योगी जी आपकी बिजली ढपोर शंख ....

योगी जी आपकी बिजली ढपोर  शंख ....

हालत ये हर किसी से जुड़े है... थोड़ी लम्बी कहानी है, बिजली न आ रही हो तो पढ़ सकते है...

एक गाँव मे एक गरीब ब्राह्मण और ब्राह्मणी रहते थे... ब्राह्मण देवता भिक्षा मांग कर जीवन यापन करते थे... ब्राह्मण देवता का एक नियम था कि 7 गांवों में जाते थे और प्रत्येक गाँव के एक ही घर मे भिक्षा के लिए सिर्फ एक आवाज़ लगाते थे... जो मिला उसी को लेकर लौट आते और धर्म पत्नी के हाथों में रख देते... एक बार की बात है, ईश्वर की ऐसी महिमा हुई 7 के 7 गाँवों में से किसी भी घर से ब्राह्मण देवता को कोई दान नही मिला... ऐसा लगातार 5 दिनों तक हुआ... भूख के मारे ब्राह्मण और ब्राह्मणी की हालत खराब, ऊपर से ऐसे ही हाल में रोज सुबह ब्राह्मण देवता भिक्षा के लिए निकल पड़ते... अखिर हार कर छठवें रोज पत्नी ने कहा कि आज खाली हाथ लौट कर मत आना... ब्राह्मण देवता ने ईश्वर को याद किया और पत्नी से शाम को कुछ न कुछ लेकर आने का वादा कर घर से निकले... चूंकि नज़दीकी गांवों से पिछले 5 दिन से कोई भिक्षा प्राप्त नही हुई थी, अतः भिक्षा की उम्मीद में ब्राह्मण देवता राज्य की सीमा पार कर दूसरे राज्य जा पहुँचे... लेकिन ईश्वर तो जैसे परीक्षा लेने की ठान बैठे थे..

. उस दिन भी सातों गांवों के सातों घरों से निराशा ही हाथ लगी... ब्राह्मण देवता 7 घरों का अपना नियम नही तोड़ना चाहते थे और पत्नी से किया वादा उन्हें खाली हाथ घर जाने में लज़्ज़ित कर रहा था... थक हार कर उन्होंने आत्महत्या का विचार बनाया और एक नदी किनारे चल पड़े... नदी में छलांग लगाने ही वाले थे कि एक दिव्य रूप धारी साधु महाराज ने उन्हें बचा लिया और आत्महत्या का कारण पूछा... ब्राह्मण देवता ने सारा किस्सा कह सुनाया... साधू महाराज ने उन्हें एक शँख दिया और कहा ये कुबेर शँख है.

.. गाय के गोबर से जमीन को लीपने और गंगा जल छिड़कने के बाद इस शँख को उस पर रखने के बाद जो मांगोगे वो मिलेगा... ब्राह्मण देवता खुशी खुशी घर की ओर लौटे... रात बहुत हो चुकी थी और राज्य की सीमा में घना जंगल था अतः सीमा के नज़दीक बसे एक गांव में एक तेली महाराज के घर का दरवाजा खटखटाया और रात्रि विश्राम की इजाज़त माँगी... तेली बहुत कंजूस और धूर्त था... उसने कहा महाराज आप रात्रि विश्राम करें ये मेरा शौभाग्य होगा किंतु मैं बहुत गरीब हूँ... भूसी की रोटी और घास की सब्ज़ी खाता हूं, वही आपको खिला पाऊँगा... ब्राह्मण देवता ने कहा तुम फिक्र मत करो बस थोड़ा सा गाय का गोबर और गंगाजल ले आओ... इसके बाद ब्राह्मण देवता ने साधू द्वारा बताई क्रिया दोहराई और कुबेर शँख से कई प्रकार के भोजन और तेली महाराज के लिए कुछ स्वर्ण मुद्राएं मांगी... कुबेर शँख से ब्राह्मण देवता द्वारा मांगा गया वरदान प्राप्त हुआ...

भोजन के उपरान्त दोनों लोग सोने के लिए लेट गए... कई दिन के थके ब्राह्मण देवता को नींद आ गई किंतु कुटिल तेली महाराज ने कहीं से वैसे ही दिखने वाले शँख का प्रबंध किया और कुबेर शँख को निकाल कर उसकी जगह साधारण शँख रख दिया... ,प्रातः काल ब्राह्मण देवता ने विदा ली और घर पहुँचे... पत्नी भूख से व्याकुल थी , अतः साधु महाराज द्वारा बताई गई क्रिया दोहराई किंतु नकली शँख क्या देता... पत्नी को पूरा घटनाक्रम बताया तो उसने वापस उन्ही साधु महाराज के पास जाने की सलाह दी... ब्राह्मण देवता खोजते खोजते साधू महाराज तक पहुँचे, और पूरी बात बताई... साधू महाराज बोले कोई बात नही, मैं तुम्हे दूसरा शँख देता हूँ... किंतु ये ध्यान रहे ये ढपोर शँख है, इससे जितना मांगोगे उसका दोगुना देता है

अतः जो भी मांगना सावधानी पूर्वक मांगना... विदा करते वक्त साधू महाराज ने ब्राह्मण देवता को उसी तेली के यहाँ विश्राम की सलाह दी और कान में कुछ कहा... ब्राह्मण देवता फिर उसी तेली के घर पहुँचे और रात्रि विश्राम की इजाज़त मांगी... तेली ने कहा महाराज आपने जो मुद्रा दिए थे वो चोरी हो गए... ब्राह्मण देवता ने कहा कोई बात नही, मैं सुबह तुम्हे और धन देकर जाऊँगा... मेरे पास ये दूसरा शँख है जो दोगुना देता है... तेली महाराज के मन मे फिर से लालच आ गया और फिर जब ब्राह्मण देवता सो गए तो चुपके से पुराना शँख रख कर नया वाला निकाल लिया... सुबह जब ब्राह्मण देवता विदा लेकर अपने गंतव्य की ओर प्रस्थान कर गए तो तेली महाराज ने गोबर से जमीन को लेपा और गंगाजल छिड़क कर ढपोर शँख से वरदान मांगा, हे ढपोर शँख मुझे एक हज़ार स्वर्ण मुद्राएँ प्रदान करो...

ढपोर शँख से आवाज़ आई,

-एक हज़ार क्यो बेटा दो हज़ार स्वर्ण मुद्राएँ ले लो...

-ठीक है ठीक है, शँख देवता दो हज़ार द दीजिए...

-दो हज़ार क्यो बेटा चार हज़ार मुद्राएँ ले लो...

-अच्छा तो चार हज़ार दे दीजिए.

 -चार हज़ार क्यो बेटा आठ हजार ले लो..

-आठ हजार ही दीजिए प्रभु...

-आठ हजार नही बेटा सोलह हजार ले लो... आगे की कहानी तो आप समझ ही गए होंगे....ये कहानी बचपन मे सुनी थी, नानाजी से... अचानक याद इसलिए आ गई कि अखिलेश यादव 14 घण्टे बिजली देते थे , योगी जी बोले बेटा 14 घण्टे क्यो 24 घण्टे ले लो...

Anand vedanti Tripathi

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