तुम क्यों याद आते हो?

तुम क्यों याद आते हो?

वक्त बेवक्त आज भी
न जाने,
तुम क्यों याद आते हो?
झूठे ख्वाब की तरह 
हर रोज,
न जाने ,
तुम क्यों याद आते हो ?
हम जानते हैं,
आप हमें कभी,
याद नहीं करते
फिर भी
दिल की हर धड़कन में,
न जाने,
तुम क्यों याद आते हो?
सोचता हूं,
तुमको भूल जाऊंगा
पर न जाने,
फिर भी 
बहती इन फिजाओं में,
बहती इन हवाओं में 
तुम क्यों याद आते हो?
मैं आक्रोश करता हूं ,
इन बरस्ती बरसातों में,
इन खामोश रातों में
न जाने फिर भी
तुम क्यों याद आते हो?

राजीव डोगरा
कांगड़ा हिमाचल प्रदेश
(भाषा अध्यापक)
गवर्नमेंट हाई स्कूल,ठाकुरद्वारा।
पिन कोड 
176029
Rajivdogra1@gmail.com

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