प्रिंट, इलैक्ट्रॉनिक व सोशल मीडिया में नहीं कर सकेंगे प्रचार, दिखाना होगा खर्चा - महानिदेशक  भारत चुनाव आयोग धीरेन्द्र ओझा

प्रिंट, इलैक्ट्रॉनिक व सोशल मीडिया में नहीं कर सकेंगे प्रचार, दिखाना होगा खर्चा - महानिदेशक  भारत चुनाव आयोग धीरेन्द्र ओझा

उम्मीदवारों को मीडिया में अपना विज्ञापन देने के लिए लेनी होगी एमसीएमसी कमेटी की अनुमति, बिना जानकारी दिए प्रिंट, इलैक्ट्रॉनिक व सोशल मीडिया में नहीं कर सकेंगे प्रचार, दिखाना होगा खर्चा - महानिदेशक  भारत चुनाव आयोग धीरेन्द्र ओझा

बाल्मीकि वर्मा (तिलक राज बंसल)

(स्वतंत्र प्रभात)

करनाल (हरियाणा) 16 सितम्बर :-

भारत चुनाव आयोग के महानिदेशक धीरेन्द्र ओझा ने सोमवार को, हरियाणा में आगागी विधानसभा चुनाव से जुड़े अधिकारियों के साथ वीडियो कांफ्रैंस कर मीडिया सर्टिफिकेशन एण्ड मॉनिटरिंग कमेटी का गठन और उसके कार्यों को लेकर विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि प्रत्येक राजनीतिक विज्ञापन को एमसीएमसी कमेटी से प्रमाणन करवाना जरूरी है। कमेटी का कार्य है कि वह प्रतिदिन पेड न्यूज पर निगरानी कर उस पर एक्शन लेगी और प्रिंट, इलैक्ट्रॉनिक तथा सोशल मीडिया पर समाचार से संबंधित सामग्री को देखकर उसकी वैल्यू लगाएगी।

यदि कोई अभ्यार्थी आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन करता है तो कमेटी की सिफारिश पर संबंधित रिटर्निंग अधिकारी उसे नोटिस देगा। पेड न्यूज की बात करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि कोई ऐसी सामग्री जो एमसीएमसी कमेटी समझती है कि यह विज्ञापन होना चाहिए था और खर्चा बचाने के लिए ऐसा किया गया है, वह पेड न्यूज है। इसी प्रकार कुछ प्रलोभन देकर भी पेड न्यूज लगवाई जा सकती है। एमसीएमसी कमेटी का दायित्व है कि वह पेड न्यूज पर पैनी नजर रखे। इसके लिए जरूरी है कि मीडियाकर्मियों के साथ प्रैस वार्ता कर ली जाए।

महानिदेशक ने आगे बताया कि एमसीएमसी कमेटी में संबंधित जन सम्पर्क अधिकारी का महत्वपूर्ण रोल होता है, उसकी जिम्मेवारी है कि वह चुनाव से संबंधित प्रत्येक सूचना को मीडिया में प्रकाशित करवाए और उसमें सभी तथ्य ध्यान से दिए जाने चाहिएं ताकि किसी तरह का भ्रम या गलत अर्थ न निकले। चुनाव प्रक्रिया के दौरान प्रत्येक दिन सूचना रिलीज की जानी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि कोई व्यक्ति ऐसा कहता है कि उसका स्वयं का अखबार या चैनल है और वह उस पर प्रचार सामग्री को प्रकाशित या प्रचारित कर सकता है, ऐसी स्थिति में उसका खर्चा चुनाव खर्च में जुड़ेगा। खर्चे को लेकर डीआईपीआर और डीएवीपी द्वारा दरें जारी कर दी गई हैं। सोशल मीडिया के माध्यम से प्रचार को लेकर उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में एमसीएमसी कमेटी को विवेकपूर्ण और अब तक जो व्यवस्था की गई है उसी अनुसार खर्चा तय करना चाहिए। उन्होंने बताया कि सोशल मीडिया का क्षेत्र अत्याधिक व्यापक है। इस बारे क्या व्यवस्था हो, इस पर चुनाव आयोग द्वारा लगातार बैठकें की जा रही हैं।

फेक न्यूज यानि बेबुनियाद और झूठी खबरें जिनसे जनता में गलत संदेश जाता है, बारे उन्होंने बताया कि ऐसी स्थिति में मीडिया को प्रैस रिलीज से ब्रीफ कर वास्तविकता की जानकारी दे दी जाए। इसके लिए पुलिस विभाग की साईबर शाखा से भी मदद ली जा सकती है। उन्होंने कहा कि मीडिया से मैत्रीपूर्ण वार्ता करते रहें और उनकी ओर से सूचनाएं इत्यादि को लेकर कोई शिकायत आती है, उसका तुरंत समाधान करें। उन्होंने बताया कि जिला और राज्य स्तर पर मीडिया सैल बनाए जाएं। ईवीएम और वीवीपैट बारे सम्पूर्ण जानकारी के साथ मीडिया के माध्यम से जनता को जागरूक किया जाए। चुनाव प्रचार सामग्री पर मुद्रक व प्रकाशक दोनों का नाम होना चाहिए, यदि ऐसा नहीं है तो ऐसे व्यक्ति के खिलाफ आरपीआई एक्ट के तहत कार्यवाही की जाए।

वीडियो कांफ्रैंसिंग में हरियाणा के अतिरिक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी डीके बेहरा ने बताया कि प्रदेश मुख्यालय पर एमसीएमसी कमेटी का गठन कर दिया गया है। जिला स्तर पर गठित एमसीएमसी कमेटी द्वारा पेड न्यूज या राजनीतिक विज्ञापन का जो खर्चा तय किया जाता है यदि कोई अभ्यार्थी उससे संतुष्ट नहीं होता तो वह स्टेट एमसीएमसी कमेटी से अपील कर सकता है।

करनाल के उपायुक्त विनय प्रताप सिंह के अनुसार जिला में एमसीएमसी कमेटी का गठन किया जा चुका है और इसे लेकर बैठक भी हो चुकी है। इस कमेटी में विभिन्न प्रशासनिक अधिकारियों को सदस्य, जन सम्पर्क अधिकारी को सदस्य सचिव तथा इलैक्ट्रॉनिक व सोशल मीडिया जनर्लिस्ट को भी बतौर सदस्य शामिल किया गया है।

वीडियो कांफ्रैंस में जिला के अतिरिक्त उपायुक्त अनीश यादव और जिला की सभी पांचों विधानसभा के रिटर्निंग अधिकारी भी उपस्थित थे।

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