पत्रकार पर हुआ जानलेवा हमला,नहीं दर्ज हुई रिपोर्ट

पत्रकार पर हुआ जानलेवा  हमला,नहीं दर्ज हुई रिपोर्ट

पत्रकार पर हुआ जानलेवा  हमला,नहीं दर्ज हुई रिपोर्ट


•"रक्षक ही बन बैठे भक्षक" गुंडों की हुई जीत... 

• पुलिस ने दिया पुलिस वाले का साथ 

• बेघर हो गयी पीड़िता सविता, 

 बीजेपी सरकार के महिला सशक्तिकरण के सारे दावे हुए फेल ?

लखनऊ:-

राजधानी लखनऊ के बी०ब्लाक इंदिरा नगर मकान संख्या- 2492 में पति पत्नी के बीच चल रहे कोर्ट में लंबित मुकदमे के बावजूद मकान में अवैध कब्जे के मामले में कवरेज करने के दौरान पत्रकार विजय गुप्ता से दबंगों ने हाथापाई कर कपड़े फाड़े और मोबाइल लूटने की कोशिश किया।

जिसकी सूचना पत्रकार विजय गुप्ता ने अपनी जान बचाते हुए भाग कर पास में ही छुपकर वहां से एसएसपी कार्यालय, सीओ गाजीपुर, एसओ गाजीपुर एवं 100 नo डायल कर मदद मांगी, इस बीच टिंकू ने भी मोबाइल में मारपीट एवं ताला तोड़ने की वीडियो बना लिया था, जिसपर दबंगों ने मिलकर उसका मोबाइल ही छीन लियाI 

इस पूरी घटना को पड़ोस में लगे सीसीटीवी ने कैद अवश्य किया होगा, गाजीपुर थाने पहुंचकर पत्रकार विजय गुप्ता ने उनके साथ हुई बर्बरता पूर्वक घटना की तहरीर एसओ गाजीपुर ब्रजेश सिंह को दी, जिन्होंने इस पर मुकदमा लिखने का आश्वाशन दिया, लेकिन देर रात एफआईआर ना लिखी जाने पर पुनः  गुप्ता ने एसओ गाजीपुर ब्रजेश सिंह से संपर्क साधा, जिन्होंने सीसीटीवी में कैद वीडियो की पहले जांच कर एफआईआर दर्ज करने की बात कही I 

क्या था पूरा मामला......

दरअसल रविवार 19 मई को जब पीड़िता अपने वकील से मिलने गई तो एक पडोसी को घर के अंदर देखभाल के लिए छोड़ गई, लेकिन कुछ समय बाद ही पीड़िता के अनुसार सीओ आफिस गोमती नगर में तैनात उमेश, उसकी पत्नी देवंती, उमर अब्दुला, अकरम, अविनाश सहित कई महिलाओं एवं पुरुषों ने पीड़िता के घर पर धावा बोल दिया और ताला तोड़ा जाने लगा,

घटना स्थल पर पीड़िता सविता के पहुंचने पर इन लोगों ने मिलकर घर के अंदर मौजूद टिंकू एवं वहां पहुंची सविता से मारपीट शुरू कर दिया, वहीं मौके पर मौजूद पत्रकार विजय गुप्ता ने जब मारपीट की फोटो और वीडियो बनाना शुरू किया तो इन लोगों के साथ आये दबंगों ने विजय गुप्ता से मोबाइल छीनने की कोशिश किया, और ना छीन पाने पर मारपीट के उद्देश्य से उनके कपड़े ही फाड़ डाले।

 आपको बताते चलें कि इंदिरानगर निवासी सविता को कई वर्षों से कोर्ट में विवादित पड़े अपने ही मकान से निकालने में आखिरकार गोमती नगर सीओ आफिस में तैनात पुलिसकर्मी उमेश के पक्ष से गुंडागर्दी पर उतरे लोग पड़े भारी, कल रविवार को जब पीड़िता अपने वकील से बीते शनिवार की घटना पर पुलिस को दी हुई तहरीर के बाद भी एफआईआर दर्ज ना करने और ना ही पीड़िता का मेडिकल करवाने के लिए पत्र लिखवाने गई थी,

वहां मौजूद पत्रकार विजय गुप्ता वकील  से बातचीत कर इस मामले में विधिक कार्यवाही के बारे में जानकारी ले ही रहे थे कि पीड़िता के पास उसके घर का ताला तोड़ने की सूचना मिली, पीड़िता के घर से निकलते ही कुछ अराजक तत्व पुलिसिया शह पर वहां अपने ताले लगा जाते थे, जिससे पीड़िता अपने घर में ना घुस सके I 

अब पुलिस द्वारा पीड़िता पर लिखित में घर खाली कर छोड़ने का दबाव बनाया जा रहा हैI जबकि सविता सिंह के वकील निर्भय सिंह के मुताबिक कोर्ट द्वारा अभी तक कोई भी आदेश मकान खाली करने का जारी नहीं हुआ है। फिर भी पुलिस प्रशासन की शह पर दबंगों द्वारा दबंगई कर अवैध रूप से महिला को घर से बेघर किया गया है।

कितने अवैध कब्जे पुलिस हटवाती है यह सभी जानते हैं। और जहाँ स्वयं के घर में महिला रह रही हो और केस न्यायालय में लंबित हो, वहां पुलिस का दबाव आखिर क्यों, न्यायालय के फैसले का इन्तजार आखिर क्यों नहीं, क्योंकि मकान खरीदने वाला एक पुलिस कर्मी है ?
कहाँ गए एक देश एक कानून कहने वाले लोग ?

   देखने वाली बात यह होगी कि क्या 24 घंटे के अंदर पत्रकार पर हमला करने वाले व्यक्तियों पर लगेगा 50 हजार का जुर्माना या होगी 03 साल की सजा, या सारी बयानबाजी जुमला ही साबित होगी ?

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