राधे राधे बोल, राधे राधे बोल

राधे राधे बोल, राधे राधे बोल

                  लेखक मान सिंह नेगी 

 राधे राधे बोल, राधे राधे बोल।

 मनमंदिर की आंखें खोल।

 राधे राधे बोल, राधे राधे बोल।

 

 जिस जिह्वा ने राधे रूपी धन कमाया।

 जिस मुख ने राधे रूपी रत्न कमाया।

 उस जिह्वा को,

 उस  रसना को,

 राधे ने अपना भक्त बनाया।

राधे राधे बोल, राधे राधे बोल।

राधे राधे बोल, राधे राधे बोल।

 दिव्य ज्ञान

 प्रकाश पुंज के पट खोल।

राधे राधे बोल, राधे राधे बोल ।

 

राधे राधे बोल, राधे राधे बोल।

 मानुष तन पाकर।

 जीवन व्यर्थ यू ना गँवा।

 आया जिस प्रयोजन से,

 उस पर ध्यान लगा।

राधे राधे बोल, राधे राधे बोल।

 राधे राधे बोल, राधे राधे बोल।

 तन पर लगे हर पीड़ा को,

 दर्द से उबरने के लिए,

 अपनी इच्छाओं को लेकर ,

  राधे रूपी सरोवर में डुबकी लगा।

 राधे राधे बोल, राधे राधे बोल।

 राधे राधे बोल, राधे राधे बोल।

इतिश्री

 

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