मुझे भुला दिया तो रात भर जागते क्यूँ हो

मुझे भुला दिया तो रात भर जागते क्यूँ हो

मुझे भुला दिया तो रात भर जागते क्यूँ हो

मेरे सपनों में दबे फिर पाँव भागते क्यूँ हो

 

एक जो कीमती चीज़ थी वो भी खो दी

अब बेवजह इस कदर दुआ माँगते क्यूँ हो

 

इतना ही आसान था तो पहले बिछड़ जाते

वक़्त की दीवार पे गुज़रे लम्हात टाँगते क्यूँ हो

 

गर सब निकाल दिया खुरच-खुरच के जिस्म से

फिर मेरी हँसी से अपनी तस्वीर रँगते क्यूँ हो

 

सलिल सरोज

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