पत्रकार पर हुए जानलेवा हमले के 3 साल होने के बाद भी सो रही कानपुर पुलिस ऐसे होगा कानून का राज?

पुलिस की शह पर भू माफियाओं और अपराधियों से भरा कानपुर, पत्रकार को न्याय दिलाने की जगह हाथ पर हाथ धरे बैठी है कानपुर पुलिस

पुलिस की शह पर भू माफियाओं और अपराधियों से भरा कानपुर, पत्रकार को न्याय दिलाने की जगह हाथ पर हाथ धरे बैठी है कानपुर पुलिस

3 साल बाद भी नहीं मिला पत्रकार को न्याय

कानपुर (चंदीपुरवा नौबस्ता)

 उत्तर प्रदेश

 चार साल बीतने के बाद भी कानपुर पुलिस और अपराधियों का सांठगांठ मानो चोली दामन का साथ हो. किसानों की सूचना पर गए हुए पत्रकार को भू माफियाओं और पुलिस के कुछ दरोगा और सिपाहियों ने इतनी बेरहमी के साथ मारा पीटा व कैमरा और मोबाइल तक छीन लिया. आज तक बेखौफ अपराधी पुलिस की शह पर कानपुर की गलियों में दूसरे अपराधों को अंजाम देते नजर आ जाएंगे

लेकिन कानपुर पुलिस, अपराधियों और भू माफियाओं की जी हजूरी करने से पीछे नहीं हटती, तभी तो एक पत्रकार की सुनवाई आज 4 साल बीतने के बाद भी नहीं हो पाई. खून से लथपथ पत्रकार इंस्पेक्टर से लेकर एसीएम और एसपी तक को गुहार लगा चुका था लेकिन अपराधियों और भू माफियाओं के आगे पत्रकार की आखिर कौन सुनता. लाखों लाख के चढ़ावे में पुलिस अपनी अपराधी और भू माफियाओं के साथ ईमान बेचने से पीछे नहीं हटती. 

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आखिर क्या था मामला जो पत्रकार को पुलिस नहीं दिला सकी न्याय 

मामला है नवंबर 2015 का है जहां राजीव शुक्ल अलीगंज लखनऊ का रहने वाला है l पीड़ित पत्रकार एक अख़बार स्वतंत्र प्रभात और न्यूज़ पोर्टल www.swatantraprabhat.com में एडिटर के पद पर काम करता है l

चंदीपुरवा नौबस्ता से किसानो के द्वारा प्रमुख रूप से मौजी लाल और अन्य से जानकारी मिली थी कि हंसपुरम नौबस्ता में दलितों कि जमीनों पर कुछ लोग दबाव बनाकर जमीन पर कब्ज़ा कर रहे है और अबैध कब्ज़ा करके घर बना रहे है और फिर उन्हें ऊँचे दाम पर बेचते है l  सम्बंधित मामले कि कवरेज पर पीड़ित पत्रकार भी अपने संवाददाता के कहने पर पहुंचकर करने लगा कवरेज l इससे पहले भी  समय समय पर अख़बार में प्रकाशित भी होती थी पीड़ित पत्रकार खुद भी ग्राउंड ज़ीरो पर  जाकर पूरी जानकारी लेता रहता था l 

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इस प्रकरण में कानपुर मौके पर पीड़ित पत्रकार पहुंचा तो, देखा वहां अबैध तरीके से  निर्माण हो रहा था और जमीन कि रजिस्ट्री न होने के बाद भी निर्माण करने के मामले में वहां के स्थानीय निवासी और जमीन के मालिक मौजीलाल और अन्य से जानकारी लेने गया. मौजीलाल ने बताया कि ये जमीन उनकी है,लेकिन अपराधी छवि के भू माफिया सूरजपाल सिंह और गौरव सिंह भदौरिया व उनके सहयोगी उन्हें बार बार धमकी देते रहते है l 

नवंबर २०१५ को पूरे मामले को और समझने के लिए मौके पर गया पत्रकार जब मौजीलाल से बातचीत कर रहा था तब मोजीलाल ने बताया कि निर्माण किये जा रहे जमीन उनकी है और सूरजपाल उसपर अवैध निर्माण कर रहे है ,जब भू माफिया सूरजपाल से इस मामले कि जानकारी लेनी चाही तो वो भड़क गया और बोला कि मैं आवास विकास का ठीकेदार हूँ और मुझे पता है कहाँ बनाना है और कहाँ नहीं बनाना है l मैंने फोटो लिया और किसी और से कुछ बात कर रहा था

तभी सूरजपाल और गौरव सिंह भदौरिया पत्रकार के पास आकर उस पर अनैतिक रूप से दबाव बनाने  और बताया कि वो जमुना प्रशाद जो कि आवास विकास के अधिशासी सभियन्ता थे उनके साथ  मिलकर ये काम कर रहा है पीड़ित पत्रकार को गाली गलौज  देते हुए बात करने लगा जिसका बिरोध किया कि आप ऐसे बात नहीं कर सकते तो भू माफिया गौरव सिंह भदौरिया ने पीड़ित पत्रकार को धक्का देने लगा और  पकड़कर दीवार से सटा दिया और मारने लगा और उनके साथ और भी अपराधिक किस्म के लोगों ने भी धक्का मुक्की कि पत्रकार समझ नहीं पाया. किसी तरह वहाँ से बहार निकलकर 100  नंबर पर फोन किया और पुरे मामले को अवगत कराया पुलिस को आने में देरी होने कि वजह से पत्रकार नौबस्ता थाने में तहरीर देने गया लेकिन वहाँ पर पत्रकार की बात को गंभीरता से नहीं लिया गया और सामान्य घटना बताकर मामले को टाला जा रहा था l

 फिर पीड़ित पत्रकार एक प्रार्थना पत्र लिखकर थानाध्यक्ष महोदय को दे दिया और लगातार उनके संपर्क में रहा लेकिन कई महीने बीत जाने के बाद भी किसी तरह कि कोई कार्यवाही नहीं हुई l इस घटना के बाद  डर भी लगा रहता था कि दुबारा ऐसी घटना न हो जाये फिर भी लगभग एक साल तक किसी तरह कि कोई कार्यवाही नहीं हुई lठीक एक साल बाद अक्टूबर 2016 पत्रकार को जानकारी मिली कि चंदीपुरवा ,नौबस्ता में  कोर्ट के आदेश पर एक अतिक्रमण को हटाया जा रहा था

तो कवरेज हेतु पत्रकार मौके पर पंहुचा तो देखा वहाँ पर पुलिस भरी संख्या में तैनात थी और PAC के लोग भी मौजूद थे और उसकी कवरेज करने लगा तो मौके पर सूरजपाल सिंह ,गौरव सिंह भदौरिया भी वहाँ मौके पर मौजूद थे पीड़ित पत्रकार को थोड़ा अजीब तो लगा लेकिन पूरे मामले कि रिकॉर्डिंग और फोटो लेने लगा l चंदीपुरवा से कुछ लोगों को आपत्ति भी थी इस मामले में क्योकि उसी जगह पर वीरांगना उदा देवी कि प्रतिमा भी हटाई जा रही थी l पत्रकार से बार बार ये पूछ जा रहा था आप क्या कर रहे हो और पत्रकार बार बार बताता था कि मैं अख़बार से हूँ और खबर कि कवरेज कर रहा हूँ. 

फिर भीड़ में  पत्रकार को भूमाफिया सूरजपाल और उनके सहयोगी गौरव सिंह भदौरिया ने धक्का दिया और फिर मेरे ऊपर लाठी डंडे और रॉड से लगातार मारा जाने लगा पुलिस प्रशाशन के भी कुछ लोग इस हमले में शामिल थे l  वैसे पुलिस का पत्रकार के ऊपर लाठी चलाने की बात अब तक समझ में नहीं आ पायी है और ये  समझ से बहार की बात है जिसे से पत्रकार को बचाओ की उम्मीद थी वो लोग सूरजपाल के कहने पर पीड़ित पत्रकार को निशाना बना रहे थे l 

जब पीड़ित पत्रकार थाने पर जाकर बात की तो पता चला कि वो लोग भू माफियाओं के कहने पर लाठिया चलायी पत्रकार ने उन्हें बताया भी कि भीड़ का फायदा उठाकर अपने खिलाफ चली खबरों वाली रंजिस के चलते अपराधिक किस्म का भू माफिया सूरजपाल सिंह और गौरव सिंह भदौरिया ने पत्रकार को निशाना बनाया l पत्रकार कुछ समझ नहीं पा रहा था

लेकिन सूरज पल सिंह पुलिस वालो से ये कहते हुए सुन रहा था कि, यही है जो मेरे बारे में अखबार में लिखता है, मारो इसे यही बात लगातार सूरजपाल सिंह बोलते रहा l पत्रकार को समझ नहीं आया कि क्या हो रहा है और घसीटते हुए ACM -5 कि जीप में बैठा दिया गया भीड़ में  कैमरा और मोबाइल छीन लिया गया और  बार-बार बताने के बाद भी पत्रकार को जीप से बहार नहीं आने दिया गया  समझ नहीं आ रहा था कि पत्रकार क्या करे l 

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पीड़ित पत्रकार लगातार वहाँ पर अधिकारिओ से अपने केमरे के बारे में पूछता रहा लेकिन किसी ने भी कुछ संतोषजनक जवाब नहीं दिया l फिर जब ACM -5 वहाँ से जाने लगे तो पत्रकार ने उनसे आग्रह किया कि मेरा  कैमरा और मोबाइल किसी ने छीन लिया है , लेकिन उन्होंने कुछ नहीं सुना फिर पत्रकार ने कहा कि मैं थाने उनके साथ ही जाऊंगा नहीं तो यहाँ मेरे साथ कुछ भी हो सकता है फिर भी वो वहाँ से चले गए l फिर पत्रकार एक पुलिस अधिकारी द्विवेदी जो मौके पर थे उनसे  बात किया तो उन्होंने पत्रकार के मोबाइल नंबर पर फोन किया और फोन पत्रकार को प्राप्त हुआ लेकिन पीड़ित पत्रकार का कैमरा छीन लिया गया था और आज तक नहीं मिला 

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फिर पत्रकार ने 100 नंबर पर जानकारी देते हुए SSP कानपुर से बात कि और उन्होंने थानाध्यक्ष नौबस्ता को लाइन पर लिया और पत्रकार ने पूरी जानकारी SSP से मिलकर पूरे मामले कि जानकारी दी और उनके निर्देश के अनुसार थाना नौबस्ता जाकर अपनी तहरीर दिया और फिर  मेडिकल थाने के द्वारा कराया गया जिसमें आठ जगह गंभीर चोट के निशान चिन्हित किया गया और मामला दर्ज किया गया l लगातार थानाध्यक्ष नौबस्ता और SSP कानपुर से संपर्क में होने के बाद भी किसी तरह कि कोई कार्यवाही न होने पर DGP ऑफिस में भी शिकायत किया गया

वहाँ से जानकारी मांगने पर भी कार्यवाही न होने पर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ऑनलाइन शिकायत दर्ज किया और उसके बाद  CO गोविन्द नगर ,CO नज़ीराबाद का फोन आया जिसमें जबरदस्ती मामले कि जानकारी मांगी गई फिर भी अभी तक अपराधी पुलिस के सफर ताल ठोक रहे हैं l

 

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