अघात

अघात

अघात

कुछ के दिल में, 
तो कुछ के दिमाग में भी हूँ। 
कुछ की नज़रों में, 
तो कुछ के नजारों में भी हूँ। 
कुछ के स्नेह में, 
तो कुछ के विशेष-प्यारों में भी हूँ। 
कुछ को सितारों में, 
तो कुछ के लिए हजारों में भी हूँ। 
कुछ की हवा में, 
तो कुछ की दवा में भी हूँ। 
कुछ के लिए तलवार हूँ,
तो कुछ के लिए पतवार भी हूँ। 
बाहर से कैसे जज्ब कर लेते हो साहब, 
अच्छाई के अगर साथ

तो बुराई के लिए अघात भी हूँ ।।

 

                                                                                                                                           - हितेन्द्र शर्मा

 

 

 

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