श्राद्ध की विधि...

श्राद्ध की विधि...

श्राद्ध की विधि

पितृ-पक्ष में अपने पितरों का ध्यान कर नीचे लिखे मन्त्र से जल में सफ़ेद फूल और काला तिल डालकर 15 दिन नित्य दक्षिण दिशा की ओर मुख करके श्रद्धापूर्वक जल देने से सुख-शान्ति एवं समृद्धि की प्राप्ति होती है, इसमें किंचित सन्देह नहीं है।

श्राद्ध मन्त्र

पितृभ्य:स्वधायिभ्य:स्वधा नम:। पितामहेभ्य:स्वधायिभ्य:स्वधा नम:। प्रपितामहेभ्य:स्वधायिभ्य:स्वधा नम:। पितर: पितरो त्वम तृप्तम भव पित्रिभ्यो नम:।। जल देने के बाद अन्तरिक्ष की ओर हाथ ऊपर करके प्रणाम करते हुए पितरों की श्रद्धा पूर्वक स्तुति करनी चाहिए।

पितर स्तुति मन्त्र/ Pitar Stuti Mantra ॐ नमो व:पितरो रसाय नमो व:पितर:शोषाय नमो व:पितरो जीवाय नमो व:पितर:स्वधायै नमो व:पितरो घोराय नमो व:पितर:पितरो नमो नमो मम जलअंजलीमगृहाण पितरो वास आधत।। अथवा तृप्यन्तु पितर:सर्वे पितामाता महादय:। त्वम प्रसन्ना भव इदम ददातु तिलोदकम।।

इस प्रकार पितृ-पक्ष में श्रद्धा पूर्वक मन्त्र-कर्म की प्रधानता होती है। अतः ह्रदय से पितरों का स्मरण कर मन्त्र से जल देकर स्तुति मात्र कर लेने से भी श्राद्ध-कर्म की पूर्णता शास्त्रों में मान्य है।

पंडित अम्बरीष चन्द्र मिश्रा

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