प्रतिबंधित हरे पेडो के कटान में जनपद बाराबंकी में रामसनेहीघाट अव्वल

प्रतिबंधित हरे पेडो के कटान में जनपद बाराबंकी में रामसनेहीघाट अव्वल

जिला ब्यूरो चीफ प्रवीण तिवारी के साथ शिवशंकर तिवारी की रिपोर्ट

रामसनेहीघाट बाराबंकी


पेड़ बचाओ पेड़ बचाओ यह लाईने सिर्फ वन विभाग के बोर्डों पर उपदेश जनता को देने के लिए छपे हुए हैं। जनता भले ही हरियाली को बचाने और इनके उपदेशों को ध्यान में रखकर फल की चाहत में पेड़ लगाता है,

लेकिन खुद के लिखे गए उपदेशों पर वन महकमा कितना खरा उतरकर हरियाली बचाता है उसकी बानगी सिर्फ क्षेत्र की कटानो से मिट रही हरियाली को देखने से ही लगाया जा सकता है।


मालूम हो कि जिस प्रकार से हरे पेडो पर आरे चल रहे उससे तो सहज ही अन्दाजा लगाया जा सकता है कि अगर इस पर पूर्णतः प्रतिबंध न लगाया गया तो जल्द ही लोग इसे भी रेगिस्तान की उपाधि देने से नही हिचकिचायेगें लोग कहते है कि रेगिस्तान में पेड नही है बल्कि कहा यह जाना चाहिए कि जहां पेड नही होते है वहां रेगिस्तान होता है।

वन विभाग द्वारा वन सप्ताह माह में रोपे जाने वाले पौधे पेड़ का रूप भी नही ले पाते की उससे बड़ी तादाद में हरियाली इन वन विभाग के जिम्मेदारों की लापरवाही और वन माफियाओं से जुगलबन्दी मिटा डालती है।

अगर सूत्रों की माने तो एक नही माह भर में सैकड़ों हरे प्रतिबंधित पेड़ों की बलि चढ़ा दी जाती है। समारोहों में बड़ी बड़ी डींग पर्यावरण को बचाने के लिए पेड़ो के बचाव में हाँकी जाती।

हरियाली लाने और बचाने के लिए घोषणाएं होती है, वादे होते है, लेकिन वन महकमें के अफसरों के इरादे चंद पैसों के लिए कितने खराब होते हैं यह लोग उनकी हाँकी जा रही डींग के सामने सोंचने में दिमाग नही लगाते है।

लेकिन बाद में जब हरियाली पर आरे चलते हैं तो अफसरों के वादे और हरियाली मिटवाने के बुलंद इरादे साफ दिखाई पड़ते हैं। पेड काटने वाले लोग वन विभाग के हल्का दरोगा के रहमोकरम पर हरियाली मिटाने से बाज नही आते है।

कार्रवाही के नाम पर पहले से योजना बद्ध सिर्फ केस काटने कि कार्यवाही होती है। अगर मामला ऊपर तक पंहुचा तो मुकदमा दर्ज किया जाता है। अगर हरे प्रतिबंधित पेड़ो कि कटान के मामले को लेकर पुलिस व वन महकमा काफी गंभीर है तो कटान पर लगाम क्यों नही लगता है।

आएं दिन पेड़ो की कटान हो रही। छूट की नही प्रतिबंधित पेड़ो पर आरे चलते हैं। वनरेंज के हाईवे से सटे गांवों में जमकर पेड़ काटे जा रहे हैं। हफ्ते महीने छः माह में भी कड़ी कारवाही माफियों पर होती रहे तो कटान पर काफी हद तक रोक लग सकती हैं। लेकिन ऐसा सम्भव नही है।

एक तरफ हरियाली बचाने की अपील की जाती दूसरी ओर माफियाओं को हरे पेड़ की कटान के बाद सरकारी झंझट से बचने की जुगत भी बताते हैं। सूत्रों की माने तो इतना ही नही कार्यवाही भी उन्ही माफियाओं पर होती है जो कटान करने से पहले विभागीय अधिकारियों से सलाह तक नही लेते हैं।

लगातार हरे पेड़ काटने की वारदातें हो रही है। दिन के उजाले से लेकर रात के अँधेरे में पेड़ काटे जा रहे हैं। आए दिन कट रहे प्रतिबंधित पेड़ों पर विभाग केवल दिखावे भर को गंभीर हैं। कटान पर कटान हो रहे हैं। इसके बाद भी वन रेंज अधिकारी मौन साधे हुए तमाश बीन बने हुए है।

क्षेत्र में चौरी अलादासपुर, भेंदुवा, रजई का पुरवा, महुलारा, भानपुर, थोरथिया, जमोली सहित तमाम ऐसे स्थान है जहां पर वन विभाग से साठगांठ कर प्रतिबंधित हरे पेडो पर आरे चलाकर हरियाली की बली चढाई जा चुकी है।

वन क्षेत्राधिकारी रमेश चन्द्र यादव की तैनाती के बाद से हो रही कटानो पर कार्यवाही जरूर की जा रही है लेकिन अधिकतर कटानो की सूचना केवल क्षेत्रीय वन कर्मी तक ही सीमित रहती है जिसकी जानकारी उन्हे नही हो पाती है।
 

उच्च अधिकारियों का निर्देश भी नही मानते वन विभाग के अधिकारी

गत वर्ष मुख्य वन सरक्षक ने रामसनेहीघाट में हो रही अवैध कटान की खबरो को संज्ञान लेते हुए कटान पर प्रतिबंध लगाने के निर्देश दिये थे लेकिन उनके हस्तक्षेप के बावजूद क्षेत्र मे हरे पेडो की अवैध कटान का सिलसिला थमने का नाम नही ले रहा,

बल्कि मुख्य वन संरक्षक के निर्देश को लकडी माफियाओ ने ठेगां दिखाते विभागीय सांठ गांठ से क्षेत्र मे वन माफिया रात दिन पेडो की कटान करके हरियाली नष्ट कर रहे है लेकिन विभाग कार्यवाही करने तक ही सीमित है।

सूत्र बताते है कि लकडी माफिया बगैर वनविभाग के कर्मियो से मिले पेड की कौन कहे एक डाल भी नही काटते है इस बात की तस्दीक इससे भी हो जाती कि ग्रामीणो की सूचना के बावजूद भी वनकर्मी मौके पर नही पहुचते है। मामला खुलने पर लकडी उठा ले गये माफियाओ पर मामली जुमाना लगाकर खानापूर्ति कर दी जाती है।


परमिट लेने से अच्छा है जुर्माना भरना

लकडी से जुडे कारोबारी बताते है कि पेड की परमिट लेने के बजाय चोरी से पेड कटाने व मामला खुलने पर जुर्माना भर देना ठीक रहता है उन लोगो के मुताबिक परमिट लेने के लिये वनकर्मियो से पेड के सूखा होने की रिर्पोट लगवाने के लिये खर्चा देने के साथ ही तमाम फारमेल्टी करनी पडती है

जिसमे काफी समय भी लग जाता है इससे बेहतर रहता है कि कर्मियो से मिलकर अवैध ढग से पेड कटवा कर लकडी उठवा लेते है यह कर्मी उन्हे लकडी उठवा ले जाने तक की छूट देते है ग्रामीणो की सूचना को यह नजरन्दाज कर देते है मामला बढने पर मामूली जुर्माना अदा करवा कर इन्हे हरियाली मिटाने की छूट दे दी जाती है।

हरे पेडों के कटान के संबंध में क्या बोले जिम्मेदार

इस संबंध में जब वन क्षेत्राधिकारी रमेश चन्द्र यादव से बात की गई तो उन्होने बताया कि इस समय स्टाफ की कमी है जिसके चलते पूरे क्षेत्र का भ्रमण नही हो पा रहा है,

उन्होने कहा है कि अगर कही से भी अवैध पेड काटने की सूचना मिलती है तो तत्काल विभागीय कर्मचारियों को भेजकर कार्यवाई करवाई जाती है,

उन्होने अबतक की कटानो के बारे में बताया कि पिछले एक सप्ताह में हुई कटानो के मामले में कार्यवाई की जा चुकी है।

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