स्वच्छता अभियान दिखा ढिला, खुले में शौच को मजबूर

स्वच्छता अभियान दिखा ढिला, खुले में शौच को मजबूर

स्वच्छता अभियान दिखा ढिला, खुले में शौच को मजबूर


राजगढ़ (मिर्जापुर ) देश में स्वच्छता की अलख जगाने वाली केंद्र की मोदी सरकार भले ही प्रदेश के प्रत्येक गांव में ओडीएफ गांव में हुए फर्जीवाड़े की जांच करवा कर सम्बन्धित कर्मचारियों को दंडित कर रही हो, लेकिन स्वच्छता अभियान अभी भी परवान नहीं चढ़ पाया है। विकास खंड राजगढ़ के अधिकारियों का ध्यान सिर्फ अपनी कुर्सी बचाने पर निर्भर हो गया है। क्षेत्र के दर्जनों गांव के ग्रामीण आज भी खुले में शौच जाने को मजबूर हैं ,जमीनी हकीकत अधिक देखना है तो भवानीपुर से सेमरा बरहाे वाली सड़क पर जाकर देखा जा सकता है इस मार्ग पर पैदल चलना तो मुश्किल है गाड़ियों से भी जाना मुश्किल है इस मार्ग पर एक बार जो चला जाता है दोबारा आने का कोशिश नहीं करता है, परन्तु अधिकारी उनके घर शौचालय निर्माण करवाने में अनदेखी कर रहे हैं। बताते चले कि तहसील मुख्यालय सहित क्षेत्र के दर्जनों गांव में स्वच्छता की अलख सिर्फ ब्लॉक के फाइलों में लगाई गई है। लेकिन जमीनी हकीकत देखी जाए तो कर्मचारियों की स्वच्छता अभियान में की जा रही कमीशनखोरी व लापरवाही की पोल खुल सकती है। केंद्र की सरकार करोड़ों रुपए पानी की तरह बहाकर प्रत्येक नागरिकों को शौचालय निर्माण करवाने के लिए प्रेरित कर रही है, लेकिन शीर्ष अधिकारी सिर्फ कागजो में निर्माण की प्रक्रिया निपटा रहे हैं। शासन की शक्ति के बाद जिले के अधिकारियों द्वारा कई टीमें गठित कर शौचालय का निर्माण करवाया जा रहा है। निर्माण कार्य में व्यापक धांधली की जा रही है। ग्रामीणों द्वारा आरोप भी लगाया जा रहा है कि घटिया सामग्री का उपयोग करके शौचालय का निर्माण करवाया जा रहा है। इस जिले के अधिकारियों से कई बार बात की गई लेकिन कर्मचारियों को बचाने के अलावा निर्माण कमीशन खोरी व लापरवाही के लिए कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। शासन की शक्ति का असर जिले के अधिकारियों के ऊपर नहीं दिख रहा है। विकास खंड राजगढ़ के कुछ ग्राम प्रधानों को शौचालय निर्माण का मानक पूरा न करने पर दंडित कर किया गया था, लेकिन बहाल कर दिया गया यह सोचने का विषय बन गया है।

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