हाईकोर्ट की डबल बेंच ने केस दर्ज कर निष्पक्ष जांच का एसपी को दिया आदेश*

हाईकोर्ट की डबल बेंच ने केस दर्ज कर निष्पक्ष जांच का एसपी को दिया आदेश*

हाईकोर्ट की डबल बेंच ने केस दर्ज कर निष्पक्ष जांच का एसपी को दिया आदेश

सुलतानपुर

पुलिस अभिरक्षा में हुई अधिवक्ता पिटाई मामले में हाईकोर्ट ने लम्बी सुनवाई के बाद संज्ञान लिया है। हाईकोर्ट की डबल बेंच ने मामले में मुसाफिरखाना कोतवाल समेत अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर तफ्तीश के लिए आदेश दिया है।

पीड़ित अधिवक्ता ने जल्द ही तत्कालीन एसपी-अमेठी समेत अन्य के खिलाफ तहरीर देने की बात कही है। हाईकोर्ट ने इस प्रकरण की डे-बाई-डे मानीटिरिंग के लिए भी एसपी को निर्देशित किया है। 


              मामला मुसाफिरखाना कोतवाली क्षेत्र के ऊंचगांव से जुड़ा है। जहां पर बीते 24 फरवरी को पुलिस के जरिए खनन को लेकर अवैध वसूली का मामला सामने आया था। वसूली को लेकर ग्रामीणों व पुलिस के बीच में विवाद भी हुआ। पुलिसिया कार्यशैली के विरोध में गांव निवासी अधिवक्ता व प्रधान प्रतिनिधि राघवेंद्र द्विवेदी सहित अन्य ने हस्तक्षेप किया तो पुलिस ने उन्हीं के खिलाफ ही मुकदमा दर्ज कर मुल्जिम बना दिया।

जिसके पश्चात अधिवक्ता राघवेंद्र को कुड़वार नाका के पास से पुलिस ने नाटकीय ढंग से गिरफ्तार किया। इस दौरान उन्हें बाजार शुकुल व मुसाफिरखाना थाने ले जाकर मारापीटा गया और उसके बाद बीते 27 फरवरी को पुलिस अधिवक्ता को रिमांड के लिए सीजेएम कोर्ट ले आयी। इस दौरान उनका मेडिकल सामान्य दर्शाते हुए पेश किया गया। अधिवक्ता को काफी चोटें लगी थी,इसलिए अधिवक्ताओं ने विरोध जताते हुए कोर्ट से पुन: मेडिकल कराने की मांग की।

इस बात पर संज्ञान लेते हुए तात्कालीन सीजेएम ने घायल अधिवक्ता का पुन:मेडिकल कराने का आदेश दिया। कोर्ट के आदेश पर पुनः हुए मेडिकल में अधिवक्ता को कई चोटें पायी गयी,जिनकी हालत सामान्य नहीं मिली तो उन्हें इलाज के लिए ट्रामा सेंटर लखनऊ भी रेफर कर दिया गया। कई दिनों तक अधिवक्ता का लखनऊ में इलाज चला। पुलिस की झूठी कहानी का नतीजा भी यह रहा कि इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती होने के दौरान ही अधिवक्ता को बगैर जेल  गये ही जमानत मिल गयी।

उधर मुसाफिरखाना कोतवाल ने अपने को फंसता देख 27 फरवरी की ही नयी कहानी बनाते हुए रिमांड के दौरान हुई घटना की बात कहकर अधिवक्ता राघवेंद्र द्विवेदी व उनके सैकड़ों समर्थकों के खिलाफ अपनी ही कोतवाली में बलवा सहित अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज करवा दिया और तत्कालीन नगर कोतवाल अजय कुमार सिंह पर सूचना के बाद भी एफआईआर दर्ज न करने का आरोप लगाया। पुलिस की इस मनमानी को लेकर अधिवक्ता की पत्नी ने हाईकोर्ट की शरण ली।

जिस पर सुनवाई के पश्चात हाईकोर्ट ने प्रकरण की जांच मानवाधिकार आयोग को सौंपी। आयोग की जांच में भी तात्कालीन मुसाफिरखाना कोतवाल पारसनाथ सिंह,एसआई दिनेश सिंह, आरक्षी सूर्य प्रकाश,देवेश कुमार,पुष्प राज,ऋषिराज,तात्कालीन बाजार शुकुल थानाध्यक्ष अरविंद तिवारी,एसआई क्राइमब्राांच शिवाकांत प्रथम दृष्टया अधिवक्ता राघवेंद्र द्विवेदी को पुलिस अभिरक्षा में चोट पहुंचाने के दोषी पाये गये। इस मामले में इन पुलिसकर्मियों के अलावा तात्कालीन एसपी केके गहलोत की भूमिका को भी अभियोगिनी ने संदिग्ध बताया।

इस मामले में आयोग की रिपोर्ट दाखिल होने के बाद सभी पक्षकारों की तरफ से हाईकोर्ट में जवाब दाखिल किया गया। जिस पर सुनवाई के पश्चात न्यायमूर्ति अजय लांबा व दिनेश कुमार सिंह की डबल बेंच ने तहरीर मिलते ही आरोपी पुलिसकर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर निष्पक्ष जांच कराने एवं डे-बाई-डे मानीटरिंग के लिए एसपी अमेठी को आदेशित किया है। हाईकोर्ट ने मानवाधिकार आयोग की जांच रिपोर्ट को भी विवेचना का अंग बनाने के लिए कहा है।

वहीं हाईकोर्ट ने अधिवक्ता समेत अन्य के खिलाफ दर्ज मुकदमों की निष्पक्ष जांच का भी आदेश दिया है। पीड़ित अधिवक्ता राघवेंद्र द्विवेदी ने बताया कि हाईकोर्ट से उन्हें न्याय मिला है,वह जल्द ही मामले में शामिल रहे तात्कालीन एसपी समेत अन्य के खिलाफ तहरीर देकर मुकदमा दर्ज करायेंगे। हाईकोर्ट के इस कड़े आदेश से पुलिस महकमे में खलबली मच गई है।

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