साहित्य में वो छिपा हुआ है जो आज के लिए अत्यधिक अवश्यक

  साहित्य में वो छिपा हुआ है जो आज के लिए अत्यधिक अवश्यक

-राजेश सारस्वत 

ठियोग, शिमला                                              

साहित्य में वो छिपा हुआ है जो आज के लिए अत्यधिक अवश्यक हो गया है। महाकवियों द्वारा कही गई बातें आज के संदर्भ में बच्चों तक पहुंचाना जरूरी हो गया है। अक्सर ऐसा देखा जाता है कि जब भी व्यक्ति अचानक बिना सोचे विचारे कोई काम करता है

तो उसे नाकामी हासिल होती है, ये बात अलग है कि कभी कबार वह बुलंदी तक पहुंच जाता है। जीवन में अगर सही रास्ते पर चलना है और अपने जीवन को सार्थक बनाना है तो हमें धैर्य की बहुत अधिक आवश्यकता होती है।

यही वह धैर्य है जो मनुष्य को बड़ी - बड़ी विपत्तियों से बचाता है। बहुलता में देखने को मिलता है कि जब कोई व्यक्ति क्रोध में होता है तो वह क्रोध के आवेश में आकर बिना सोचे विचारे ही किसी वस्तु से सामने वाले पर प्रहार कर देता है और फिर कानून का उल्लंघन करने पर कारावास की सजा काटता है।

युवाओं में भी हमे इस धैर्य की झलक बहुत कम देखने को मिलती है। आज युवा बिना कुछ सोचे विचारे संगति में न जाने कैसे कैसे जीवन के उपेक्षित कार्यों को अंजाम देते रहते हैं। कुछ युवा बिना सोचे ही नशीले पदार्थों का सेवन करने को तत्पर हो जाते हैं और इस दलदल में फंसकर अपनी जिंदगी को नरक बना देते हैं।

हमारे संस्कृत साहित्य के महाकवि भारवी ने कहा है कि - सहसा विदधीत न क्रियां   अविवेकः परमापदां पदम्।  बिना सोचे विचारे हमे कोई भी काम नहीं करना चाहिए, ऐसा किया गया काम बहुत बड़ी विपत्ति का कारण भी बन सकता है। 

 

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