकि एक तरफ सरकार की नीति किसान विरोधी वहीं दूसरी तरफ ठेकेदार और विभाग की लापरवाही किसानों के लिए मुसीबत बनी हुई है।

 

 

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