संक्रमण के कारण होती हैं लिवर की ज़्यादातर बीमारियां

 संक्रमण के कारण होती हैं लिवर की ज़्यादातर बीमारियां


अडवाइज़र एवं मेंटर- 


आर एण्ड डी, एसआरएल डायग्नाॅस्टिक्स

लिवर यानि यकृत पाचन तंत्र से आने वाले खून को छानता है, इसके बाद ही यह खून शरीर के बाकी हिस्सों में पहुंचता है। लिवर रसायनों को डिटाॅक्सीफाय करता है और दवाओं को मैटाबोलाइज़ भी करता है।

अगर लिवर अपना काम ठीक से न कर पाए तो इसका बुरा असर व्यक्ति के पाचन तंत्र एवं अन्य सभी अंगों पर पड़ता है। हालांकि लिवर रोग किसी भी उम्र में व्यक्ति को प्रभावित कर सकते हैं, लेकिन ज़्यादातर मामलों में 40-60 की उम्र के लोग ही लिवर रोगों का शिकार होते हैं,

गौरतलब है कि यह उम्र जीवन की सबसे उत्पादक अवधि होती है। लिवर की ज़्यादातर बीमारियां संक्रमण के कारण होती हैं (जैसे वायरल हेपेटाइटिस), एल्काॅहल, ओबेसिटी (नाॅन-एल्काॅहलिक फैटी लिवर डिज़ीज़) और फाॅल्टी इम्यून सिस्टम (यानि ऑटोइम्यून हेपेटाइटिस)। ये रोग धीरे-धीरे बढ़ते हुए लिवर सिरहोसिस का रूप ले लेते हैं और अंत में लिवर फेलियर तक पहुंच जाते हैं।

भारत में ओबेसिटी यानि मोटापे, शराब के बढ़ते सेवन तथा कुछ मामलों में जीवन की अनहाइजीनिक परिस्थितियों के चलते लिवर रोगों की संख्या तेज़ी से बढ़ रही है। लिवर रोगों के इलाज में सबसे बड़ी बाधा यह है कि इसके लक्षण बहुत देर से दिखाई देते हैं, जिसके चलते रोग का प्रबंधन और इलाज करना मुश्किल हो जाता है। ज़्यादातर बीमारियों की तरह समय पर निदान और रोकथाम के द्वारा स्वस्थ लिवर को सुनिश्चित किया जा सकता है।


भाग्य से लिवर एक महत्वपूर्ण अंग है। लिवर रोगों के लक्षण बहुत देर से दिखाई देते हैं, तब तक लिवर को बहुत अधिक नुकसान पहुंच चुका होता है। लिवर अपने आप को रीजनरेट भी कर सकता है। लिवर ट्रांसप्लान्ट के लिए डोनर के लिवर के छोटे से हिस्से की ही ज़रूरत होती है। यह छोटा सा हिस्सा धीरे-धीरे बढ़ते हुए पूरी तरह से विकसित हो जाता है और सामान्य लिवर के रूप में काम करने लगता है।

हालांकि रोग की रोकथाम के उपाय करना बहुत महत्वपूर्ण है ताकि मरीज़ को ट्रांसप्लान्ट की ज़रूरत ही न पड़े। स्वास्थ्य की नियमित जांच के द्वारा समय पर रोग का निदान कर जल्दी उपचार किया जा सकता है और रोग को अंतिम अवस्था तक पहुंचने से रोका जा सकता है। चिकित्सकीय अनुसंधानों से साफ हो गया है कि गतिहीन जीवन शैली, दवाओं, शराब के सेवन के कारण लिवर रोगों की संभावना बढ़ती है।

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