रात कई कहानी कहती है पर चाँद चुप चाप निहारा करता है............

रात कई कहानी कहती है पर चाँद चुप चाप निहारा करता है............

रात की काली प्याली में ; एक चाँद निपट अकेला रहता है ,
टिमटिम तारों की महफ़िल में;उसको जज़्बात छुपाना रहता है,
रात कई कहानी कहती है पर चाँद चुप चाप निहारा करता है ,
तारों संग मदमस्त रात ये पर चाँद जाने किसे पुकारा करता है,
रात की काली प्याली में ; एक चाँद निपट अकेला रहता है ll

है रात अधूरी और ये चाँद अधूरा ; पर तारों की घनी बस्ती में बसेरा रहता है ,
है घिरा लाख तन्हाई में ; पर औरो के लिए ख़्वाबों का पिटारा रखता है ,
बेशक चाँद किसी का ना हो ; पर इश्क़ में डूबा हर ओर इशारा करता है ,
एहसासों से सराबोर है सारी दुनिया , तो चाँद ही क्यूँ बिन बात किनारा करता है ,
रात की काली प्याली में ; एक चाँद निपट अकेला रहता हैll

 

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