तालाबों का अस्तित्व अतिक्रमण की चपेट में आकर मिटने की कगार पर

तालाबों का अस्तित्व अतिक्रमण की चपेट में आकर मिटने की कगार पर

जिला ब्यूरो चीफ प्रवीण तिवारी के साथ शिवशंकर तिवारी की रिपोर्ट

रामसनेहीघाट बाराबंकी
स्थानीय तहसील क्षेत्र अंतर्गत विभिन्न गांव के अभिलेखों में दर्ज 3772 तालाबों में से सैकड़ों तालाबों का अस्तित्व अतिक्रमण की चपेट में आकर मिटने की कगार पर है।

वहीं प्रशासन सभी तालाबों को अतिक्रमण से मुक्त घोषित करने की रिपोर्ट भेज कर शासन को गुमराह कर रहा है।


तहसील क्षेत्र अंतर्गत विभिन्न गांव में 3772 तालाबों का 2392 हेक्टेयर रकबा दर्ज है जिनमें से जहां ग्रामीण क्षेत्र के अधिकांश तालाब अतिक्रमण की चपेट में है वही कस्बाई क्षेत्र के तालाबों का तो अस्तित्व ही मिटने की कगार पर है।

तहसील मुख्यालय स्थित धरौली गांव में दर्ज अभिलेखों के मुताबिक 26 तालाबों का करीब 90 बीघा दर्ज है लेकिन इसी गांव में 1 दर्जन से अधिक लोगों के विरुद्ध तालाब पर अतिक्रमण करने का मुकदमा कई सालों से चल रहा है इसी प्रकार मुख्यालय के ही बनी कोडर गांव के 19 तालाबों में से कई गायब हो चुके है।

आश्चर्य की बात तो यह है कि इन दोनों गांव के करीब 10 दर्जन लोगों के विरुद्ध तालाब पर अतिक्रमण का मुक़दमा तहसील में विचाराधीन है। कोटवा सड़क के 10 तालाबों में से सड़क के किनारे स्थित तालाबों पर अतिक्रमण बना हुआ है।

तहसील क्षेत्र के सादुल्लापुर गांव में 62 तालाबों का 197 बीघा रकबा सनौली गांव का 217 बीघा रकबा तालाब के रूप में दर्ज है लेकिन इनमें से कई पर अतिक्रमण बना हुआ है।

आश्चर्य की बात तो यह है कि धरौली बनी कोडर कोटवा सड़क सहित कई गांव में तालाब पर अतिक्रमण होने के बाबत सैकड़ों लोगों पर गत कई वर्षों से 115 सी का मुकदमा तहसील में ही चल रहा है जिसका निर्णय ना होने के कारण तालाबों पर से अतिक्रमण नहीं हटाया जा सका है।

उसके बावजूद तहसील प्रशासन न्यायालय और शासन को किसी भी तालाब पर अतिक्रमण ना होने की रिपोर्ट भेजकर उसे गुमराह करने में लगा है।

तालाब से अतिक्रमण हटाने का है सख्त निर्देश
भविष्य में होने वाले जल संकट को देखते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने वर्ष 2001 में हिंच लाल बनाम कमला देवी के मुकदमे में फैसला देते हुए शासन को स्पष्ट निर्देश दिया था

कि 1 जनवरी 1950 को अभिलेखों में दर्ज सभी तालाबों को उनके मूल स्वरूप में वापस लाया जाए अगर इस बीच तालाब की भूमि पर किसी प्रकार का पट्टा दिया गया है तो उसे निरस्त कर दे यही नहीं अगर किसी ने अतिक्रमण कर रखा है तो उसे हटवा दे ।

तथा इसकी समीक्षा उच्च न्यायालय बराबर करता रहे शासन द्वारा इस संबंध में पाक्षिक रिपोर्ट राजस्व अधिकारियों से तलब करने के निर्देश दिए गए ।

यही नहीं शासन द्वारा बाद में अतिक्रमण हटाने में आने वाले खर्च की वसूली तालाब पर अतिक्रमण करने वालों से करने के भी निर्देश दिए गए हैं ।

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