समर्थ स्वामी जगजीवन दास साहेब के दर पर कार्तिक पूर्णिमा में लगती है भक्तों की भीड़

समर्थ स्वामी जगजीवन दास साहेब के दर पर कार्तिक पूर्णिमा में लगती है भक्तों की भीड़

जिला ब्यूरो चीफ प्रवीण तिवारी के साथ अंकित गुप्ता की रिपोर्ट

सिरौलीगौसपुर बाराबंकी ।


श्री समर्थ स्वामी जगजीवन दास साहेब बडे बाबा की कार्तिक पूर्णिमा मेले की पूर्व संध्या पर पचासों हजार सत्यनामी भक्तो की सत्यनामी उदगम पर उपस्थिति हो गयी है ।


मेले मे गोण्डा बहराइच बलरामपुर श्रावस्ती सीतापुर लखीमपुर लखनऊ रायबरेली फैजाबाद आदि जिलो से कोटवाधाम मे आमद कर चुके है ।

मेले मे अच्छी नस्ल की गाय भैंस व हजारों की तादात मे पडिंया भैंस हरियाणा पंजाब बुलन्द शहर इत्यादि स्थानो से बंजारे विक्री को लाये है ।

मेले मे आये श्रद्वालु पवित्र अभरन सरोवर मे डुबकी लगाकर बडे बाबा की समाधि पर परसाद चढाकर मनवाॅछित फलो की प्राप्ति की कामना करने के पश्चात बरदाही बाजार को गुलजार किये है ।

नवाब चौधरीने आज ही बच्चा देने वाले गाय के बाबत बताया 15 लीटर दूध और 80 हजार रूपये गाय की कीमत बतायी । पडिंया व भैंसे भी जातुक व बनावट तथा दूध के हिसाब से बंजारे उनका मूल्य बता रहे है दर्जनो छोटी पडिंया व गाय भैंसो की विक्री हुयी ।


मेला की सुरक्षा ब्यवस्था मे डेढ सेक्सन पी ए सी फायर विग्रेड के अलावा अन्य थानो के 6 उपनिरीक्षक 34 सिपाही 10 होमगार्ड चौकीदार व आधा दर्जन महिला कान्सटेविल को मन्दिर मे जिस और महिलाये परसाद चढाती है उस दरवाजे पर चैन सूनेचिंग की घटनाये न हो के लिये डयूटी लगायी गयी है ।

मन्दिर परिसर की निगरानी सी सी टी वी कैमरों से भी होगी । कास्टमेटिक की दुकानो विसात खाना अभरन सरोवर व बैरीकेटिंगों पर पुलिस चौकीदार आदि की डयूटी लगायी गयी है ।


विगत वर्ष से अधिक मेला होने की सम्भावना है किन्तु मेला रूक नही रहा है लोग आते है परसाद चढाने के बाद खरीद दारी करने के पश्चात वापस भी जा रहे है ।मेला से एक दिन पहले ही 50 हजार से अधिक भक्त बडे बाबा के दर्शन पूॅजन अर्चन के बाद घरो को वापस चले गये जिसका मुख्य कारण धान की कटाई का कार्य भी युद्व स्तर पर चल रहा है ।


महन्त विशालदास सोनी दास संजय दास राजेश दास नीरजदास अविदास अतुलदास अनूपदास उमेन्द्र दास महन्त कमलेशदास खुटपुट दास आदि के दरबारों मे भारी भीड है । सुदूर अंचल से आये हजारों सत्यनामी भक्त महन्तो से धागा धारण कर दीक्षा भी ले रहे है । मेले मे बडी तादात मे छत्तीस गढ पंजाब से बडी तादात मे लोग पधारे है ।


अल्लाह अलख एकै अहै दूजा नाही कोय ।
जगजीवन दास साॅची कहैं सोय बैकुण्ठय जाय ।।
हिन्दु मुस्लिम एकता के प्रतीक सत्यनामी धाम मे सभी जाति धर्मो के अनुयायी है ।बाबा जगजीवन दास व ईरान से भारत आये मलामत शाह की मित्रता हिन्दु मुस्लिम एकता पर बल देती है ।

दोनो सन्तों के अनुयायियों की उनकी श्रद्वा व भाव के आधार पर मनोकामनायें अवस्य पूर्ण होती है ।आज से 350 वर्ष पूर्व समर्थ साहेब जगजीवन दास का जन्म चन्देल वंशी ठाकुर साहेब गंगाराम की पत्नी माॅ कमलादेवी के गर्भ से हुआ था ।

बाल्यकालसे ही जगजीवन साहेब अध्यात्म गुरू गन्थ्रों आदि मे निपुण थे इनके गुरू विशेश्वरपुरी गुरसडी गोण्डा ने इनकी निपुणता का बखान किया वह साहब समर्थ हैं ।यह बात गुरूदीक्षा के दौरान कही थी ।कोटवाधाम जगजीवन दास साहेब की तपोस्थली है यंही कोटक वन मे तपस्या करके श्री सत्यनाम को पूरे देश मे चार पावा चौदह गददी छत्तीस महन्त छियासी सुमिरिणी भजना नन्दी के माध्यम से पूरे भारत मे श्रीसत्यनाम का पताका फहराते हुये ।

सत्य के पथ पर चलकर मोक्ष प्राप्ति के मार्ग को शुगम बताया । ऐसे महान संत जगन्नाथ पुरी के अवतार बडे बाबा के कार्तिक पूर्णिमा के मेले मे आये सत्यनामी परिवार का स्वागत भी किया जा रहा है ।

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