अनाधिकृत डेन डिश टीवी, सिक्का ब्रॉड बैंड, बीएसएनएल एवं अन्य ब्रॉड बैंड केबिलों के मकड़जाल में लगी आग

अनाधिकृत डेन डिश टीवी, सिक्का ब्रॉड बैंड, बीएसएनएल एवं अन्य ब्रॉड बैंड केबिलों के मकड़जाल में लगी आग

अनाधिकृत डेन डिश टीवी, सिक्का ब्रॉड बैंड, बीएसएनएल एवं अन्य ब्रॉड बैंड केबिलों के मकड़जाल में लगी आग


भीषण गर्मी में परसों रात क्षेत्र की रात भर विद्युत् आपूर्ति बाधित एवं इस क्षेत्र के बीएसएनएल के लैंडलाइन फ़ोन एवं ब्रॉड बैंड सेवा परसों से आज तक ध्वस्त I

शिवाजीपुरम, सेक्टर-14, इंदिरा नगर में बिजली के खम्भों पर फैला अनाधिकृत डेन डिश टीवी, सिक्का ब्रॉड बैंड, बीएसएनएल एवं अन्य ब्रॉड बैंड केबिलों के मकड़जाल में लगी आग I पूरे शहर में विद्युत् विभाग एवं नगर निगम की मिली भगत से फैला है यह वर्षों पुराना तारों का अनाधिकृत मकड़जाल ?

ढ़ाई साल पहले विजय गुप्ता (सामाजिक कार्यकर्ता) ने उठाया था यह मुद्दा 16 जनवरी 2017 को, जिसको प्रमुख समाचार पत्रों ने 17 जनवरी 2017 को प्रकाशित भी किया था, लेकिन आजतक विद्युत् विभाग एवं नगर निगम नहीं जागा I 

इसी क्रम में परसों रात शिवाजीपुरम, इंदिरा नगर के गेट के पास ओवरलोडेड बिजली की एबीसी केबल ने आग पकड़ ली, पूरी रात इलाके के लोग बिजली की आपूर्ति की आवक-जावक से परेशान रहे और इन बिजली के खम्भों पर दौड़ रही अवैध डेन डिश टीवी, सिक्का ब्रॉड बैंड, बीएसएनएल एवं अन्य ब्रॉड बैंड केबल ने आग में घी का काम किया और यह भी जल कर राख हो गयी, जिससे भीषण गर्मी में क्षेत्र की रात भर विद्युत् आपूर्ति बाधित रही एवं इस क्षेत्र के बीएसएनएल के लैंडलाइन फ़ोन एवं ब्रॉड बैंड सेवा परसों से ही ध्वस्त पड़े हैं I 


जबकि वास्तविकता में इससे लोगों की सुरक्षा खतरे में है, इसी कारण वर्ष 2010 में इंदिरा नगर में केबल टीवी के तार में करंट उतर आने से एक युवा दम्पति की मौत भी हो गयी थी I

10 जनवरी 2018 को प्रकाशित खबर के अनुसार श्री अशोक कुमार, तत्कालीन मुख्य अभियन्ता (सिस गोमती) द्वारा यह कहकर कि... 
"ज्यादातर ऑपरेटर अवैध और मनमाने ढंग से बिजली नेटवर्क का इस्तेमाल कर रहे हैं, इससे लोगों की सुरक्षा खतरे में पड़ गयी है, और केबल टीवी/इंटरनेट/टेलीफोन संचालक परेड मार्ग से अपने अनाधिकृत केबल/तार हटा लें, अन्यथा तीन दिनों के बाद लेसा टीम हटा देगी"

तब भी मेरा एक सवाल था कि सिर्फ परेड मार्ग के ही क्यों सम्पूर्ण लखनऊ शहर के केबल/तार हटवाने की बात क्यों नहीं हो रही, क्या सिर्फ परेड मार्ग के लोगों की ही सुरक्षा को खतरा है, बाकी शहर वासियों को नहीं, क्योंकि यह केबल/तार का अनाधिकृत मकड़जाल तो पूरे शहर में फैला है ?

एक और सवाल आज हर ओर बिजली चोरी पर रोक की बात हो रही है, तो क्या इन अवैध डेन डिश टीवी केबिलों के साथ बिजली के खम्भों पर लगें एम्पलीफायर को विद्युत् आपूर्ति कैसे दी जा रही है, क्या यह बिजली चोरी के अंतर्गत नहीं आता, तो क्यों मौन बैठा है विद्युत् विभाग ?

विद्युत् विभाग कहता है कि नगर निगम द्वारा हटने हैं यह अवैध तारों के मकड़जाल, लेकिन बिजली के खम्भों पर लगें एम्पलीफायर को विद्युत् आपूर्ति पर रहता है मौन, करीब 10 साल पूर्व नगर निगम के मार्ग प्रकाश विभाग द्वारा सम्पूर्ण लखनऊ से हटाया गया था यह अनाधिकृत तारों का मकड़जाल I

अब देखना है कि विद्युत् विभाग एवं नगर निगम की मिली भगत से चल रहा यह खेल कब समाप्त होगा ?
कृपया इन तारों के मकड़जाल को सम्पूर्ण शहर से हटवाने की पहल करें I 

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