दीपावली प्रकाश का पर्व समाज को आलोकित करता है:संत श्रीपाल

दीपावली प्रकाश का पर्व समाज को आलोकित करता है:संत श्रीपाल

हरदोई

शिव सत्संग मण्डल के आद्य परमाध्यक्ष संत श्रीपाल ने कहा कि दीपावली प्रकाश उत्‍सव है,जो सत्‍य की जीत व आध्‍यात्मिक अज्ञान को दूर करने का प्रतीक है। यह एक बहुत लोकप्रिय त्‍यौहार है।जो समाज को आलोकित करता है।

 ग्राम पुरवा पिपरिया में गेंदनलाल द्वारा आयोजित दीपोत्सव में उन्होंने कहा कि भारत के सभी त्‍यौहारों में सबसे सुन्‍दर दीवाली प्रकाशोत्‍सव है।जिसमें गलियां दीपकों की पंक्तियों से प्रकाशित की जाती हैं तथा घरों को रंगों व मोमबत्तियों से सजाया जाता है। यह त्‍यौहार दर्शनीय आतिशबाजी और परिवार व मित्रों के साथ विभिन्‍न प्रकार की मिठाइयों के साथ मनाया जाता है।

संत प्रवर ने बताया कि यह प्रकाश पर्व, आतिशबाजी, खुशी व आनन्‍दोत्‍सव दैव शक्तियों की बुराई पर विजय का सूचक है।यह पर्व धन और समृद्धि का प्रतीक हैं।

दक्षिण में, दीपावली त्‍यौहार अक्‍सर नरकासुर, जो असम का एक शक्तिशाली राजा था, और जिसने हजारों निवासियों को कैद कर लिया था, पर विजय की स्‍मृति में मनाया जाता है। ये श्री कृष्‍ण ही थे, जिन्‍होंने अंत में नरकासुर का दमन किया व कैदियों को स्‍वतंत्रता दिलाई। विजयोल्‍लास के साथ ईश्वरीय स्मृति के तिलक को अपने मस्‍तक के अग्रभाग पर लगाते हैं। धर्म-विधि के साथ स्‍नान करते हैं, स्‍वयं पर चन्‍दन का टीका लगाते हैं। मन्दिरों में पूजा अर्चना के बाद फलों व बहुत सी मिठाइयों के साथ बड़े पैमाने पर परिवार का जलपान होता है।

संत ने कहा कि प्रभु ने, समाज के निम्‍न वर्ग के अंधकार को दूर करने के लिए उसे ज्ञान का दीपक प्रदान किया। उसने, उसे यह आशीर्वाद भी दिया कि वह वर्ष में एक बार अपनी जनता के पास अपने एक दीपक से लाखों दीपक जलाने के लिए आएगा ताकि दीवाली की अंधेरों रात को, अज्ञान, लोभ, ईर्ष्‍या, कामना, क्रोध, अहंकार और आलस्‍य के अंधकार को दूर किया जा सके, तथा ज्ञान, वि‍वेक और मित्रता की चमक लाई जा सके। आज भी प्रत्‍येक वर्ष दीवाली के दिन एक दीपक से दूसरा जलाया जाता है, और बिना हवा की रात में स्थिर जलने वाली लौ की भांति संसार को शांति व भाइचारे का संदेश देती है।

इस आध्यात्मिक दीपावली कार्यक्रम में जिला महामंत्री रविलाल, व्यस्थापक यमुना प्रसाद,प्रचारक प्रेम कुमार,हरिश्चंद्र, लालाराम, महेश,रामौतार, पप्पू,समेत आसपास के गांवों के अनेक सत्संगीजन शामिल रहे।इस धार्मिक कार्यक्रम का शुभारंभ,गेंदनलाल ने दीप प्रज्वलित कर सामूहिक ईश प्रार्थना से किया।समापन प्रकाश स्वरुप परमेश्वर का सामूहिक ध्यान करके किया गया।

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