आखिर कब बनेगा उच्च प्राथमिक विद्यालय का शौचालय व बाउंड्री वाल 

आखिर कब बनेगा उच्च प्राथमिक विद्यालय का शौचालय व बाउंड्री वाल 

आखिर कब बनेगा उच्च प्राथमिक विद्यालय का शौचालय व बाउंड्री वाल 

कब सुधरेंगे प्राथमिक स्कूलों के शौचालय

बाउंड्री वाल विहीन विद्यालय परिसर बदहाल

जिला संवाददाता नरेश गुप्ता की रिपोर्ट

अटरिया सीतापुर

शिक्षा क्षेत्र अटरिया के अन्तर्गत प्राथमिक विद्यालय नयागांव एक तो बाउंड्री वाल के अभाव का दंश झेल रहा है, वहीं सफाई अभियान की धज्जियां भी उड़ा रहा हैं।

स्वतंत्र भारत के संवादाता ने ग्राम पंचायत टीकौली के उच्च प्राथमिक विद्यालय  विकास क्षेत्र  सिधौली  जनपद सीतापुर का निरीक्षण किया तो उच्च प्राथमिक विद्यालय प्रधानाध्यापिका पारुल अग्रवाल सहायक अध्यापिका प्रतिमा गुप्ता एवं सहायक अध्यापिका सुषमा कुमारी उपस्थित मिली प्रधानाध्यापिका ने बताया विद्यालय में कुल छात्रों की संख्या 46 है जिसमें 27 छात्राएं एवं 19 बालक हैं

जिसमें 16 छात्राएं एवं 9 छात्र उपस्थित रहे इसी के साथ आपको बता दें की इस विद्यालय में शौचालय तो बना है किंतु महज चार दिवारी का एक ढांचा साबित होता है शौचालय के दरवाजे टूट चुके हैं शौचालय में रखी हुई सीटें ही नहीं बीज का पार्टीशन भी खुद ब खुद टूट कर नीचे गिर चुका है उच्च प्राथमिक विद्यालय की प्रधानाध्यापिका पारुल अग्रवाल से  साफ सफाई के बारे में जानकारी ली गई तो उन्होंने बताया कि विद्यालय का शौचालय तो कभी इस्तेमाल ही नहीं हुआ बच्चे खुले में शौच जाने के लिए विवश हैं

साथ ही उन्होंने बताया बच्चों की तो बात छोड़िए विद्यालय का लेडीस स्टॉप भी खुले में शौच को मजबूर है प्रधानाध्यापिका ने बताया की यहां साफ-सफाई के नाम पर विद्यालय पर सफाई कर्मी एक दिन भी कोई झांकने तक नहीं जाता। जहां कई दर्जन बच्चों को शिक्षा दी जाती है। वहीं मीड-डे-मील योजना के तहत बनने वाले भोजन पर भी इस गन्दगी का सीधा असर पड़ता है .

साथ ही साथ प्रधानाध्यापिका ने बताया कि जब से उन्होंने चार्ज लिया है तब से ना तो जर्जर विद्यालय का दुरुस्ती करण हुआ है ना ही शौचालय का किसी प्रकार का दुरुस्ती करण कराया गया है इतना ही नहीं पिछले कई सालों से सफाई कर्मी 1 दिन भी विद्यालय में साफ सफाई करने नहीं आया कई बार ग्राम प्रधान से सफाई कर्मी ना आने की शिकायत की गई अपितु ग्राम प्रधान की उदासीनता के चलते कोई भी निष्कर्ष हाथ नहीं लगा

अटरिया (सीतापुर )।


एक ओर जहां हर वर्ष सरकार प्राथमिक विद्यालयों की साफ-सफाई व शौचालय निर्माण के लिए लाखों रुपए खर्च करती है, वहीं दूसरी तरफ इन शौचालयों की बदहाल ज़मीनी हालत किसी से छिपी नहीं है।
जिला मुख्यालय से लगभग 50 किमी दूर ग्राम पंचायत टिकौली के उच्च प्राथमिक विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चे बताते हैं कि वे स्कूल में बने शौचालय का प्रयोग नहीं करते है। अपनी परेशानियां बताते हुए वो बताते है, "जब हमे स्कूल में शौच के लिए जाना होता है, तो स्कूल की पढ़ाई को छोड़कर खेतो में शौच के लिए जाते हैं। स्कूल में बना शौचालय महज एक कागज की खानापूर्ति है। मैडम कहती हैं कि शौचालय में कोई नहीं जाएगा वह बहुत ही जर्जर हो चुका  है बाहर जाओ।"


सीतापुर जिले में टिकौली के उच्च प्राथमिक विद्यालय के साथ जनपद के अधिकांश प्राथमिक विद्यालयों में बने शौचालयों का भी ये ही हाल है। उत्तर प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में बने प्राथमिक स्कूलों में अधिकाशत: यही हाल देखने को मिलता हैै कि शौचालय तो बन गए है, लेकिन इस्तेमाल करने के लायक नहीं है, क्योंकि कही पर शौचालयों में गंदगी भरी हुई है तो कहीं पर गंदगी न हो इसलिए शौचालयों में ताला पड़ा रहता हैै।


प्राथमिक विद्यालय की सहायक अध्यापिका बताती हैं, "स्कूल में शौचालय बना हुआ है पर कभी शौचालय इस्तेमाल ही नहीं किया गया।"
केन्द्र सरकार ने दो अक्टूबर 2014 को स्वच्छ भारत अभियान शुुरू करने के बाद देश के प्रत्येक स्कूलों में छात्राओं के लिए अलग से शौचालय का निर्माण कराया जाना था, जिससे उनकी पढ़ाई में काई परेशानी न आ सके। लेकिन सरकारी स्कूल के शौचालयों की इस दशा से स्कूली छात्रों को शौचालय जाने में परेशानी हो रही हैं।


सीतापुर जिले के ही उच्च प्राथमिक विद्यालय  में पिछले  कई सालों से शौचालय जर्जर अवस्था में पढ़ा हुआ है   जिसकी तरफ कोई देखने वाला नहीं है। विद्यालय की सहायक अध्यापिका बताती हैं, "विद्यालय में शौचालय की सफाई करने के लिए कोई सफाईकर्मी भी नहीं आता है, इसी कारण व्यवस्था बद से बदतर  है। शौचालय की साफ- सफाई की बात करना ही बेकार है इस विद्यालय की हकीकत बिल्कुल विपरीत है यहां तो बच्चों को शौचालय का इस्तेमाल करना ही नहीं सिखाया जाता।"


वहीं स्कूलों में साफ-सफाई व्यवस्था को लेकर शिक्षा अधिकारी बताते है, "स्कूलों में शौचालय की मरम्मत का कार्य कराया जा रहा है। 98 फीसदी तक स्कूलों में शौचालय निर्माण कार्य सम्पन्न हो चुका है। बच्चों को शौचालय में ही शौच के लिए जाने के लिए जागरूक कराना वहां के अध्यापकों का काम है। किंतु यहां के बच्चों तो शौचालय का उपयोग ही नहीं कर सकते क्योंकि शौचालय नहीं बल्कि जर्जर एक चारदीवारी है संबंधित विभाग एवं सरकार के लागत से बने शौचालयों का रखरखाव ही नहीं किया जाता तो ऐसे में स्वच्छ भारत मिशन का सपना देखना मानो अमावस्या की रात में चांद देखने के बराबर है।

साथ ही चहारदीवारी विहीन स्कूलों में नौनिहाल असुरक्षित

उच्च प्राथमिक विद्यालय में अभी तक बाउंड्री वाल न होने से विद्यालय व बच्चों की सुरक्षा पर प्रश्न चिन्ह लग रहा है। इनमें से कुछ विद्यालय तालाब के किनारे व सड़क पर होने के कारण बच्चों के लिए खतरनाक साबित हो रहे है। यही नही विद्यालय के बंद होते ही इनमें आवारा पशुओं के जमावडे से परिसर गंदगी से पट रहा है। बावजूद इसके विभाग द्वारा अभी तक बाउंड्री वाल बनवाने का कोई प्रयास नही किया जा रहा है।

लेकिन इन विद्यालयों में चहारदीवारी न होने से हर समय मासूमों पर खतरा मंडराता रहता है। शिक्षा के प्रति लोगों में जागरूकता लाने के लिए स्कूल चलो अभियान भी चलाये जाने की रणनीति तैयार है। लेकिन, इन विद्यालयों में पढ़ने वाले मासूम बच्चों की सुरक्षा को लेकर जिम्मेदारों को तनिक भी फिक्र नहीं है।


इसका नतीजा यह हुआ है कि यहां चहारदीवारी न होने के चलते बच्चों पर हर समय खतरा मंडराता रहता है। क्षेत्र के सभी चहारदीवारी विहीन विद्यालय गांवों के संपर्क मार्ग तथा मुख्य मार्गो पर बने हैं। कई ऐसे भी विद्यालय हैं, जो तालाबों, पोखरों तथा नदी के किनारों पर बने हैं। बच्चे अक्सर सड़कों पर ही खेलते-कूदते रहते हैं। आलम यह है कि चहारदीवारी न होने से हर समय दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।

खंड शिक्षा अधिकारी कि माने तो चहारदीवारी का निर्माण गांव की शिक्षा समिति तथा प्रधानाध्यापक मिलकर कराते हैं। इसके लिए शासन द्वारा बजट आवंटित किया जाता है। बजट आते ही सभी विद्यालयों की चहारदीवारी बनवाई जाएगी।’

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