हम इश्क करते-करते  निभाना सीख गए।

हम इश्क करते-करते  निभाना सीख गए।

हम इश्क करते-करते 
निभाना सीख गए।
वो इश्क करते-करते 
सब का दिल 
बहलाना सीख गए।

हम इश्क़ करते-करते
मोहब्बत के अफसाने 
लिखने लग पढ़े।
वो इश्क करते-करते 
हर जगह नए अफ़साने 
गढ़ने लग पड़े।

हम इश्क करते-करते 
सब को अपना 
बनाना सीख गए ।
वो इश्क करते-करते 
परायो को भी अपने 
गले लगाना सीखें गए।

हम इश्क करते-करते 
उस खुदा को अपना 
महबूब बनाने लग पड़े।
वो इश्क करते-करते
हर किसी को अपना 
खुदा मानने लग पड़े।

राजीव डोगरा
कांगड़ा हिमाचल प्रदेश (युवा कवि लेखक)


news@swatantraprabhat.com
 

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