थाईलैंड में भारतीय संस्कृति का हो रहा जबरदस्त सम्मान

थाईलैंड में भारतीय संस्कृति का हो रहा जबरदस्त सम्मान

सुलतानपुर 

 थाईलैंड में भारतीय संस्कृति का हो रहा जबरदस्त सम्मान

कम्बोडिया एकदम भारत लगता है । थाईलैंड में भारतीय संस्कृति के प्रति जबरदस्त सम्मान है ।  सिंगापुर में हिन्दी का पठन पाठन और विस्तार तेजी से हो रहा है । वियतनाम में हिन्दी साहित्य के हर पहलू पर लिखा जा रहा है । '  यह बातें वरिष्ठ साहित्यकार डॉ.ओंकारनाथ द्विवेदी ने 'स्वतंत्र प्रभात' से एक विशेष वार्ता में कहीं । वरिष्ठ साहित्यकार डॉ.ओंकार नाथ द्विवेदी दक्षिण पूर्व एशिया के चार देशों की साहित्यिक यात्रा से  चार जून को लौटे हैं । 

01 दिसम्बर 1953 को जिले के कुछमुछ गांव में जन्में डॉ.ओंकारनाथ द्विवेदी ने संत तुलसीदास पी.जी.कालेज कादीपुर में लगभग बयालिस वर्षों तक अध्यापन किया है ।इन दिनों त्रैमासिक पत्रिका  अभिदेशक का सम्पादन कर  रहे डॉ.द्विवेदी की काव्य ,नाटक ,निबंध ,मुक्तक ,संस्मरण, हास्य व्यंग्य आदि में  पन्द्रह पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं । उ.प्र. हिन्दी संस्थान ने दो बार आपको सम्मानित किया है । राणा प्रताप पी.जी.कालेज में हिन्दी प्रवक्ता ज्ञानेन्द्र विक्रम सिंह 'रवि' बताते हैं -  अवधी , ब्रजभाषा और खड़ी बोली में समान रुप से लिखने वाले डॉ. द्विवेदी की रचनाओं का प्रसारण विगत पचीस वर्षों से रेडियो पर हो रहा है । अभी तक पांच देशों की साहित्यिक यात्रा कर चुके हैं । 

इस बार पच्चीस मई से तीन जून तक  दस दिवसीय यात्रा के दौरान बियतनाम के भारतीय महावाणिज्यिक दूतावास में आयोजित समारोह में हिन्दी के वैश्विक रुप पर बतौर मुख्य वक्ता डॉ.द्विवेदी का व्याख्यान हुआ ।  कम्बोडिया में लघुकथा और हाइकू पर संगोष्ठी तथा सिंगापुर व सुवर्णभूमि में आयोजित  काव्यगोष्ठी  में बतौर अतिथि डॉ.ओंकारनाथ द्वितीय की सक्रिय भागीदारी रही ।  बियतनाम के होचीमिन्ह सिटी में सत्ताइस मई को आयोजित समारोह में डॉ.ओंकारनाथ द्विवेदी को 'अंतरराष्ट्रीय हिन्दी उत्सव सम्मान ' प्रदान किया गया । 

डॉ.द्विवेदी ने बताया कि बियतनाम मे हिंदी की सबसे बडी साहित्य साधिका और हिंदी की ध्वजा वाहक श्रीमती साधना सक्सेना हैं । वहाँ साहित्य के हर पक्ष पर लिखा जा रहा है । कंबोडिया में हिंदी की स्थिति ज्यादा मजबूत है,यहाँ हिंदी भाषी भी अधिक हैं । सिंगापुर में भी हिंदी का पठन पाठन कालेजों और विश्वविद्यालयों मे हो रहा है,बाजार और फिल्मों ने हिंदी का खूब विस्तार किया है। थाई लैंड की हालत भी ऐसी ही है।इन सभी देशों मे बौद्ध धर्म और भारतीय संस्कृति के प्रति सम्मान है। कंबोडिया भारत लगता है। ग्यारहवीं शती में बना अंकोरवाट का मंदिर अद्भुत है,यह बौद्ध मंदिर है।इन देशों के बाजार पर चीन छाया हुआ है।

अवधीमंच से जुड़े डॉ.ओंकारनाथ द्विवेदी की इन देशों की साहित्यिक यात्रा और उनको  विदेश में मिले  सम्मान पर वरिष्ठ साहित्यकार डॉ.आद्या प्रसाद सिंह 'प्रदीप', कमल नयन पाण्डेय , मथुरा प्रसाद सिंह 'जटायु' , डॉ.शोभनाथ शुक्ल , डॉ.सुशील कुमार पाण्डेय 'साहित्येन्दु ' , ज्ञानेन्द्र विक्रम सिंह 'रवि', अवनीश त्रिपाठी आदि ने जनपद का गौरव बताते हुये प्रसन्नता जताई है ।

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