जब प्रियंका ने चाची मेनका गाधी को रोड शो में किया अभिवादन

जब प्रियंका ने चाची मेनका गाधी को रोड शो में किया अभिवादन

स्वतंत्र प्रभात 

रिपोर्ट अर्जुन शुक्ल सागर

लोकसभा चुनाव में यूपी में सुलतानपुर की सीट भी खूब चर्चा में है। इस सीट पर मुकाबला त्रिकोणीय है। हालांकि क्षेत्र में कई लोग मान रहे हैं कि बीजेपी का पक्ष कुछ मजबूत है। वहीं स्थानीय बीएसपी प्रत्याशी चंद्रभद्र भी मजबूती से मैदान में हैं। 2014 में यह सीट बीजेपी के खाते में आई थी।

सुलतानपुर 

गोमती नदी के किनारे बसे सुलतानपुर लोकसभा सीट पर मुकाबला फिलहाल त्रिकोणीय ही दिख रहा है। इस सीट से केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी इस बार बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ रही हैं। गठबंधन की तरफ से चंद्रभद्र सिंह मैदान में हैं तो कांग्रेस ने अमेठी राजघराने से आने वाले डॉ. संजय सिंह को उतारा है। बता दें कि 2014 में इस सीट पर मेनका गांधी के बेटे वरुण गांधी ने जीत दर्ज की थी। फिलहाल अमेठी विरासत के डा. डा.सजंय सिंह भी मजबूती में है प्रियंका गाधी ने रोड शो में न्याय की लडाई में डां सजंय सिंह को रिकार्ड मतो से जिताने की अपील किया

कादीपुर तहसील के पास की चुनावी हलचल तेज है। यहां चाय की दुकान पर बैठे ओमप्रकाश दुबे से जब चुनावी माहौल की बात हुई तो वह साफ कहते हैं कि यूं तो मामला बीजेपी का है। लेकिन वरुण ने पिछली बार कुछ किया नहीं, इसका खामियाजा मेनका को उठाना पड़ सकता है। वहीं, करीब में बैठे रिजवान अहमद कहते हैं कि जनता नाराजगी में एक बार फिर कांग्रेस की तरफ देख सकती है। 

'मोदीजी के नाम पर सब एकजुट' 

बताते हैं कि इस इलाके में कांग्रेस ने सबसे ज्यादा जोर लगाया है। ऐसे में यहां की स्थितियां उसके पक्ष में हो सकती हैं। वहीं, शहर की तरफ बढ़ते ही स्थितियां कुछ अलग दिखने लगती हैं। शहर में सीताकुंड है। मान्यता है कि वनवास जाते समय माता सीता ने यहां स्नान किया था। इस धार्मिक स्थल के पास डाक विभाग से रिटायर हुए कमलेश तिवारी से मुलाकात हुई। चुनाव के बारे में वह कहते हैं कि यहां न तो मेनका का कुछ है और ना वरुण ने ऐसा काम किया है कि उनके लिए वोट किया जाए। लेकिन लोग मोदीजी के नाम पर एकजुट हैं। 

'जहां सभी कहेंगे, दे देंगे वोट' 

यहीं गोमती उसपार एक गांव है वल्लीपुर। निषाद बहुल इस गांव को वरुण गांधी ने गोद लिया था। इस गांव में जैसे ही दाखिल होते हैं, एक बुजुर्ग महिला मिलती हैं। किसी समय सहारनपुर में रहने वाली राजकुमारी पति की मौत के बाद यहां आकर बस गईं। ग्राम प्रधान ने उनके नाम की सिफारिश की तो उन्हें प्रधानमंत्री आवास मिल गया। वह बताती हैं कि उन्हें शौचालय के लिए पात्र नहीं माना गया। जब उनसे वोट के बारे में पूछा गया तो कहा, 'जहां सभी कहेंगे, वहां वोट दे देंगे।' वह नाम नहीं लेतीं, लेकिन इतना जरूर कहती हैं कि जिसने सिर पर छत दी, उसे भूलेंगे नहीं। 

महिला ने कसा तंज 

इसी गांव में एक महिला ने तंज कसते हुए कहा, बिगहन जमीन है तौ काहे कय मकान, 'नहीं दिहिन और कहिन की तोहार नाम नहीं है।' वोट की बात पर वह कहती हैं, 'मोदीजी तौ दिहिन है। अब वरुण और प्रधान मिलके कुछ मिलय नाहीं दिहिन तौ का करी।' 

चंद्रभद्र सिंह भी मजबूती से लड़ाई में 

उधर, इसौली क्षेत्र में स्थितियां बीएसपी उम्मीदवार (महागठबंधन की तरफ से) चंद्रभद्र सिंह की तरफ दिखती हैं। बल्दीराय इलाके में खेतों में काम कर रहे विनय प्रताप सिंह चुनाव के संदर्भ में कहते हैं कि कोई भी जीतेगा तो क्या फर्क पड़ेगा, अगर यहीं का व्यक्ति जीतेगा तो भले ही कुछ कह सुनकर काम करा लिया जाए। वह कहते है, चंद्रभद्र तो कम से कम यहीं के हैं। यहीं रहेंगे। न तो राजा (डॉ. संजय सिंह, कांग्रेस प्रत्याशी) यहां रहते हैं और ना मेनका मिलेंगी। यहीं से करीब दो किलोमीटर दूर, कटाई कर रहे राम प्रसाद भी साफ तौर पर कहते हैं कि चंद्रभद्र भैया ही ठीक हैं। 

Support to Swatantra Prabhat Media

T & C Privacy

Comments