बदला शहर का नाम बदला लेकिन नहीं बदला निजाम ‌उत्तर प्रदेश लोकसेवा आयोग की भर्तियों में जमकर धांधली

बदला शहर का नाम बदला लेकिन नहीं बदला निजाम  ‌उत्तर प्रदेश लोकसेवा आयोग की भर्तियों में जमकर धांधली
‌उत्तर प्रदेश लोकसेवा आयोग की भर्तियों में धांधली।  
                 स्वतंत्र प्रभात
प्रयागराज                
 

  भाई-भतीजा वाद, आर्थिक भ्रष्टाचार जैसे तमाम आरोपों को लेकर तीन-चार साल पहले छात्रों ने सड़कों पर जमकर पसीना और ख़ून दोनों बहाया था.


उनके इस आंदोलन में आज की सरकार में शामिल दलों के कई नेता भी शामिल थे. छात्रों का ये आक्रोश राज्य में सरकार बदलने में तो क़ामयाब रहा लेकिन छात्र जिस अव्यवस्था को लेकर सड़क पर उतरे थे, उसी को लेकर एक बार फिर उन्हें वही रास्ता अख़्तियार करना पड़ रहा है.


प्रयागराज स्थित यूपी लोकसेवा आयोग एक बार फिर अखाड़ा बना हुआ है. भीषण गर्मी और तपिश में छात्र आयोग में कथित भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ आंदोलन कर रहे हैं तो पुलिस उन्हें वहां से खदेड़ रही है.
आयोग की परीक्षा नियंत्रक अंजू कटियार की गिरफ़्तारी के बाद आयोग ने एक विज्ञप्ति जारी करके अगले छह महीने में होने वाली सभी परीक्षाएं रद्द कर दी हैं. इनमें पीसीएस 2018 की मुख्य परीक्षा भी शामिल है जो 17 जून से होने वाली थी.

आयोग ने परीक्षाएं क्यों रद्द कीं, इसके बारे में आयोग का कोई भी अधिकारी कुछ भी बताने को तैयार नहीं है. लेकिन एसटीएफ़ की कथित मनमानी का आरोप लगाते हुए आयोग के धरनारत कर्मचारी कहते हैं, "एसटीएफ़ ने ऐसी स्थिति उत्पन्न कर दी है कि आयोग अगले छह महीने तक कोई भी परीक्षा कराने की स्थिति में ही नहीं है. जिसे मन कर रहा है  गिरफ़्तार कर लिया जा रहा है."


दरअसल, यूपी पुलिस की एसटीएफ़ से कोलकाता पुलिस ने संपर्क किया था और उन्होंने शिक्षक परीक्षा में पेपर के लीक होने संबंधी जानकारी दी थी. कोलकाता पुलिस ने जिस प्रिंटिंग प्रेस के प्रतिनिधि को पकड़ा था उसने यूपी पीएससी की परीक्षा नियंत्रक अंजू कटियार का नाम लिया और उसी के आधार पर एसटीएफ़ ने अंजू कटियार को गिरफ़्तार किया. हालांकि अपनी गिरफ़्तारी के बाद अंजू कटियार ने कहा था कि उनके ख़िलाफ़ ये साज़िश है और वो किसी भी अनियमितता में शामिल नहीं हैं


दरअसल, लोकसेवा आयोग में साल 2012 से लेकर 2017 के बीच की सभी भर्तियों की सीबीआई जांच जनवरी 2018 से ही शुरू है. लेकिन इस मामले में अभी एक-दो एफ़आईआर को छोड़कर आगे कोई कार्रवाई नहीं हुई है. हालांकि राज्य के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आयोग में चल रही कथित धांधली के संदर्भ में रविवार को कहा कि 'गिरफ़्तारियां पिछली सरकार के कचड़े को साफ़ करने की कोशिशों का नमूना है' लेकिन

दो दिन पहले आयोग के बाहर धरना दे रहे तमाम छात्रों पर पुलिस और सुरक्षा बलों के जवानों ने लाठियां बरसाईं और उन्हें वहां से भगा दिया गया. बावजूद इसके, प्रतियोगी छात्र आंदोलन  कर  रहे हैं. तीन साल पहले आयोग की नियुक्तियों में धांधली के ख़िलाफ़ चले छात्र आंदोलन का हिस्सा रहे प्रतियोगी छात्र संतोष पांडेय बताते हैं कि आयोग में अवैध तरीक़े से भर्तियों का सिलसिला 2013 से ही चल रहा है और अभी तक जारी है.

उनके मुताबिक़, " यह व्यवस्था इतनी पक्षपातपूर्ण और ग़ैर संवैधानिक थी कि बाद में सरकार ने ख़ुद वापस ले लिया. उसके बाद भर्तियों में भ्रष्टाचार के मामले उजागर होने लगे. पूर्व अध्यक्ष अनिल यादव की नियुक्ति प्रक्रिया और उनकी योग्यता को छात्रों ने कोर्ट में चुनौती दी. बाद में हाईकोर्ट के आदेश पर सरकार को उन्हें हटाना पड़ा. बीजेपी सरकार ने आते ही 2012 से 2017 तक की नियुक्तियों की सीबीआई जांच की संस्तुति कर दी लेकिन आयोग में जारी अनियमितता अभी भी बरकरार है।
अन्य छात्र भी कहते हैं कि नई सरकार के आने के बाद एसटीएफ़ ने कुछ मामले दर्ज करके आयोग के लोगों के ख़िलाफ़ कार्रवाई ज़रूर की गई लेकिन आयोग में धांधली बदस्तूर जारी है. छात्रों का आरोप है कि साल 2015 में चले छात्र आंदोलन में मौजूदा उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और बीजेपी के कई नेताओं ने भी अपना समर्थन दिया था, ख़ुद प्रधानमंत्री ने चुनावी सभाओं में इनकी चर्चा की थी लेकिन सरकार बनने के बाद अब तक कोई ठोस कार्रवाई होती नहीं दिखी ।

एक अन्य प्रतियोगी छात्र सौरभ राय कहते हैं, "नई सरकार बनने के बाद भी तो पीसीएस 2015 की प्रारंभिक परीक्षा का पेपर आउट हो गया. इसके अलावा कई अन्य परीक्षाओं के पेपर आउट हुए. पीसीएस 2017 की मुख्य परीक्षा के निबंध का पेपर आउट हुआ. और ताज़ा मामला पीसीएस 2018 की मुख्य परीक्षा का पेपर भी आउट होने वाला था जो परीक्षा नियंत्रक और अन्य गिरफ़्तारियों के बाद उजागर हो गया."

प्रयागराज में वरिष्ठ पत्रकार जयप्रकाश सिंह बताते हैं कि पिछले क़रीब छह-सात साल से लोकसेवा आयोग की ऐसी शायद ही कोई परीक्षा रही हो जो विवादों में न रही है और विवादों से नाता अभी भी नहीं छूट रहा है. वो कहते हैं, "ताज़ा मामला आयोग में एलटी ग्रेड शिक्षकों की भर्ती का है. यह मामला क़रीब दस हज़ार पदों पर भर्ती के लिए 29 जुलाई 2018 को कराई गई परीक्षा से एक दिन पहले पेपर आउट होने का है, जिस विवाद में आयोग की परीक्षा नियंत्रक अंजू कटियार आ गई हैं. एसटीएफ़ ने नौ लोगों के ख़िलाफ़ केस दर्ज किया है. आरोप हैं कि हल किए गए पेपर लाखों रुपये में बेचे गए."फ़िलहाल अंजू कटियार को पुलिस ने गिरफ़्तार करके जेल भेज दिया है.

प्रतियोगी छात्र अशोक  बताते हैं, "आयोग की इसी कार्यप्रणाली के चलते दर्जनों परिणाम अब तक रुके हुए हैं. कई परीक्षाओं की प्रक्रिया ही पूरी नहीं हुई है . लोगों को सुनकर आश्चर्य हो सकता है कि लोकसेवा आयोग में कुछ ऐसी परीक्षाएं भी हैं जिनकी प्रक्रिया 2013 में शुरू हुई थीं लेकिन उनके अंतिम परिणाम आज तक नहीं आ सके हैं.

आयोग में जो कुछ भी हो रहा है, उसके कारण आयोग की प्रतिष्ठा तो धूमिल हो ही रही है, छात्रों का जीवन भी बर्बाद हो रहा है और व्यवस्था पर से विश्वास हिल रहा है. सालों से घरों के भीतर क़ैद होकर हम लोग इतनी मेहनत से पढ़ते हैं और बाद में पता चलता है कि चयन ऐसे लोगों का हो गया जो कहीं से भी उसके योग्य नहीं थे. ऐसी स्थिति में परिश्रमी और होनहार छात्रों पर क्या गुज़रती होगी और इस तरह से चयनित लोग जब प्रशासन में जाएंगे तो वो क्या काम करेंगे."

वहीं परीक्षा नियंत्रक अंजू कटियार की गिरफ़्तारी के बाद लोकसेवा आयोग के कर्मचारी भी विरोध पर उतर आए हैं. आयोग के कर्मचारी भी आयोग के भीतर धरना दे रहे हैं और एसटीएफ़ की कार्यशैली पर सवाल उठा रहे हैं. इस बीच इस मामले पर राजनीतिक बयानबाज़ी भी तेज़ हो गई है. कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने ट्वीट करके योगी सरकार पर निशाना साधा था तो बीजेपी प्रवक्ता शलभमणि त्रिपाठी इसके लिए पिछली सरकार को दोष देते है।


प्रयागराज से दया शंकर त्रिपाठी की रिपोर्ट।

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