नारी

नारी

नारी

जीवन क्या है ये,
माँ के अहसानो की कहानी है ।
कभी कौशल्या व्याकुल
कभी लव-कुश की जुबानी है ।।

अभिशापो को जो झेले
जीवन सुधा वो न्यारी है ।
आँखों में लिए करुणा
जीवन का वरदान नारी है ।।

बहन-बेटी नही युग में
माँ का अवतार नारी है ।
दरिंदो की हवस के साथ
फिर क्यो कायनात सारी है ।।

वध हो चुका रावण का
फिर क्यो आज जिन्दा है ।
वेदना सुन निर्भया, गुडिया की
भारत माँ शर्मिंदा है ।।

 

 हितेन्द्र शर्मा
शिमला, हिo प्रo

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