बौखला गया जीएनएफ अस्पताल, फैलाने लगा अफवाह

बौखला गया जीएनएफ अस्पताल, फैलाने लगा अफवाह

अस्पताल की लापरवाही से अधमरा हो गए थे ललन चौबे

जीएनएफ अस्पताल और सीएमओ ऑफिस के लोग मिलकर मीडिया के माध्यम से पीड़ित परिवार पर बना रहे हैं दबाव

लखनऊ /राजधानी लखनऊ से कुछ दिनों से लगातार मीडिया और सोशल मीडिया के माध्यम से ललन चौबे की मौत के मामले में खबर सुन और पढ़ रहे हैं. दरअसल इस मामले को लेकर अस्पताल मैनेजमेंट इतना बौखला चुका है कि पीड़ित परिवार को जानमाल का खतरा अब दिखने लगा है पीड़ित परिवार पर लगातार सीएमओ दफ्तर की जांच टीम और जी एन आफ अस्पताल की तरफ से शुरुआती दबाव बनाने के बाद जब मामला थमने का नाम नहीं ले रहा तो अलग-अलग गली मोहल्ले चौराहों में जानने वाले लोगों से देख लेने और उखाड़ देने की बातें सामने निकलकर आने लगी है. 

सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार तिलमिला चुका है  जीएनएफ अस्पताल का वर्तमान मैनेजमेंट, आखिर क्या छुपाना चाहता है जीएनएफ अस्पताल जिसके लिए अब उसे सहारा लेना पड़ रहा है सीएमओ ऑफिस के दलालों और कुछ मीडिया बंधुओं की. जीएनएफ अस्पताल का मैनेजमेंट जिसके पास अप्रैल से लेकर जुलाई 2019 के लास्ट तक लाइसेंस नहीं था फिर भी मरीज को एडमिट दिखाकर लाखों लाख रुपए ऐंठ लिये. प्रदूषण विभाग फायर सेफ्टी मेडिकल वेस्ट जीएसटी टैक्स और तो और फर्जी एफिडेविट पे  रजिस्ट्रेशन कराने वाला जीएनएफ अस्पताल और उसका वर्तमान मैनेजमेंट इतना तिलमिला चुका है कि सीएमओ ऑफिस के आसपास टहलने वाले दलालों और कुछ मीडिया बंधुओं से बरगलाने वाली बातों का अफवाह उड़ा कर पीड़ित परिवार पर दबाव बना रहा है.

क्या जीएनएफ अस्पताल का खाड़ी देशों से सीधा है संपर्क

जीएनएफ अस्पताल का वर्तमान मैनेजमेंट के बारे में सूत्र बताते हैं कि गल्फ कंट्रीयों से सीधा संपर्क इस अस्पताल का बना हुआ है जिसकी वजह से जीएनएफ का मालिक और लेन-देन की बात भी दूसरों देशों से रहता है. अस्पताल जब से चल रहा है तब से यह बताया जाता है कि इस अस्पताल को बाहरी फंडिंग भी हो रही है इस खबर की पुष्टि तो हमारा मीडिया संस्थान नहीं करता लेकिन सूत्रों के हवाले और गुप्त जानकारियां जो मिल रही है वह बड़ा ही चौंकाने वाला खबर है. और अगर ऐसा होता है तो देश की बड़ी जांच एजेंसियां ऐसे लोगों पर तत्काल नकेल कसने की कोशिश करें. हो सकता है ऐसे लोग हमारे देश को कहीं ना कहीं नुकसान भी पहुंचा सकते हैं.

नारकोटिक और गर्भपात की दवाओं का बिक्री केंद्र जीएनएफ अस्पताल

जीएनएफ अस्पताल मैं बिना लाइसेंस के दवा दुकान भी चला रहे मालिक मुस्ताक जावेद और जितेंद्र. आखिर कैसे इस अस्पताल को दवा दुकान चलाने के लिए लाइसेंस मिल गया या बिना लाइसेंस के यह दवा दुकान चल रहे हैं इसके लिए सीएमओ साहब आप की जांच टीम आई थी तब भी दवा दुकान वैसे ही थी लेकिन फिर भी कार्रवाई के नाम पर कुछ भी नहीं हुआ. या तो गरम हो गया पॉकेट या तो बाहरी ब्यूरोक्रेट्स का बनने लगा होगा दबाव अस्पताल के अंदर की कई तस्वीरें यह जाहिर कर रही है कि नारकोटिक और गर्भपात की दवाओं का सौदागर भी है यह अस्पताल. फिर सीएमओ दफ्तर की जांच टीम अब तक हाथ पर हाथ धरे क्यों बैठी है खैर इस प्रदेश और देश की विडंबना है गलत का साथ देने वालों की कोई कमी नहीं क्योंकि उन्हीं गलत कामों से उनके घर का खर्चा और राजशाही ठाट चलता है.

क्या नहीं मिलेगा ललन चौबे की मौत के जिम्मेदार लोगों को सजा

पीड़ित परिवार पर लगातार किसी न किसी माध्यम से दबाव बनाना और झूठी और बरगलाने वाली अफवाहों को लोगों के सामने सच बताने में जुटा हुआ अस्पताल मैनेजमेंट कुछ भी और किसी भी हद तक करने के लिए आगे आ चुका है पीड़ित परिवार को इस व्यवस्था से न्याय की कोई उम्मीद नहीं दिख रही है जाहिर सी बात है ललन चौबे  जैसे लोग राजधानी कि प्राइवेट और सरकारी अस्पतालों की लापरवाही की वजह से मरते हैं और इन जैसे अस्पताल अपने पैसों के बलबूते मामले को धाराशाही कर पीड़ित परिवार को असहाय और रोड पर भीख मांगने को मजबूर कर देते हैं मरीज का परिजन अपने मरीज की इलाज के लिए जमीन जायदाद गहने गाड़ी मकान सब बेचकर अपने मरीज को सही इलाज के लिए राजधानी की ओर ले कर आते हैं लेकिन यहां तो जब इस तरह के स्वास्थ्य विभाग और निजी अस्पताल का सांठगांठ रहेगा तो कौन सा मरीज यहां सही होकर जा सकता है आप इसकी कल्पना भी कर रहे हो तो व्यर्थ है. 

क्या कहता है अस्पताल मैनेजमेंट सोशल मीडिया के माध्यम से

अस्पताल मैनेजमेंट इन बातों को बेबुनियाद और गलत बता रहा है और यही नहीं बल्कि यह भी कह रहा है कि उसके पास सारे अस्पताल के मानक उपलब्ध है और मीडिया के दफ्तरों में भी खबर का खंडन करने के लिए दबाव बना रहा है. 

पीड़ित परिवार मीडिया के माध्यम से स्वास्थ्य मंत्री और मुख्यमंत्री से गुहार लगा रहा है कि मुझ परिवार का जीएनएफ अस्पताल  के दबंग लोगों से सुरक्षा के साथ जिम्मेदार और दोषी लोगों को सजा देकर न्याय की जाए

 

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