सुबह-सुबह क्या करे, क्या न करे, आइये जाने...

सुबह-सुबह क्या करे, क्या न करे, आइये जाने...

सुबह का समय दिन के काम की शुरुआत होती हैं और हर व्यक्ति चाहता है कि उसका दिन अच्छा बीते।

इसके लिये जरूरी है कि हम सुबह कुछ खास बातों का ध्यान रखे । सुबह क्या-क्या करना चाहिये;  क्या-क्या नहीं करना चाहिये। वैसे तो इनमें से अधिकांश बातें ऐसी हैं कि जिन्हें हम दिन-भर या कभी भी नहीं करें तो यह बहुत अच्छा होगा ।

किन्तु, यह हमेशा हर व्यक्ति के लिए संभव नहीं हो पाता है; इसलिए कम-से कम यह निश्चय तो हो ही सकता है कि हम ये काम सुबह (मध्याह्न से पहले) नहीं करेंगे ।

उदास व निराश न रहें


हर सुबह कि शुरुआत नई आशाओं व उत्साह से करना चाहिए । इसके लिए जरूरी है कि कल तक जो भी हुआ हो, उसमें से नकारात्मक बातों को दिल-दिमाग से एक तरफ हटाकर, सकारात्मक बातों पर फोकस करना चाहिए । अर्थात उदासी व निराशा की भावनाओं से उबर कर, मुस्कुराहट, उत्साह, उमंग व नए संकल्प-भाव से दिन की शुरुआत करना चाहिए ।

आलस्य न करें


वैसे तो कहा ही गया है कि सुबह जल्दी (संभव हो तो सूर्योदय से पहले) उठ जाना चाहिए । किन्तु यहाँ हम केवल जल्द सुबह उठने की हिदायत नहीं दे रहे हैं और उसके फ़ायदे भी नहीं बता रहे हैं । यहाँ हमारा आशय यह है कि सुबह जब भी नींद से उठे, तो शीघ्र ही आलस्य और उनींदापन त्याग कर बिस्तर छोड़ दें । कई लोग नींद से जागने के बाद भी बहुत देर तक बिस्तर पर उनींदा पड़े रहते हैं या यों ही बैठे रहते हैं। यह सुबह का बेशकीमती समय नष्ट करने वाली आदत है । सुबह जल्दी से  आलस्य छोड़कर, हाथ-पैरों को कुछ तानकर ( या तड़ासन करके) चुस्ती-फुर्ती को नहीं अपनाययेँगे तो दिन-भर भी आलस्य बना रहेगा ।

क्रोध ना करें


वैसे तो अनावश्यक क्रोध कभी-भी नहीं करना चाहिये; परंतु, सुबह-सुबह किया गया क्रोध तो पूरे दिन को खराब कर देता है । वह ना केवल आपका दिन खराब करता है, जिस पर आप क्रोध करते हैं उसका और जो आपको क्रोध करते देखते हैं उन सबका भी दिन बिगड़ जाता है । आमतौर पर तो केवल वह दिन ही नहीं बिगड़ता है, बल्कि सुबह के क्रोध से आने वाले कई दिन बिगड़ जाते हैं और उन स्थितियों में गलत निर्णय होने से बहुत से काम बिगड़ जाते हैं ।

व्यर्थ विवाद ना करें


वैसे दिन में कभी-भी किसी से वाद-विवाद होना असामान्य बात नहीं है । लेकिन, हमारी कोशिश होनी चाहिए कि ये वाद-विवाद अधिक कटु-कर्कश या गरमा-गरम ना हों । यदि सुबह से ही हम विवादों को टालने या सौम्य, मृदु बनाने का प्रयास करेंगे तो दिन में भी हमारी यही सौम्यता जारी रह सकेगी । दूसरी बात यह कि, सुबह तो प्रायः हम अपने परिजनों या बहुत नज़दीकी लोगों के साथ रहते हैं या कुछ खास काम के लोगों से हमारी बात-चित होती है; इसलिये उनके साथ तो वाद-विवाद टालकर सौजन्य पूर्वक संवाद करेंगे तो यह हर तरह से अच्छा रहेगा ।

ना हड़बड़ाहट करें ना टालने का भाव रखें


कुछ लोग सुबह से ही हड़बड़ाहट करने लगते हैं; उनके मन में दिनभर में बहुत कुछ कर डालने का या खास कामों के समय की पाबंदी का बोझ होता है; परंतु, सुबह से ही की गई हड़बड़ाहट से काम बनते नहीं बिगड़ते हैं । दूसरी ओर, कुछ लोगों के मन में कामों के प्रति ‘दिन पड़ा है, कभी भी कर लेंगे’ ऐसा लापरवाही का भाव होता है । वे पहले तो सुस्ती व लापरवाही में समय गुजरने देते है, फिर या तो हड़बड़ाते हैं या फिर वह काम उस दिन होता ही नहीं ।                           

निराशा, नफ़रत, अपमान आदि वाली नकारात्मक बातें ना करें


सुबह से ही यदि हम किसी से भी निराशा व नफ़रत बढ़ाने वाली, अपमानित करने वाली या किसी भी तरह के नकारात्मक भावों वाली बात करेंगे, तो हमारा दिल-दिमाग भी खराब होगा और सामने वाले का भी । साथ ही ये नकारात्मक भाव पुरे दिन में भी बने रहेंगे । इसलिये, यदि हम सुबह से ही नकारात्मक भावों को छोडकर सकारात्मक भावों को अपना लेंगे तो हम अपना आंतरिक और बाह्य दोनों माहौल अच्छे बनाएँगे ।

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