बद से बदतर हुई समुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मथुरा नगर की स्वास्थ्य सेवाएं

बद से बदतर हुई समुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मथुरा नगर की स्वास्थ्य सेवाएं

 

रिपोर्ट-डीके सिंह

 

टिकैत नगर बाराबंकी

सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र मथुरानगर के अधीक्षक स्वास्थय कर्मियों की कार्य प्रणाली योगी आदित्य नाथ की पूर्ण बहुमत वाली सरकार में भी नही सुधर रही कहना अतिशयोक्ति नहीं होगा

कि सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र मथुरानगर पैसा वसूली का केन्द्र बनता जा रहा है जहां बिना रूपये खर्च किए कोई काम संभव नहीं है।

भाजपा सरकार में भी सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र मथुरानगर में नियुक्त डाक्टर और अन्य स्वास्थय कर्मियों का रवैया सुधरने का नाम नहीं ले रहा है और यहाँ पर आने वाले मरीजों को स्वास्थ्य सेवाएं नहीं मिल पा रही है।

सबसे बड़ी समस्या तो प्रसव कक्ष की है।यहाँ पर लाइट जाने के बाद पूरा प्रसव कक्ष अंधेरे में डूब जाता है और प्रसव हेतु आई महिलाओं के परिजनों अथवा तीमारदारो को प्रसव के लिए मोमबत्ती का इंतजाम खुद करना पड़ता है ।

लेकिन अस्पताल में रखे जनरेटर चलवाना यहाँ के अधीक्षक मुनासिब नहीं समझते और तो और यहाँ की स्टाफ नर्सो द्वारा प्रसव पीड़ित महिलाओं से भारी भरकम वसूली की जाती है और जो गरीब महिलाएं स्टाफ नर्सों को मुंह मांगी दक्षिणा दे पाने में असमर्थता व्यक्त की जाती है उन्हे सीधा यह कहकर रिफर कर दिया जाता है कि आपरेशन से ही बच्चा जन्म लेगा।

इस सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र की मनमानी यहीं खत्म नहीं होती यहाँ पर तैनात अधीक्षक कभी भी रात्रि प्रवास नहीं करते हैं और जो चिकित्सक यहाँ रूकते भी है उनके द्वारा बाहर से कमीशन की दवाएं लिख कर मरीजों को तबाह किया जा रहा है।

इसके पीछे हमेशा अस्पताल में दवाएं न होने का रोना रोया जाता है। तो वही प्रसूता महिलाओं को 1400 रूपये दिलाने के लिए उनसे 150-200 रूपये की वसूली की जाती है तो वही पहले बच्चे वाली महिलाओं को छः हजार दिलाने के लिए एक से डेढ़ हजार रुपये की वसूली की जाती है।

और वसूली करने वाली ए एन एम द्वारा बताया जाता है कि यह पैसे बाबू से लेकर अधीक्षक तक जाता है। तो अस्पताल में गंदगी हरदम व्याप्त रहती है अस्पताल के बेडो पर पड़ी मैली कुचैली चादरें अव्यवस्था की कहानी चीख चीख कर बयां कर रही हैं।

लेकिन सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र मथुरानगर में नियुक्त अधीक्षक द्वारा अस्पताल की व्यवस्था सुधारने की जहमत नहीं उठाई जा रही है और अधीक्षक उठाए भी तो कैसे जब स्वयं वह कभी भी रात्रि प्रवास नहीं करते हैं तो अन्य स्वास्थय कर्मियों पर नियंत्रण कैसे रखेंगे।

इस तरह प्रदेश में भाजपा सरकार होने के बावजूद सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र मथुरानगर बदहाल व्यवस्था का शिकार है और जिम्मेदार अधिकारी मौन साधे हुए हैं।

Comments