छोड़कर चली सुषमा दीदी संसद का अंगना - कवि जितेंद्र कानपुरी

 छोड़कर चली सुषमा दीदी संसद का अंगना - कवि जितेंद्र कानपुरी

 छोड़कर चली सुषमा दीदी संसद का अंगना - कवि जितेंद्र कानपुरी

चली सुषमा दीदी
छोड़ कर सब राग बाग ।
मगर दिलो में रहेंगी
सबके साथ साथ ।।

चरित्रवान, प्रतिभासम्पन्न
निडर एवं कर्तव्य परायण ।
उत्साही ,वीरता ,गम्भीरता
हर संकट निर्णायक ।।

चली सुषमा दीदी
छोड़कर सब राग बाग ।
मगर दिलों में रहेंगी
सबके साथ साथ ।।

हमे अहसास है कि हम 
खो चुके है एक वीरांगना ।
सच कहूं तो सूना सा लग रहा  है
भारतीय  संसद का अंगना ।।

चली सुषमा दीदी
छोड़कर सब राग बाग ।
मगर दिलों में रहेंगी 
सबके साथ साथ ।।


 जीतेन्द्र कानपुरी 

 

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