शिक्षा विभाग में हो रहा है छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़

शिक्षा विभाग में हो रहा है छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़

शिक्षा विभाग में हो रहा है छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़


फर्जी दस्तावेजों की शिक्षकों की गयी भर्ती का हुआ भण्डाफोड़


डीएम के आदेश के बाद भी शिक्षकों को पदमुक्त करने की जहमत नहीं उठा रहा विभाग 


ललितपुर। Ravi shankar sen

शिक्षा विभाग में छात्रों के भविष्य के साथ खुला खिलवाड़ हो रहा है। फर्जी दस्तावेजों के साथ शिक्षकों की भर्ती की गयी। साथ ही जाँच में दोषी पाये जाने के बाद भी उनके खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं की जा रही है। जबकि उनके साथ अन्य आवेदकों के साथ भी न्याय नहीं मिल पा रहा है।

बीस साल से अधिक समय पूर्व इस प्रक्रिया में फर्जी तरीके से उर्दू शिक्षकों की भर्ती कर दी गयी। जिसकी शिकायत शासन से न्यायालय तक की गयी। न्यायालय के आदेश बाद भी आवेदकों को न्याय नहीं मिला है। 


उल्लेखनीय है कि शासन के द्वारा वर्ष 1995 में उर्दू भर्ती के आदेश जारी किया गया। शासन द्वारा 124 शिक्षकों की भर्ती का आदेश जारी किया गया। जबकि तत्कालीन डाइट प्राचार्य ने जिलाधिकारी को पत्र लिखकर अवगत कराया कि जनपद में उर्दू शिक्षत आवेदकों की संख्या कम है। इसके बाद जिलाधिकारी के आदेश पर जनपदस्तर पर 58 पद अनुमोदन किया गया। 5 अगस्त 1995 को विज्ञप्ति जारी किया गया। साथ ही 20 अगस्त 1995 को आवेदन लेने की अन्तिम तिथि निर्धारित की गयी।

10 सितम्बर से भर्ती प्रक्रिया प्रारम्भ की गयी। शासनादेशानुसार 30 सितम्बर को प्रक्रिया पूर्ण की जानी थी। नियत तिथि तक 46 शिक्षकों की नियुक्ति की गयी। जिसमें दो शिक्षक आरक्षित वर्ग के शामिल रहे। बाकि बचे पदों को आरक्षित वर्ग के बताते हुये सुरक्षित रखने की बात कही गयी। इसके बाद वर्ष 1996 को बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा 6 शिक्षकों की भर्ती की गयी। इसके बाद 12 आवेदकों ने न्याय के लिए न्यायालय की शरण ली। न्यायालय ने उक्त शिक्षकों को भर्ती प्रक्रिया में शामिल करने के आदेश दिये।

इसके बाद तत्कालीन बेसिक शिक्षा अधिकारी ने शासन को पत्र जारी किया कि चूँकि भर्ती प्रक्रिया को एक वर्ष से अधिक समय हो चुका है, इसलिए अब इन्हें बिना किसी नयी भर्ती के शासनादेश के बगैर शामिल नहीं जा सकता है। शिक्षा विभाग का खेल यही समाप्त नहीं हुआ। मार्च 1997 में शिक्षा विभाग ने 6 उर्दू शिक्षकों भर्ती कर लिया। साथ ही विभिन्न शिकायतों पर शासन को गुमराह करते रहे। जब आवेदकों ने सूचना के अधिकार के तहत शिक्षा विभाग से मार्च 1997 में भर्ती के सम्बन्ध में शासनादेश की माँग की गयी

तो वह ऐसा कोई आदेश नहीं दे पाये। साथ ही वर्ष 1997 में भर्ती शिक्षकों में कई तो ऐसे थे, जिन्होंने वर्ष 1996 में इण्टर उर्दू से उत्र्तीण की, इसलिए पूर्व की भर्ती प्रक्रिया में उनका शामिल होना सिद्ध नहीं होता है। इसकी शिकायत जब जिला प्रशासन से की गयी, तो जिलाधिकारी द्वारा जाँच टीम गठित की गयी। जाँच टीम ने उक्त भर्ती प्रक्रिया को गलत पाते हुये, प्रारम्भिक जाँच के तहत एक शिक्षक अशोक श्रीवास दोषी पाया।

जाँच रिर्पाेट के आधार पर जिलाधिकारी मानवेन्द्र सिंह ने 4 मई 2019 को बेसिक शिक्षा अधिकारी को आदेशित किया कि वह उक्त शिक्षक के सेवा समाप्त करते हुये, उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज करते हुये, पूरी कार्यवाही से 15 दिन के अन्दर अवगत करायें। लेकिन उक्त आदेश के पाँच माह बीत जाने के बाद भी बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा कोई भी कार्यवाही अमल में लायी नहीं गयी है। शिक्षा विभाग में ऐसा एक प्रकरण नहीं है, इसके अलावा भी कई प्रकरण मौजूद हैं। किन्तु फिर विभाग कार्यवाही से कतरा रहा है। 

 

Comments