75 वर्ष शादी क्या है? 

75 वर्ष शादी क्या है? 

75 वर्ष शादी क्या है? 

 शादी दो दिलों का संगम है. शादी दो आत्माओं का मिलन है. शादी वंश आगे बढ़ाने का एकमात्र साधन है.

 शादी क्या है? 

 शादी शारीरिक भूख की तृप्ति है.  शादी तन की ज्वाला शांत करने का माध्यम है.

 शादी क्या है? 

 शादी जीवन में तराजू के दो  पलड़े  है. जिनमें तालमेल बैठाकर जीना ही शादी कहलाता है.

 जीवन में खुशियों के साथ जिम्मेदारियां भी बढ़ती हैं.

 परंतु दुख वहां होता है जब  हम सफर में से एक बीच मझधार में साथ छोड़ देता है.

 हर उम्र में हमसफर की जरूरत होती है.

 हमारा अनुभव कहता है.

 हमें सबसे ज्यादा जरूरत ढलती उम्र में एक मददगार की होती है.

 हमारा अनुभव कहता है हमें सबसे ज्यादा जरूरत अकेलेपन को दूर करने के लिए इस उम्र के पड़ाव में एक हमसफर की होती  है. 

 हमारा मानना है ढलती उम्र में हमारा  ध्यान एक दूसरे के ख्याल में ही गुजरता है.

 जबकि नाती पोते धोते बच्चे प्रौढ़ावस्था में दूसरी शादी को लोक लाज समाज से जोड़कर देखते हैं.

 उनकी यह छोटी सोच, छोटी मानसिकता, यही दर्शाती है. शादी का मतलब अंतरंग होना ही है.

उनकी छोटी सोच, छोटी मानसिकता, यही दर्शाती है. शादी का मतलब शारीरिक भूख को पूरा करना है.

 उनकी पारंपरिक सोच यही दर्शाती है.  

शादी का अर्थ सहवास है. जबकि हर कोई जानता है 75 वर्ष में हर किसी को एक अदद हमसफर की आवश्यकता होती है.

 इस उम्र में दोनों का समय कटना मुश्किल हो जाता है.

जब एक हमसफर साथ छोड़ दे.

 इसीलिए प्रौढ़ावस्था में दूसरी शादी से परिवार के किसी भी सदस्य को गुरेज नहीं करना चाहिए.

 यह वह अवस्था है जब व्यक्ति को अकेलेपन का एहसास होता है.

 वह अपने ही परिवार में होते हुए अपने आप को अकेला महसूस करता है

 इसीलिए परिवार को प्रौढ़ावस्था में अपने बुजुर्गों को शादी करने की सहर्ष स्वीकृति देनी चाहिए.

 ना की उनकी खुशियों में बाधा बनकर. उनकी खुशियों मे  रुकावट बनकर. उनकी खुशियों को रोकने की कोशिश करनी चाहिए.

 आज सब ने देखा किस प्रकार परिवार ने अपने परिवार के पिता, अपने दादा, अपने नाना की खुशियों को छीन कर उनका जीवन लील लिया. 

कहने का तात्पर्य उनके पिता ने आत्महत्या कर ली. 

जब उन्हें 75वर्ष की आयु मे दूसरी शादी से अपनो ने ही इंकार किया. 

 एमसएन विचार  प्रौढ़ावस्था में जहां बच्चे अपने बुजुर्ग माता एवं पिता  से कन्नी काटने लगते हैं.

 जहां बच्चे अपने बुजुर्गों  से मिलने का समय नहीं निकाल पाते.

 उनसे बातचीत नहीं कर पाते.  वह समय बुजुर्गों के लिए अत्याधिक पीड़ादायक होता है. वह समय काटे नहीं कटता वह बातचीत करने के लिए तरस जाते हैं.

 इसी अकेलेपन को दूर करने के लिए प्रौढ़ावस्था में दूसरी शादी होना अत्यंत आवश्यक है. जिससे दोनों का दिल बहला रहेगा.

 दोनों की जरूरतें एक दूसरे से पूरी होती रहेंगी.

 इतिश्री

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