जीवन में नैतिकता इमानदारी करुणा और दया को अपनाना चाहिए आनंदी बेन

जीवन में नैतिकता इमानदारी करुणा और दया को अपनाना चाहिए  आनंदी बेन


‌जीवन में नैतिकता, ईमानदारी, करूणा और दया को  अपनाना चाहिए ।

‌विद्यार्थिंयों को लक्ष्य के लिए प्रयासशील होना चाहिए

‌रज्जू भैया विश्व विद्यालय का दीक्षांत समारोह संपन्न।

‌स्वतंत्र प्रभात

‌प्रयागराज।
‌ राज्यपाल   आनन्दीबेन पटेल ने प्रो0 राजेन्द्र सिंह (रज्जू भैया) विश्वविद्यालय के द्वितीय दीक्षांत समारोह  में शामिल हुई।
‌कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलपति संगीता श्रीवास्तव, विशिष्ट अतिथि के रूप में अवकाश प्राप्त न्यायमूर्ति श्री यतीन्द्र सिंह सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
‌दीक्षान्त समारोह में राज्यपाल ने विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों को उपाधियां, अंकपत्र एवं स्वर्ण, रजत एवं कांस्य पदक प्रदान किए। तथा महेश्वरी प्रसाद इण्टरमीडिएट कालेज से आये हुए बच्चो को अपने हाथों से फल, स्कूल बैग का भी वितरण किया।
‌कार्यक्रम में उपस्थित शिक्षको और विद्यार्थियों को सम्बोधित करते हुए राज्यपाल  ने कहा कि यह मेरे लिए अत्यंत प्रसन्नता का विषय है कि गंगा यमुना और सरस्वती के इस पावन धरती पर दीक्षांत समारोह में शामिल होने का मौका मिला। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा जून 2016 में राज विश्वविद्यालय की स्थापना की गयी थी। मुख्यमंत्री  योगी आदित्यनाथ जी ने इस विश्वविद्यालय का नाम प्रोफेसर राजेन्द्र सिंह रज्जू भैया के नाम पर रखा। राज्य विश्वविद्यालय में नकल विहीन परीक्षा का आयोजन कराया जा रहा है। विश्वविद्यालय की आॅनलाइन कार्यप्रणाली सराहनीय है। यह प्रदेश का पहला विश्वविद्यालय है जहां पर डिग्री और अंकपत्रों को आॅनलाइन अपलोड किया जा रहा है, जिसके माध्यम से अंकपत्र और डिग्री का गलत इस्तेमाल नहीं हो सकेगा। सारे सर्टिफिकेट आॅनलाइन विश्वविद्यालय की साइट्स पर उपलब्ध है। इसके माध्यम से किसी को भी कहीं भी बैठकर आनलाइन तरीके से वैरीफिकेशन का कार्य किया जा सकता है। दीक्षांत समारोह के अवसर पर डिग्री एवं पदक प्राप्त करने वाले समस्त छात्र-छात्राओं को शुभकामनांए देते हुए उनके उज्जवल भविष्य की कामना की।
‌ राज्यपाल ने कहा कि दीक्षांत समारोह विद्यार्थी जीवन का एक प्रमुख पड़ाव होता है और आप सभी लोगो को अपनी इस उपलब्धि पर गर्व भी महसूस हो रहा होेगा, किंतु इसके साथ ही आप लोगो को अपने जीवन में नैतिकता, ईमानदारी, करूणा और दया जैसे गुणो को भी अपनाना होगा, जिससे आप देश और प्रदेश के विकास में अपना बहुमूल्य योगदान देना सुनिश्चित कर सके। उन्होंने कहा कि जीवन में सफल होने के लिए आपका लक्ष्य स्पष्ट होना चाहिए साथ ही दूसरी महत्वपूर्ण बात है कि आप जिन लक्ष्यों को अपने जीवन में प्राप्त करना चाहते है उसके लिए आप को दृढ़ संकल्पित होकर निरंतर अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए पूरी मेहनत और ईमानदारी से लगे रहना चाहिए। कठिन परिश्रम, सहनशीलता, आत्मविश्वास और सकारात्मक मनोवृत्ति के साथ जीवन में बढ़ने वाले के लिए कुछ भी असम्भव नहीं है। विद्यार्थी जो चाहे इन गुणों के कारण अपने जीवन में प्राप्त कर सकता है। राज्यपाल ने बच्चो से कहा कि जीवन में चुनौतियां और उतार-चढ़ाव तो आते ही रहते है लेकिन हमें इन चुनौतियों और बाधाओं के आगे बिना झूके पूरी मेहनत और लगन से इनको पार करना है। जीवन में सफलता तभी मिलती है जब हमारे अंदर कार्य को दक्षतापूर्वक पूरा करने की क्षमता हो और ये क्षमता सभी विद्यार्थियों को अपने अंदर विकसित करने होगी तभी वे अपने जीवन में सफल हो सकते है। उन्होंने कहा कि किसी भी विश्वविद्यालय की वास्तिविक क्षमता की पहचान वहां की गुणवत्तापूर्ण पठन-पाठन और उच्चस्तरीय शोध के कार्य होते है। इसके लिए वहां के शिक्षको और विद्यार्थियों के अंदर पूर्ण समर्पण की भावना के साथ-साथ अनुशासन और दृढ़संकल्प की भावना का होना आवश्यक है। हमारे विश्वविद्यालय दुनिया के विश्वविद्यालयों में तभी अपना स्थान बना पायेंगे जब विश्वद्यिालयों में गुणवत्तायुक्त शिक्षा प्रदान की जाय। हमे नए भारत के निर्माण करना है और इसके लिए विश्वविद्यालयों को अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभानी है। मानव पूंजी बनाने के लिए विश्वविद्यालयों को मानव शक्ति तैयार करने अपना बहुमूल्य योगदान देना है। शिक्षा से व्यक्तिगत और आर्थिक विकास के के द्वारा खुलते है। विश्वविद्यालयों को गुणवत्ता परक शिक्षा के लिए प्रतिमान स्थापित करने होंगे। उच्च शिक्षा में लगे प्रत्येक व्यक्ति को अपनी-अपनी भूमिका का निर्वहन करना होगा।
‌ ने कहा कि दीक्षांत समारोह में पदकों की सूची में बेटियों की संख्या बेटो से अधिक है। ये महिला सशक्तीकरण की ओर बढ़ते भारत का एक उदाहरण है। महिला सशक्तीकरण के लिए केन्द्र एवं राज्य सरकार लगातार प्रयत्नशील है। बेटी बचाओ और बेटी पढ़ाओं का नारा हमारे देश के प्रधानमंत्री  ने दिया है। इससे आज भारत की जनसंख्या में बेटियों के अनुपात में वृद्धि हुई है, अब बेटी अभिशाप नहीं है। प्रधानमंत्री  की स्वच्छ भारत मुहिम के तहत पूरा भारत स्वच्छ हो रहा है और भारत के हर गांव में टाॅयलेट का निर्माण कराया जा रहा है, जिससे स्वच्छता के साथ-साथ हमारी बहन-बेटियों को खुले में शौच से मुक्ति भी मिल रही है। उन्होंने प्रधानमंत्री द्वारा किए गए आह्वाहन ‘‘टी0बी0 मुक्त भारत’’ का समर्थन एवं सहयोग करने के साथ ही हम सभी को एक टी0बी0 ग्रस्त बच्चे को गोद ले। इस तरह से कार्य करने से हम 2025 तक ही भारत को टी0बी0 मुक्त करने में सफल होंगे। उन्होंने सभी यूनिवर्सिटियों और कालेजो से आह्वाहन करते हुए कहा कि सभी अध्यापक एक-एक बच्चे को अवश्य गोद ले। वहीं हमारी असली शिक्षा और दीक्षा है। आज कुपोषण की संख्या में महिलाओं की संख्या ज्यादा है। उन्हें हमे सही आहार के विषय में जानकारी देनी चाहिए। लड़कियों में हीमोग्लोबिन का कम होना चिंता का विषय है। उन्होंने सभी यूनिवर्सिटियों और कालेजों को आप अपने यहां लड़कियों का हीमोग्लोबिन चेक कराये, जहां पर भी रिपोर्ट में हीमोग्लोबिन की कमी आये, तो उनके परिवार को बुलाकर इसके विषय में उनको जानकारी दे।
‌ ने कहा कि जिन विद्यार्थियों को आज पदक नहीं मिले है उन्हें इसके लिए निराश होने की जरूरत नहीं है। उन्होंने बच्चों से कहा कि आप अपने जीवन में एक संकल्प अवश्य करें और उसको पूरा करने के लिए पूरी मेहनत एवं लगन से जुट जाय और आप देखिएगा आप को सफलता अवश्य मिलेगी।
प्रयागराज से दया शंकर त्रिपाठी की फोटो।

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